फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इस्राइल : विपक्षी दलों के बीच हुआ समझौता, नेतन्याहू के 12 साल के शासन का अंत निकट

Thu, 03 Jun 2021 04:16 AM IST
देव कश्यप न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस, तेल अवीव।

सार

  • बेंजामिन नेतन्याहू को प्रधानमंत्री की कुर्सी से उतारने के लिए लैपिड-बेनेट ने किया समझौता
  • नए प्रधानमंत्री बनेंगे नफ्ताली बेनेट, विपक्षी गठबंधन में हुआ अहम समझौता
     
विज्ञापन
इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इस्राइल में लंबे समय से सत्ता पर काबिज पीएम बेंजामिन नेतन्याहू की विदाई तय हो चुकी है। नई सरकार बनाने के लिए आठ सियासी पार्टियों के गठबंधन के साथ एक समझौते पर पहुंचने के बाद विपक्षी नेता ने बृहस्पतिवार को एलान किया कि वे नेतन्याहू को अपदस्थ करने के करीब पहुंच चुके हैं। अब 120 सदस्यों वाली इस्राइली संसद में नेफ्ताली बेनेट को अगला पीएम तय माना जा रहा है।

विज्ञापन


विपक्षी दलों के नाजुक गठबंधन के पास बहुत ही कम मतों से संसद में बहुमत होगा। इस गठबंधन के 10-12 दिनों में शपथ लेने की संभावना है। इस तरह विपक्षी सांसदों ने नेतन्याहू को कुछ दिन और पीएम बने रहने की मोहलत दी है। बुधवार मध्यरात्रि (भारतीय समयानुसार ढाई बजे) से करीब 35 मिनट पूर्व मध्यमार्गी नेता यैर लैपिड ने राष्ट्रपति रिवेन रिवलिन को किए एक ईमेल में कहा, मैं यह बताते हुए सम्मानित महसूस कर रहा हूं कि हम सरकार बनाने में सफल रहे हैं। गठबंधन समझौते के तहत यामिना पार्टी के 49 वर्षीय राष्ट्रवादी नेता नफ्ताली बेनेट प्रधानमंत्री बनेंगे। नियमित आवर्तन (रोटेशन) की नीति के तहत उनके बाद यैर लैपिड देश के पीएम होंगे। लैपिड फिलहाल विदेश मंत्री का पद संभालेंगे। सरकार के औपचारिक रूप से शपथ लेने से पहले संसद में मतदान होगा जिसमें नई सरकार विश्वास मत हासिल करेगी।

राष्ट्रपति ने कहा, जल्द बुलाएं संसद सत्र
इस्राइली राष्ट्रपति ने यैर लैपिड का ईमेल मिलने के बाद उन्हें शुक्रिया अदा करते हुए कहा, मैं आपको और पार्टी प्रमुखों को सरकार गठन पर बनी सहमति के लिए बधाई देता हूं। हम उम्मीद करते हैं कि सरकार की पुष्टि के लिए जल्द से जल्द इस्राइली संसद ‘नेसेट’ का सत्र बुलाया जाए। गठबंधन में येश अतीद, कहोल लावन, लेबर, यामिना, न्यू होप, मेरेट्ज़ और यूनाइटेड अरब लिस्ट जैसे राजनीतिक दल शामिल हैं।
विज्ञापन


बहुमत हासिल नहीं कर पाए नेतन्याहू
इस साल मार्च में हुए चुनाव में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को बहुमत नहीं पा सकी थी। दो साल में चार बार हो चुके चुनाव में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद राष्ट्रपति ने नेतन्याहू को सरकार चलाने तथा 2 जून तक बहुमत साबित करने को कहा था। लेकिन इससे पहले ही विपक्षी गठबंधन ने नेतन्याहू के 12 साल तक लगातार सत्ता में रहने के रिकॉर्ड को यहीं पर विराम देने की रणनीति बनाई। 

विपक्षी गठबंधन में इस्लामी राम पार्टी भी शामिल
बड़ी बात यह है कि नेतन्याहू की सरकार के खिलाफ बने इस गठबंधन में इस्राइल में अरब समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाली इस्लामी राम पार्टी भी शामिल है। विपक्षी गठबंधन में शामिल राम पार्टी इस्राइली अरब मुसलमानों का प्रतिनिधित्व करती है। उसका मानना है कि फलस्तीनियों को उनका हक मिलना चाहिए और इस्राइल को नई कॉलोनियां बनाने के प्रयास को रोककर येरूशलेम पर से दावा छोड़ना चाहिए।

गठबंधन दलों में जबरदस्त अंतर्विरोध
विपक्षी दलों ने मिलकर कुछ कॉमन नीति कार्यक्रम के तहत नेतन्याहू के खिलाफ नई सरकार के गठन के लिए गठबंधन तो बना लिया है लेकिन इसमें कई राष्ट्रीय मुद्दों पर अंतर्विरोध है। मसलन इस्लामी राम पार्टी फलस्तीन को उनका हक दिलाना चाहती है जबकि गठबंधन के प्रमुख नेता बेनेट नेफ्ताली इसके सख्त विरोधी हैं। मध्यमार्गी यैर लैपिड भी वेस्ट बैंक में बसाई जा रही कॉलोनियों के विरुद्ध नहीं हैं। इस्राइली इतिहास में अब तक किसी भी एक पार्टी को बहुमत नहीं मिला है। इसलिए, 12 साल से देश की सत्ता पर काबिज बेंजामिन नेतन्याहू को हटाने के लिए पूरा विपक्ष एकजुट हो गया है।

ईरान, फलस्तीन पर नेतन्याहू से भी सख्त हैं बेनेट
इस्राइल में विपक्षी गठबंधन की तरफ से पहली पारी में पीएम बनने वाले नफ्ताली बेनेट इस्राइली रक्षा बलों की एलीट यूनिट सायरेत मटकल और मगलन के कमांडो रह चुके हैं। 2006 में वे बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व में राजनीति में आए। जिसके बाद वे नेतन्याहू के चीफ ऑफ स्टाफ बनाए गए। बाद में वे न्यू राइट और यामिना पार्टी से भी नेसेट के सदस्य बने। 2012 से 2020 के बीच 5 बार सांसद रह चुके हैं। वह बाद में नेतन्याहू के विरोधी हो गए। 2019 से 2020 के बीच रक्षामंत्री रह चुके नफ्ताली ईरान और फलस्तीन के मुद्दे पर नेतन्याहू से भी ज्यादा कट्टर और सख्त हैं।
 

विज्ञापन

सियासी उथल-पुथल से राहत

देश के शीर्ष कार्यालय में 12 वर्ष के लंबे कार्यकाल के दौरान बेंजामिन नेतन्याहू देश और विदेश में अक्सर ध्रुवीकरण करने वाली शख्सियत के रूप में पहचाने जाते रहे हैं। उनके कार्यकाल के खत्म होने से घरेलू राजनीति में उथल-पुथल से राहत मिल सकती है। हालांकि इस्राइल की विदेश नीति में बड़े बदलाव की संभावना अमेरिका के कट्टर सहयोगी होने के कारण कम ही रहेगी। 

अनुभवी राजनेता इसाक हर्जोग बने इस्राइल के 11वें राष्ट्रपति
इस्राइली संसद ‘नेसेट’ में हुए गुप्त मतदान में अनुभवी नेता इसाक हर्जोग को देश के 11वें राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित किया गया है। लेबर पार्टी के पूर्व नेता हर्जोग (60) देश के ऐसे पहले राष्ट्रपति होंगे जो पूर्व राष्ट्रपति के बेटे हैं। उनके पिता सियाम हर्जोग वर्ष 1983 से 1993 तक इस्राइल के राष्ट्राध्यक्ष रहे हैं।

हर्जोग को 120 सदस्यीय संसद में 87 मत मिले और उन्होंने आसानी से अपनी प्रतिद्वंद्वी मिरियम परेत्ज को हरा दिया। वह आधिकारिक रूप से राष्ट्रपति रिवेन रिवलिन की जगह लेंगे जो सात साल के कार्यकाल के बाद नौ जुलाई को कार्यभार छोड़ेंगे। हर्जोग ने सांसदों को धन्यवाद देते हुए कहा, मैं सभी देशवासियों का राष्ट्रपति रहूंगा।

पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने देश के नागरिकों की तरफ से उन्हें शुभकामनाएं दीं। बता दें, हर्जोग 2015 में प्रधानमंत्री पद के लिए नेतन्याहू के प्रतिद्वंद्वी थे। हर्जोग मौजूदा समय में यहूदी एजेंसी के प्रमुख की भूमिका निभा रहे हैं। यह एजेंसी गैर लाभकारी संस्था है जो सरकार के साथ इस्राइल में आव्रजन को बढ़ाने के लिए काम करती है। वे 2003 से 2018 तक नेसेट के सदस्य रहे और कई मंत्रालयों का कार्यभार बतौर मंत्री संभाला।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें