इस्राइल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार गिर सकती है। दो दलों ने समर्थन वापस ले लिया है। अब सत्तारूढ़ गठबंधन के पास सिर्फ 50 सीटें बचीं हैं। खबरों के मुताबिक रूढ़िवादी धार्मिक छात्रों को मिलिट्री सर्विस से मिलने वाली छूट सीमित करने से सरकार के खिलाफ नाराजगी बढ़ रही है। जानिए क्या है पश्चिम एशिया की अशांति के बीच इस्राइल का सियासी समीकरण
ईरान, सीरिया और फलस्तीन जैसे इस्लामिक देशों के साथ युद्ध लड़ रहे इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार गिर सकती है। सत्तारूढ़ शास पार्टी (Shas Party) ने बुधवार को सरकार से समर्थन वापस लेने का एलान कर दिया। इससे एक दिन पहले यूनाइटेड टोरा जूडाइज्म (यूटीजे) पार्टी ने भी गठबंधन तोड़ दिया था। इसके बाद नेतन्याहू की सरकार अल्पमत में आ गई है।
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सरकार बनाने के लिए 61 सीटें चाहिए
120 सीटों वाली संसद (नेसेट-निचला सदन) में सरकार बनाने के लिए 61 सीटें चाहिए। दोनों पार्टियों के अलग होने से सत्तारूढ़ गठबंधन के पास 50 सीटें बची हैं। शास पार्टी ने गठबंधन छोड़ने के मुद्दे पर कहा-भारी मन से हमें यह स्वीकार करना पड़ रहा है कि हम सरकार का हिस्सा नहीं रह सकते। हालांकि, हम इस सरकार को अस्थिर करने की कोशिश नहीं करेंगे और कुछ कानूनों पर गठबंधन का समर्थन कर सकते हैं।
अनिवार्य मिलिट्री सर्विस से छूट ले रहे युवा
दरअसल, विवाद का मुख्य कारण रूढ़िवादी धार्मिक छात्रों को मिलिट्री सर्विस से मिलने वाली छूट है। ये छात्र लंबे समय से अनिवार्य मिलिट्री सर्विस से छूट ले रहे हैं। नेतन्याहू सरकार हाल में इस छूट को सीमित करने के लिए बिल लेकर आई थी, जिसके कारण शास पार्टी और यूटीजे ने सरकार से अलग होने का फैसला किया।
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राजनीतिक दलों का क्या कहना है?
दोनों पार्टियों ने कहा है कि धार्मिक छात्रों के सेना में भर्ती होने से उनकी धार्मिक जीवनशैली को खतरा होगा। वैसे, कई अन्य यहूदी इस्राइली इसे स्पेशल सुविधा मानते हैं और इस पर नाराजगी जताते हैं। गाजा युद्ध के दौरान यह मुद्दा और गंभीर हो गया है। युद्ध में सैकड़ों इस्राइली सैनिकों की मौत हो चुकी है। इस कारण अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स समुदाय पर आरोप लग रहे हैं कि वे दूसरों के लिए युद्ध में जान देने वालों के मुकाबले पीछे हट रहे हैं।
राजनीति में और अस्थिरता आएगी
जानकारों का कहना है कि यह गठबंधन विवाद तुरंत नेतन्याहू की सरकार नहीं गिराएगा। हालांकि, यह इस्राइल की राजनीति में और अस्थिरता लाएगा। खासकर जब गाजा में युद्ध विराम और लेबनान व सीरिया में चल रहे संघर्ष को लेकर नेता आपस में टकरा रहे हैं।