आयरन डोम- इस्राइल का कवच
- फोटो : अमर उजाला
आयरन डोम
- उद्देश्य: छोटे और नजदीकी दूरी के रॉकेट व मिसाइलों को इंटरसेप्ट करना।
- तैनाती: आयरन डोम इस्राइल में 2011 से सक्रिय है।
- निर्माणकर्ता: इस्राइली कंपनी राफेल और इस्राइली रक्षा मंत्रालय।
- अमेरिकी की भूमिका: इसमें अमेरिका ने भारी आर्थिक मदद दी है।
- सफलता दर: इस्राइल के अनुसार 90% से ज्यादा।
कैसे काम करता है आयरन डोम?
जब कोई रॉकेट सीमा में प्रवेश करता है, तो आयरन डोम की रडार उसकी पहचान करता है और कंप्यूटर सिस्टम तय करता है कि वह रॉकेट आबादी वाले क्षेत्र में गिरेगा या नहीं। अगर हां, तो इंटरसेप्टर मिसाइल तुरंत दागी जाती है और हवा में ही उसे नष्ट कर देती है। ईरान के हमलों से पहले गाजा से हमास की तरफ से दागे गए हजारों रॉकेट को आयरन डोम ने सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया था।
यह भी पढ़ें -
Israel Iran Tension: इस्राइल-ईरान में हालिया संघर्ष की वजह क्या, कैसे दुश्मन बने एक वक्त के दोस्त? जानें सबकुछ
डेविड्स स्लिंग: मीडियम रेंज का सुरक्षा कवच
- उद्देश्य: मध्यम दूरी की मिसाइलों से रक्षा, जैसे कि लेबनान के हिजबुल्ला के पास मौजूद मिसाइलें।
- दूरी: लगभग 40 से 300 किलोमीटर तक की मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर सकता है।
- निर्माणकर्ता: इस्राइल की राफेल कंपनी और अमेरिका की रेथियॉन।
- तैनाती: डेविड्स स्लिंग इस्राइल में साल 2017 से सक्रिय है।
कैसे काम करता है डेविड्स स्लिंग?
डेविड्स स्लिंग की विशेषता की बात करें तो यह अत्याधुनिक रडार और मिसाइल ट्रैकिंग टेक्नोलॉजी का प्रयोग करता है, जिससे तेजी से प्रतिक्रिया दी जा सकती है। वहीं डेविड्स स्लिंग की हाल की भूमिका की बात करें तो गाजा युद्ध और हिजबुल्ला से जुड़े हमलों के दौरान कई बार इसका उपयोग इस्राइल की तरफ से किया गया है। बता दें कि, डेविड्स स्लिंग के अन्य कई नाम भी हैं, इसे 'स्टनर' और 'स्काईसेप्टर' भी कहा जाता है।
एरो सिस्टम: लंबी दूरी की मिसाइलों का दुश्मन
- उद्देश्य: ईरान जैसी शक्तियों की तरफ से दागी गई लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकना।
- दूरी: हजारों किलोमीटर दूर से आने वाली मिसाइलों को अंतरिक्ष में ही नष्ट कर सकता है।
- निर्माणकर्ता: इस्राइल और अमेरिका की संयुक्त परियोजना।
- तैनाती: इस्राइल में एरो-2 के बाद अब उसका उन्नत संस्करण एरो-3 सक्रिय है।
एरो का काम और निर्माण
एरो सिस्टम किसी भी मिसाइल को पृथ्वी के वायुमंडल के बाहर ही रोकने में सक्षम है। इस्राइल ने हाल ही में यमन के हूती विद्रोहियों की तरफ से दागी गई मिसाइलों को रोकने में इसका इस्तेमाल किया है। एरो सिस्टम को बनाने में लागत बात करें तो एक एरो मिसाइल की लागत करीब 20 लाख डॉलर (लगभग 16 करोड़ रुपये) हो सकती है।
यह भी पढ़ें -
Israel vs Iran: मोसाद ने कैसे ईरान में बनाया ड्रोन का बेस, कहां किए हमले; किन सैन्य अफसरों को मारा, वजह क्या?
आयरन बीम: भविष्य का लेजर डिफेंस सिस्टम
- स्थिति: अभी परीक्षण और विकास की अवस्था में है।
- तकनीक: लेजर आधारित इंटरसेप्टर, जो दुश्मन के ड्रोन, मोर्टार और रॉकेट को जलाकर नष्ट कर देगा।
आयरन बीम के क्या है फायदे?
आयरन बीम बेहद सस्ती लागत निर्मित होगा, इसके एक इंटरसेप्शन की लागत कुछ डॉलर मात्र और ये तेजी प्रतिक्रिया देने में सक्षम है। इस्राइल की उम्मीद है कि यह सिस्टम भविष्य में गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
इस्राइल के अधिकारी खुद मानते हैं कि कोई भी हवाई सुरक्षा प्रणाली 100 फीसदी सुरक्षा नहीं दे सकता। फिर भी, यह सिस्टम अब तक हजारों जानें बचा चुका है और बड़े पैमाने पर तबाही को रोकने में सफल रहा है। शुक्रवार के हमलों में भले ही कुछ मिसाइलें तेल अवीव जैसे शहरों तक पहुंच गईं, लेकिन बड़ी संख्या में मिसाइलों को हवा में ही इस सिस्टम ने कुशलता नष्ट किया है।
इस्राइल को चौतरफा दुश्मनों से खतरा
इस्राइल को खतरा केवल एक देश से नहीं, बल्कि एक पूरे नेटवर्क से है, जैसे उसके आस-पास के कई देश और उसमें शामिल अन्य विद्रोही गुट हैं (जिसे Axis of Resistance भी कहा जाता है)। इसमें हिजबुल्ला (लेबनान), हमास (गाजा, फलस्तीन), हूती विद्रोही (यमन) और ईरान समर्थित अन्य गुट शामिल हैं। इन सबका उद्देश्य इस्राइल के खिलाफ लगातार दबाव बनाना है, और यही कारण है कि इस्राइल ने एक ऐसा एयर डिफेंस नेटवर्क खड़ा किया है जो पूरी दुनिया में अनोखा है।