इस्राइल ने गाजा में इस्राइली बलों द्वारा पिछले महीने 15 फलस्तीनी चिकित्सकों की हत्या की जांच की है। इस्राइली जांच में रविवार को कहा गया है कि इसमें पेशेवर गलतियां सामने आई हैं, जिसके चलते एक डिप्टी कमांडर को बर्खास्त कर दिया गया है।
चिकित्सकों पर इस्राइली बलों की गोलीबारी को अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने युद्ध अपराध बताया। अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत चिकित्साकर्मियों को विशेष सुरक्षा प्राप्त है। मृतकों में रेड क्रिसेंट के आठ कर्मचारी, गाजा की नागरिक सुरक्षा आपातकालीन इकाई के छह सदस्य और फलस्तीनियों के लिए संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी (UNRWA) का एक कर्मचारी शामिल था। इंटरनेशनल रेड क्रॉस/रेड क्रिसेंट ने कहा कि यह आठ वर्षों में उसके कर्मियों पर सबसे घातक हमला था।
हालांकि, इस्राइल ने पहले दावा किया कि जब सैनिकों ने गोलीबारी की तो चिकित्सकों के वाहनों में आपातकालीन संकेत नहीं थे, लेकिन बाद में उसने अपना बयान वापस ले लिया। एक चिकित्सक से बरामद सेलफोन वीडियो ने इस्राइल के शुरुआती बयान का खंडन किया।
सैन्य जांच में पाया गया है कि डिप्टी बटालियन कमांडर को गलतफहमी हुई कि एंबुलेंस हमास आतंकवादियों की थीं। वीडियो फुटेज से पता चला है कि जब एंबुलेंस एक अन्य एंबुलेंस (जिस पर पहले गोलीबारी हुई) की सहायता के लिए रुकीं, तो उनकी लाइटें चमक रही थीं और लोगो दिखाई दे रहे थे। जांच में कहा गया है कि रात में कम रोशनी के कारण डिप्टी कमांडर को लगा कि उसके सैनिक खतरे में हैं। जिसके बाद, एंबुलेंस पर गोलीबारी शुरू की गई, जो पांच मिनट तक चली। इसके बाद सैनिकों ने घटनास्थल पर रुकी संयुक्त राष्ट्र की एक कार पर भी गोलीबारी शुरू कर दी।
ये भी पढ़ें: Gaza: नेतन्याहू बोले- हमास को तबाह करने और बंधकों की रिहाई तक जारी रहेगा युद्ध, इस्राइल के पास और विकल्प नहीं
शवों को सामूहिक कब्र में दफनाया
इस्राइली बलों ने 23 मार्च को राफा के तेल अल-सुल्तान जिले में आक्रमण शुरू किया। हमले में हताहतों को निकालने के लिए दोपहर के आसपास आपातकालीन टीमें पहुंची थीं, जिसके बाद से वह लापता हो गईं। इस्राइली बलों की गोलीबारी में रेड क्रिसेंट के आठ, छह नागरिक सुरक्षा कर्मचारी और संयुक्त राष्ट्र के एक कर्मचारी की मौत हो गई। सैनिकों ने शवों और उनके क्षतिग्रस्त वाहनों को बुलडोजर से रौंद दिया और उन्हें सामूहिक कब्र में दफना दिया।
सेना ने माना- एंबुलेंस-शवों को कुचलना गलत था
सेना ने माना कि एंबुलेंस और शवों को कुचलना गलत था, लेकिन गोलीबारी को छिपाने की कोशिश नहीं की गई थी। सेना ने कहा कि शवों को इसलिए दफनाया गया ताकि जानवर उन्हें नुकसान न पहुंचाएं और रास्ता खाली हो सके। जांच में पाया गया है कि मारे गए लोग निहत्थे थे और उनके वाहनों में कोई हथियार नहीं मिला। जांच में कहा गया है कि डिप्टी कमांडर ने अपने गलत फैसले की झूठी रिपोर्ट दी, जिसके चलते उसे बर्खास्त कर दिया गया।
ये भी पढ़ें: Israel-Hezbollah: 'जब तक इस्राइली सेना दक्षिणी लेबनान में रहेगी, हथियार...',हिजबुल्ला ने दी नेतन्याहू को धमकी
23 मार्च से लापता थीं आपातकालीन टीमें
इस्राइली बलों ने 23 मार्च को राफा के तेल अल-सुल्तान जिले में आक्रमण शुरू किया। हमले में हताहतों को निकालने के लिए दोपहर के आसपास आपातकालीन टीमें पहुंची थीं, जिसके बाद से वह लापता हो गईं। हालांकि, इस्राइली सेना ने उस दिन पहले ही क्षेत्र को खाली करने की अपील की थी। सेना ने कहा था कि यहां हमास के आतंकवादी छिपे हैं। वहीं, नागरिक सुरक्षा ने अपने अलर्ट में कहा था कि क्षेत्र में विस्थापित फलस्तीनियों ने शरण ली है, जिन पर इस्राइली सेना ने हमला किया। जब उन्हें बचाने के लिए आपातकालीन टीम वहां पहुंची तो इस्राइली सैनिकों ने उसे भी घेर लिया।
इस्राइली बलों ने कई घंटों तक आपातकालीन टीमों पर हमला किया
संयुक्त राष्ट्र ने रविवार को कहा कि इस्राइली बलों ने 23 मार्च को ही पहली टीम को मार दिया था। जब पहली टीम को बचाने के लिए अन्य आपातकालीन टीमें वहां पहुंची तो इस्राइली बलों ने कई घंटों तक उन पर हमला किया। वहीं, इस्राइली बलों का कहना है कि उन्होंने उन वाहनों पर गोलीबारी की जो बिना किसी आपातकालीन संकेतों के उनकी ओर संदिग्ध रूप से बढ़ रहे थे। प्रारंभिक आकलन से पता चला है कि सैनिकों ने वहां हमास कार्यकर्ता मोहम्मद अमीन शोबाकी और आठ अन्य आतंकवादियों को मार गिराया।
संबंधित वीडियो