सार
इस्राइल की एक अदालत ने फलस्तीनी कार्यकर्ता अवदा हथलीन की मौत के आरोपी यहूदी निवासी यिनोन लेवी को नजरबंदी से रिहा कर दिया। अदालत ने माना कि लेवी ने गोली चलाई, लेकिन यह साबित नहीं हो सका कि उसी की गोली से हथलीन की मौत हुई। हालांकि कोर्ट के फैसले के बाद गांव में आक्रोश का माहौल है। साथ ही महिलाओं ने तो भूख हड़ताल पर भी शुरू कर दिया है।
इस्राइल के पश्चिमी तट के उम्म अल-खैर गांव में एक प्रसिद्ध फलस्तीनी कार्यकर्ता की मौत के मामले में आरोपी यहूदी बस्ती निवासी यिनोन लेवी को इस्राइली अदालत ने शुक्रवार को नजरबंदी से रिहा कर दिया। अदालत ने माना कि लेवी ने गोली चलाई थी, लेकिन यह साबित नहीं हो सका कि उसकी गोली से ही 31 वर्षीय अवदा हथलीन की मौत हुई। मामले में सुनवाई के दौरान न्यायाधीश हवी टोकर ने फैसले में लिखा कि घटना के दिन लेवी ने गांव में गोलीबारी की थी, पर संभव है उसने आत्मरक्षा में ऐसा किया हो। कोर्ट ने यह भी कहा कि लेवी से अब कोई तत्काल खतरा नहीं है, इसलिए नजरबंदी जारी रखना उचित नहीं होगा। हालांकि, उसे एक महीने तक गांववासियों से संपर्क नहीं करने का आदेश दिया गया है।
बता दें कि इस्राइली अदालत का यह फैसला उस घटना के बाद आया है, जिसमें एक अंग्रेजी शिक्षक हथलीन जो कि इस्राइली बस्ती में हो रहे हिंसा के खिलाफ मुखर आवाज थे। इस झड़प के दौरान गोली लगने से मारे गए। वीडियो में लेवी को पिस्तौल लहराते और निहत्थे फ़लस्तीनियों से उलझते हुए देखा गया था, लेकिन गोली किसे लगी, यह स्पष्ट नहीं था।
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हेथलीन का शव अभी तक इस्राइली सेना के पास
हालांकि इस्राइली सेना अभी तक हथलीन का शव परिजनों को नहीं लौटा रही है और कह रही है कि शव तभी मिलेगा जब परिवार उसे निकटतम अधिकृत कब्रिस्तान में दफनाने के लिए तैयार हो। इस फैसले के विरोध में गांव की करीब 70 महिलाएं शुक्रवार से भूख हड़ताल पर बैठ गई हैं और शव को गांव में दफनाने की अनुमति की मांग कर रही हैं। मामले में गांव के 18 फ़लस्तीनियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से छह अब भी हिरासत में हैं।
मानवधिकार वकील ने दी प्रतिक्रिया
वहीं इस मामले में मानवाधिकार वकील एइते मैक ने अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह कोई चौंकाने वाली बात नहीं है। यहां अक्सर फलस्तीनी पीड़ितों को ही संदिग्ध माना जाता है, जबकि यहूदी आरोपियों को पीड़ित समझा जाता है।
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फलस्तीनियों के खिलाफ हिंसा के लिए चर्चित रहे यिनोन
गौरतलब है कि यिनोन लेवी पहले भी फ़िलिस्तीनियों के खिलाफ हिंसा के मामलों में चर्चित रहे हैं और उन पर अमेरिका तथा कई पश्चिमी देशों ने प्रतिबंध लगाए थे। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता में आने के बाद उन पर लगे प्रतिबंध हटा दिए थे।