सार
इस्राइल ने वेस्ट बैंक में अपने नियंत्रण को मजबूत करने और फलस्तीनी सत्ता को कमजोर करने के लिए अहम फैसले लिए। इसके लिए जमीन बिक्री, रिकॉर्ड सार्वजनिक करना और संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण पर नियंत्रण बढ़ाया गया। फलस्तीन और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इसे अवैध और खतरनाक कदम बताया है।
इस्राइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू
- फोटो : ANI
इस्राइल अब वेस्ट बैंक में अपने नियंत्रण को और मजबूत करने और फलस्तीन की सीमित सत्ता को और कमजोर करने की दिशा में काम कर रहा है। इसके लिए इस्राइल की सुरक्षा कैबिनेट ने रविवार को कई अहम फैसले लिए हैं। वित्त मंत्री बेजल एल स्मोट्रिच के नेतृत्व में कैबिनेट ने जमीन की बिक्री, रिकॉर्ड सार्वजनिक करने और संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण पर इस्राइली नियंत्रण बढ़ाने का निर्णय लिया। इन फैसलों को लेकर उनका कहना है कि हम फलस्तीनी राज्य की धारणा को दफन करना जारी रखेंगे।
माना जा रहा है कि इस्राइल कैबिनेट का यह फैसला फलस्तीनी सत्ता को कमजोर और यहूदी बसावटों के विस्तार को आसान बनाएंगे। हालांकि फलस्तीन और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इसे खतरनाक और अवैध कदम बताया है। इस्राइल विरोधी संगठन पीस नाउ के शोधकर्ता ने इस फैसले को बहुत महत्वपूर्ण बताया, लेकिन कहा कि इसे लागू करने के लिए वेस्ट बैंक में इस्राइल के शीर्ष कमांडर की मंजूरी भी जरूरी है।
फलस्तीन के राष्ट्रपति ने बताया खतरनाक
फलस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने इस निर्णय को खतरनाक और बसावटों को कानूनी रूप देने का खुला प्रयास बताया। उन्होंने अमेरिका और यूएन सुरक्षा परिषद से तुरंत हस्तक्षेप की अपील की। जॉर्डन की विदेश मंत्रालय ने भी इस फैसले की आलोचना की और कहा कि यह अवैध इस्राइली अधिकार थोपने और बसावटों को मजबूत करने का प्रयास है।
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अब समझिए इस फैसले की अहम बातें
- वेस्ट बैंक में यहूदी नागरिकों को फलस्तीनी जमीन खरीदने की रोक हटाना।
- जमीन के रिकॉर्ड सार्वजनिक करना ताकि बसावटें आसानी से बनाई जा सकें।
- हिब्रोन जैसे संवेदनशील धार्मिक क्षेत्रों में निर्माण की योजना इस्राइली अधिकारियों को सौंपना।
- पर्यावरण और पुरातात्विक मामलों में इस्राइल को फिलिस्तीनी क्षेत्रों में हस्तक्षेप की अनुमति।
- एक कमिटी को पुनर्जीवित करना, जो इस्राइल को प्रोएक्टिव तरीके से जमीन खरीदने की अनुमति देगी।
वेस्ट बैंक की पूरी कहानी, यहां समझिए
बता दें कि वर्तमान में वेस्ट बैंक का 40 प्रतिशत हिस्सा फलस्तीन के नियंत्रण में है, जबकि शेष हिस्सा इस्राइल नियंत्रित है। फलस्तीनियों को निजी तौर पर यहूदी नागरिकों को जमीन बेचने की अनुमति नहीं है। वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम में 7 लाख से ज्यादा यहूदी रहते हैं। यह क्षेत्र 1967 में इस्राइल ने कब्जा किया था और फलस्तीन इसे भविष्य के राज्य के लिए मांगते हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय बसावटों को अवैध मानता है और इसे शांति की राह में बाधा समझता है।
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हालांकि इससे पहले दिसंबर में इस्राइल की कैबिनेट ने वेस्ट बैंक में 19 नई यहूदी बसावटों को मंजूरी दी थी। जनवरी में यरुशलम के पास एक विवादित बसावट परियोजना का निर्माण शुरू करने का रास्ता भी साफ कर दिया गया, जिससे वेस्ट बैंक आधे में कट जाएगा। यह फैसले फिलिस्तीन के लिए बड़े राजनीतिक और भू-राजनीतिक खतरे को जन्म दे रहे हैं और भविष्य के फिलिस्तीनी राज्य की संभावनाओं को और कमजोर कर रहे हैं।
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