इस्राइल में लंबे समय से सत्ता पर काबिज पीएम बेंजामिन नेतन्याहू की विदाई तय हो चुकी है। नई सरकार बनाने के लिए आठ सियासी पार्टियों के गठबंधन के साथ एक समझौते पर पहुंचने के बाद विपक्षी नेता ने बृहस्पतिवार को एलान किया कि वे नेतन्याहू को अपदस्थ करने के करीब पहुंच चुके हैं। अब 120 सदस्यों वाली इस्राइली संसद में नेफ्ताली बेनेट को अगला पीएम तय माना जा रहा है।
विपक्षी दलों के नाजुक गठबंधन के पास बहुत ही कम मतों से संसद में बहुमत होगा। इस गठबंधन के 10-12 दिनों में शपथ लेने की संभावना है। इस तरह विपक्षी सांसदों ने नेतन्याहू को कुछ दिन और पीएम बने रहने की मोहलत दी है। बुधवार मध्यरात्रि (भारतीय समयानुसार ढाई बजे) से करीब 35 मिनट पूर्व मध्यमार्गी नेता यैर लैपिड ने राष्ट्रपति रिवेन रिवलिन को किए एक ईमेल में कहा, मैं यह बताते हुए सम्मानित महसूस कर रहा हूं कि हम सरकार बनाने में सफल रहे हैं। गठबंधन समझौते के तहत यामिना पार्टी के 49 वर्षीय राष्ट्रवादी नेता नफ्ताली बेनेट प्रधानमंत्री बनेंगे। नियमित आवर्तन (रोटेशन) की नीति के तहत उनके बाद यैर लैपिड देश के पीएम होंगे। लैपिड फिलहाल विदेश मंत्री का पद संभालेंगे। सरकार के औपचारिक रूप से शपथ लेने से पहले संसद में मतदान होगा जिसमें नई सरकार विश्वास मत हासिल करेगी।
राष्ट्रपति ने कहा, जल्द बुलाएं संसद सत्र
इस्राइली राष्ट्रपति ने यैर लैपिड का ईमेल मिलने के बाद उन्हें शुक्रिया अदा करते हुए कहा, मैं आपको और पार्टी प्रमुखों को सरकार गठन पर बनी सहमति के लिए बधाई देता हूं। हम उम्मीद करते हैं कि सरकार की पुष्टि के लिए जल्द से जल्द इस्राइली संसद ‘नेसेट’ का सत्र बुलाया जाए। गठबंधन में येश अतीद, कहोल लावन, लेबर, यामिना, न्यू होप, मेरेट्ज़ और यूनाइटेड अरब लिस्ट जैसे राजनीतिक दल शामिल हैं।
बहुमत हासिल नहीं कर पाए नेतन्याहू
इस साल मार्च में हुए चुनाव में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को बहुमत नहीं पा सकी थी। दो साल में चार बार हो चुके चुनाव में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद राष्ट्रपति ने नेतन्याहू को सरकार चलाने तथा 2 जून तक बहुमत साबित करने को कहा था। लेकिन इससे पहले ही विपक्षी गठबंधन ने नेतन्याहू के 12 साल तक लगातार सत्ता में रहने के रिकॉर्ड को यहीं पर विराम देने की रणनीति बनाई।
विपक्षी गठबंधन में इस्लामी राम पार्टी भी शामिल
बड़ी बात यह है कि नेतन्याहू की सरकार के खिलाफ बने इस गठबंधन में इस्राइल में अरब समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाली इस्लामी राम पार्टी भी शामिल है। विपक्षी गठबंधन में शामिल राम पार्टी इस्राइली अरब मुसलमानों का प्रतिनिधित्व करती है। उसका मानना है कि फलस्तीनियों को उनका हक मिलना चाहिए और इस्राइल को नई कॉलोनियां बनाने के प्रयास को रोककर येरूशलेम पर से दावा छोड़ना चाहिए।
गठबंधन दलों में जबरदस्त अंतर्विरोध
विपक्षी दलों ने मिलकर कुछ कॉमन नीति कार्यक्रम के तहत नेतन्याहू के खिलाफ नई सरकार के गठन के लिए गठबंधन तो बना लिया है लेकिन इसमें कई राष्ट्रीय मुद्दों पर अंतर्विरोध है। मसलन इस्लामी राम पार्टी फलस्तीन को उनका हक दिलाना चाहती है जबकि गठबंधन के प्रमुख नेता बेनेट नेफ्ताली इसके सख्त विरोधी हैं। मध्यमार्गी यैर लैपिड भी वेस्ट बैंक में बसाई जा रही कॉलोनियों के विरुद्ध नहीं हैं। इस्राइली इतिहास में अब तक किसी भी एक पार्टी को बहुमत नहीं मिला है। इसलिए, 12 साल से देश की सत्ता पर काबिज बेंजामिन नेतन्याहू को हटाने के लिए पूरा विपक्ष एकजुट हो गया है।
ईरान, फलस्तीन पर नेतन्याहू से भी सख्त हैं बेनेट
इस्राइल में विपक्षी गठबंधन की तरफ से पहली पारी में पीएम बनने वाले नफ्ताली बेनेट इस्राइली रक्षा बलों की एलीट यूनिट सायरेत मटकल और मगलन के कमांडो रह चुके हैं। 2006 में वे बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व में राजनीति में आए। जिसके बाद वे नेतन्याहू के चीफ ऑफ स्टाफ बनाए गए। बाद में वे न्यू राइट और यामिना पार्टी से भी नेसेट के सदस्य बने। 2012 से 2020 के बीच 5 बार सांसद रह चुके हैं। वह बाद में नेतन्याहू के विरोधी हो गए। 2019 से 2020 के बीच रक्षामंत्री रह चुके नफ्ताली ईरान और फलस्तीन के मुद्दे पर नेतन्याहू से भी ज्यादा कट्टर और सख्त हैं।