किसी भी इस्राइली प्रधानमंत्री का संभवत सबसे महत्वपूर्ण काम है संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ अच्छे संबंध बनाए रखना। इसके साथ ही उन मांगों का विरोध करना जिन्हें इस्राइल की सुरक्षा को कमजोर करने वाला माना जाता है।
नेतन्याहू का काम क्यों कठिन हो रहा?
इस्राइल के सबसे लंबे समय तक सत्ता में रहने वाले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से ज्यादा लंबे समय तक संतुलन बनाए रखने का रिकॉर्ड किसी के पास नहीं है। लेकिन ईरान युद्ध में गतिरोध की स्थिति और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से शांति प्रयासों को आगे बढ़ाने की कोशिशों। इन दोनों के चलते नेतन्याहू का काम और भी कठिन होता जा रहा है। वह भी तब चुनाव में तीन महीना से कम समय है।
नेतन्याहू ने क्या कहा?
रविवार को नेतन्याहू ने गाजा में रुकी हुई युद्ध-विराम प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के ट्रंप के नए प्लान को ठुकरा दिया। उन्होंने कहा कि जब तक हमास के हथियार पूरी तरह से खत्म नहीं कर दिए जाते, तब तक इस्राइल उस लगभग 60 प्रतिशत इलाके से पीछे नहीं हटेगा जिस पर उसका कब्जा है।
क्या नेतन्याहू ट्रंप को नाराज करने का जोखिम उठा सकते हैं?
नेतन्याहू को ट्रंप को नाराज करने का जोखिम उठाना पड़ सकता है, जिनके बारे में उन्होंने बार-बार कहा है कि वे व्हाइट हाउस में इस्राइल सबसे अच्छा दोस्त रहा हैं। लेकिन हमास के साथ समझौते का जरा सा भी संकेत नेतन्याहू के दोबारा चुने जाने की संभावनाओं के लिए घातक हो सकता है, क्योंकि देश 7 अक्टूबर, 2023 के हमले से गहरे सदमे में है, जो उनके कार्यकाल के दौरान हुआ था।
नए समझौते में क्या है?
ताजा समझौते के तहत, हमास धीरे-धीरे अपने हथियार छोड़ देगा, जबकि इस्राइली सेना अपने हमले रोककर गाजा से पीछे हटना शुरू कर देगी। हमास ने इस डील को मंजूरी तो दी, लेकिन साथ ही उसने अपने सबसे भारी हथियारों को सौंपने की शर्त फिलिस्तीनी राज्य के गठन से जोड़ दी।
इसी बीच, गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस्राइली सेना ने गाजा पर अपने हमलों में ढील दी है, जिनमें युद्धविराम लागू होने के बाद से 1,250 से अधिक लोग मारे गए हैं।
इस्राइली मीडिया ने क्या बताया?
इस्राइली मीडिया ने बताया कि हमले करने का अधिकार सेना के चीफ ऑफ स्टाफ तक सीमित कर दिया गया है, जो जाहिर तौर पर ट्रंप के युद्धविराम प्रयासों के प्रति एक अप्रत्यक्ष संकेत है। इस्राइली सेना ने इस संबंध में टिप्पणी के अनुरोध का जवाब नहीं दिया।