दो महीनों के बाद भी हमास और इस्राइल के बीच जारी युद्ध शांत नहीं हो रहा। अंशकालिक युद्ध विराम के बाद दोनों पक्ष फिर आमने-सामने हैं। उधर, लड़ाई का केंद्र बने गाजा में स्थितियां दिन-ब-दिन बिगड़ती ही जा रही हैं। इस्राइल की ओर से दक्षिणी गाजा के मुख्य शहर में हमले किए जा रहे हैं। वहीं हमास ने भी चेतावनी दी है कि जब तक कैदियों की रिहाई की उसकी मांग को पूरा नहीं किया जाता, तब तक कोई भी इस्राइली बंधक इस क्षेत्र से जीवित नहीं जाएगा।
पहले जानते हैं कि 7 अक्तूबर को क्या हुआ था?
हमास ने 7 अक्तूबर 2023 को इस्राइल की अभेद्य मानी जाने वाली सुरक्षा व्यवस्था को तोड़ते हुए इसके इलाकों में हमला किया था। इस हमले में करीब 1200 से ज्यादा इस्राइलियों की जानें गई थीं। इस दौरान हमास लड़ाके 240 लोगों को बंधक बनाकर गाजा ले गए थे। वहीं इस्राइल के जवाबी हमलों में करीब 18,000 फलस्तीनियों की मौत हो चुकी है। संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि गाजा के 24 लाख लोगों में से 19 लाख अपने घरों से विस्थापित हो गए हैं, उनमें आधे बच्चे शामिल हैं।
इस्राइल में हमास के हमले
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अभी हमास-इस्राइल युद्ध के क्या हालात हैं?
दरअसल, हमास और इस्राइल के बीच युद्ध शुरू हुए 65 दिन बीत चुके हैं, लेकिन इसके खत्म होने के फिलहाल कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं। सोमवार को सामने आईं इस्राइली मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दक्षिणी गाजा पट्टी में लड़ाई के दौरान इस्राइली सेना के तीन और सैनिकों की मौत हो गई है। इससे हमास के खिलाफ जमीनी हमले में मारे गए सैनिकों की संख्या 104 हो गई। इन सैनिकों की मौत खान यूनिस इलाके में एक विस्फोटक उपकरण से हुई। इस घटना में अन्य चार सैनिक घायल हो गए, जिनमें से एक की हालत गंभीर है। इस्राइली सेना के अनुसार, 27 अक्तूबर को जमीनी आक्रमण शुरू होने के बाद से लगभग 600 आईडीएफ सैनिकों को चोटें आई हैं।
उधर हमास ने रविवार को चेतावनी दी कि इस्राइल बिना आदान-प्रदान के बंधकों को जीवित नहीं ले जा सकता है। इस चेतावनी के बाद इस्राइली सेना ने रविवार और सोमवार को गाजा में रॉकेट दागे। हमास के एक बयान में कहा गया कि रविवार को उत्तरी गाजा के कमाल अदवान अस्पताल में हुए इस्राइली हमले में दो महिलाओं की मौत हो गई, जबकि दर्जनों लोग घायल हुए हैं। उधर इस्राइल का कहना है कि करीबन 137 बंधक अभी भी हमास के कब्जे में हैं।
गाजा में स्थिति क्या है?
युद्ध की भयावह परिस्थियों के साथ ही अब गाजा में मौसम से हालात बिगड़ने की आशंकाएं उत्पन्न हो गई हैं। गाजा पट्टी में ढंड का मौसम तेजी से दस्तक दे रहा है। ब्रिटिश अखबार द गार्जियन ने रिपोर्ट दी है कि तटीय इलाकों में पहले ही तेज हवाएं पहले बहना शुरू हो चुकी हैं, जिसके कारण यहां लगाए गए तंबू तितर-बितर हो गए हैं। युद्ध के चलते लगभग 18 लाख फलस्तीनी विस्थापित हो गए हैं। ऐसे में तटीय इलाकों में बिगड़ते मौसम ने उन लोगों को संकट में डाल दिया है, जिनके पास आश्रय नहीं है या कम साधन हैं।
सर्दियों के आगमन के साथ पहले से ही खराब गाजा की लगभग सभी स्वास्थ्य सेवाएं और बदतर हो गई हैं। अखबार की रिपोर्ट का दावा है कि महिलाएं असंक्रमित परिस्थितियों में तंबुओं में बच्चे को जन्म दे रही हैं। वहीं, लकड़ी की आग से निकलने वाला धुआं सांस से जुड़ी बीमारियों को बढ़ा रहा है। यहां महज 10 फीसदी मेडिकल स्टोर ही काम कर रहे हैं, क्योंकि इनकी दवाएं खत्म हो चुकी हैं। जिन लोगों को दवा की जरूरत होती है उन्हें कई बार तो बिना दवा के लौटना पड़ जाता है।
विपरीत मौसम में खुले में जिंगदी जी रहे लोगों के अपने-अपने दर्द हैं। उत्तरी शहर बेत लाहिया से राफा में विस्थापित महमूद अबू रयान ने अपनी परेशानियों का जिक्र किया। रयान कहते हैं, 'यहां बहुत ठंड है और तम्बू बहुत छोटा है। मेरे पास बस मेरे पहनने के कपड़े हैं और मुझे अभी भी नहीं पता कि अगला कदम क्या होगा।'
फलस्तीनी महिला सोअद करमूट बताती हैं, 'मैं एक कैंसर रोगी हूं। हम यहां कड़ाके की ठंड में रह रहे हैं। कोई बाथरूम नहीं हैं, मेरे सोने के लिए कोई गद्दा नहीं है। मैं रेत पर सो रही हूं।'
डब्ल्यूएचओ ने जाहिर की बीमारियों की आशंका
विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, गाजा पट्टी में संक्रामक रोग चिंताजनक रूप से बढ़ रहे हैं। यहां कई लोगों में दस्त, श्वसन संक्रमण, पीलिया, हेपेटाइटिस ए और मेनिनजाइटिस से ग्रस्त हैं। उधर, दवाओं की कमी के चलते घायलों में ऑपरेशन के बाद संक्रमण से मौतें हो रही हैं। कई ऐसे लोग हैं जो लंबे समय से बीमार हैं और दवा पाने में असमर्थ हैं। ऐसे लोग अक्सर युद्ध के पीड़ितों के रूप में बिना दर्ज हुए मर रहे हैं। विस्थापित निवासी रैमजी का भी ऐसा ही कुछ मामला हैं।
रैमजी ने बताया, 'पिछले हफ्ते मेरी मां की मृत्यु हो गई। उन्हें उच्च रक्तचाप और मधुमेह था। हम राफा यूएनआरडब्ल्यूए आश्रय में बदतर परिस्थितियों में रह रहे हैं। हम तंबू में हैं, हमारी जरूरत की सबसे बुनियादी चीजों की कमी है और हर चीज मिलना मुश्किल है।'