सार
फलस्तीनी आतंकी गुटों के हमलों से इस्राइल में मौतें भले न हों, लेकिन ये नागरिकों को खौफजदां करते रहते हैं। इस्राइली शहरों में जब भी ये आतंकी संगठन रॉकेट दागते हैं तो सायरन गूंजने लगते हैं तो नागरिक घबराकर बमों से बचाव के लिए बनाए गए सुरक्षित ठिकानों व आश्रयगृहों की ओर भागने लगते हैं।
इस्राइल के लिए फलस्तीनी आतंकी संगठन हमास और हिजबुल्ला का खतरा बढ़ गया है। इन्होंने एक लाख से ज्यादा रॉकेट एकत्रित कर लिए हैं। लेकिन, चौतरफा हमलों की स्थिति से निपटने की उसकी तैयारी नहीं है, इसलिए इस्रायली सेना चिंतित है। हालांकि, इस्राइल ने इन्हें विफल करने की नई तकनीक ईजाद कर ली है।
फलस्तीनी आतंकी गुटों के हमलों से इस्राइल में मौतें भले न हों, लेकिन ये नागरिकों को खौफजदां करते रहते हैं। इस्रायली शहरों में जब भी ये आतंकी संगठन रॉकेट दागते हैं तो सायरन गूंजने लगते हैं तो नागरिक घबराकर बमों से बचाव के लिए बनाए गए सुरक्षित ठिकानों व आश्रयगृहों की ओर भागने लगते हैं।
रॉकेट, मिसाइल व ड्रोन को मार गिराती है आयरन डोम बैटरी
दरअसल, इस्राइल ने अपने देश को रॉकेटों, मिसाइलों, ड्रोन व यूएवी हमलों से बचाने और इन्हें नीचे गिराने के लिए आयरन डोम बैटरी विकसित की है। आयरन डोम बैटरी का विकास इस्राइल ने अमेरिकी मदद से किया है। इस तकनीक की सफलता दर 90 फीसदी है। इस तकनीक से कम, मध्यम और लंबी दूरी के रॉकेट, बैलिस्टिक मिसाइल, ड्रोन, यूएवी और यहां तक कि विमानों को भी मार गिराया जा सकता है।
इस्रायली सेना अभी भी रॉकेट हमलों से चिंतित
हालांकि, इस्राइली सेना अभी भी रॉकेट हमलों से चिंतित है। एक अनुमान के अनुसार गाजा पट्टी में हमास के पास 30,000 और लेबनान में हिजबुल्ला के पास 1,30,000 से अधिक रॉकेट हैं। इस्राइल का आरोप है कि ये ईरान ने मुहैया कराए हैं। इस्रायली सेना को इस बात का डर है कि चौतरफा युद्ध की स्थिति में हमास और हिजबुल्ला दोनों एक दिन में 4,000 रॉकेट हमले कर सकते हैं। इस्राइली सेना ऐसे हमलों से निपटने के लिए तैयार नहीं है।