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इस्रायल में कोरोना वायरस के मामले रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे, लॉकडाउन की सख्ती पर विचार

Wed, 23 Sep 2020 04:57 PM IST
अमर शर्मा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, येरूशेलम
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
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इस्रायल में कोरोना वायरस के प्रकोप के कम होने के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं। सरकार ने बुधवार को कोरोना वायरस के मामलों के एक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की जानकारी दी है। सरकारी अधिकारियों को देशव्यापी लॉकडाउन पर कड़ाई पर चर्चा करने के लिए मिलना था, ठीक उससे पहले यह जानकारी सामने आई। 

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स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को 6,861 नए मामले आने की जानकारी दी। इस्रारयल में करीब 90 लाख की आबादी है। इस्रायलय में अब प्रति व्यक्ति के आधार पर दुनिया में कोरोना वायरस की उच्चतम दरों में से एक है, और स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि अस्पतालों में जगह जल्दी ही कम पड़ने वाली है। 



सरकार ने पिछले हफ्ते देशव्यापी लॉकडाउन लागू किया है, जिसमें स्कूलों, शॉपिंग मॉल, होटल और रेस्तरां को बंद कर दिया गया है। प्रतिबंधों को और कड़ा करने पर चर्चा करने के लिए कोरोना वायरस कैबिनेट की बुधवार को बैठक होनी थी। 
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मार्च के महीने में इस प्रकोप से निपटने के लिए इस्रायल की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसा हुई थी। देश ने अपनी सीमाओं को सील करने के लिए तेजी दिखाई और तुरंत लॉकडाउन लागू किया जिससे ऐसा लगा कि वायरस को काबू में कर लिया गया है। लेकिन सरकार ने अर्थव्यवस्था को जल्दी ही फिर से खोल दिया, और गर्मियों के दौरान यह महामारी फिर से फैल गई। इस बीच, पहले लॉकडाउन की वजह से अर्थव्यवस्था में आई गंभीर गिरावट में सुधार नहीं पाया है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने अस्पतालों को गैर-जरूरी सर्जरी में देरी करने और अतिरिक्त कोरोना वायरस वार्ड खोलने के निर्देश दिए हैं क्योंकि गंभीर मामलों की संख्या में वृद्धि जारी है।

आर्थिक गतिविधियों को और सीमित करने के अलावा, अधिकारियों ने प्रार्थना स्थलों को बंद करने और विरोध प्रदर्शनों पर पाबंदी लगाने पर चर्चा की है। इन दोनों फैसलों से लोगों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है। यह पाबंदियां ऐसे समय में लगाई जानी है जब इस्रायल में यहूदी अपने सबसे पवित्र त्योहार को मना रहे हैं, और कोरोना वायरस संकट से निपटने के तरीकों के लिए प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ साप्ताहिक प्रदर्शन हुए हैं।

उप स्वास्थ्य मंत्री योव किच ने कहा कि निकट भविष्य में प्रतिबंधों को और कड़ा करना होगा।

उन्होंने चैनल 12 टीवी को बताया, "शैक्षणिक संस्थान बंद किए जाएंगे, अर्थव्यवस्था आवश्यक कार्यों तक सीमित की जाएगी, प्रार्थना स्थलों के अंदर कोई प्रार्थना नहीं होगी, इनमें बाहरी प्रार्थना करने की व्यवस्था होगी, और प्रदर्शनकारियों को एक शहर से दूसरे शहर में यात्रा किए बिना प्रदर्शन की अनुमति होगी। हर कोई जहां चाहेगा वहां प्रदर्शन करेगा, जहां चाहेगा प्रार्थना करेगा और घर पर रहेगा। अभी यही जरूरी है।" 

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