रियाद में अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमले के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान में जमीनी सैनिक भेजने के संकेत दिए हैं। उन्होंने 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' को सफल बताया और कहा कि ईरान की सैन्य क्षमता खत्म होने तक हमले जारी रहेंगे। इस युद्ध में अब तक 500 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर हालात की जरूरत हुई, तो वे ईरान में अमेरिकी जमीनी सैनिक भेजने से पीछे नहीं हटेंगे। ट्रंप ने यह बात तब कही जब सऊदी अरब की राजधानी रियाद में अमेरिकी दूतावास पर ईरान ने ड्रोन ने हमला किया। इस हमले के बाद ट्रंप ने तेहरान को जल्द ही कड़ी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
विज्ञापन
क्या बोले राष्ट्रपति ट्रंप?
'न्यूयॉर्क पोस्ट' को दिए एक फोन इंटरव्यू में ट्रंप ने साफ कहा कि उन्हें जमीन पर सैनिक भेजने में कोई दिक्कत नहीं है। उन्होंने कहा कि अक्सर राष्ट्रपति कहते हैं कि वे जमीन पर सैनिक नहीं भेजेंगे, लेकिन वे ऐसा नहीं कहते। ट्रंप के मुताबिक, अगर जरूरी हुआ तो वे सैनिकों की तैनाती जरूर करेंगे। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और इस्राइल की सेनाएं मिलकर ईरान की सैन्य और राजनीतिक लीडरशिप को निशाना बना रही हैं। इस साझा हमले को 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' नाम दिया गया है।
ट्रंप ने ऑपरेशन की तारीफ की
यह सैन्य अभियान शनिवार को शुरू हुआ था और ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद इसमें और तेजी आ गई है। ट्रंप ने इस ऑपरेशन की तारीफ करते हुए कहा कि यह उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि सैन्य लीडरशिप को खत्म करने के लिए चार हफ्ते का समय तय किया गया था, लेकिन सेना ने इसे बहुत पहले ही कर दिखाया। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि पेंटागन इस सैन्य कार्रवाई को लंबे समय तक जारी रख सकता है और वे इस काम से बोर नहीं होने वाले हैं।
रक्षा मंत्री ने क्या कहा?
वहीं अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने बताया कि फिलहाल ईरान के अंदर कोई अमेरिकी सैनिक काम नहीं कर रहा है। हालांकि, उन्होंने भी भविष्य में सैनिकों की तैनाती से इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि दुश्मन को यह समझना होगा कि अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए वे किसी भी हद तक जा सकते हैं। दूसरी तरफ, वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका किसी लंबे युद्ध में नहीं फंसना चाहता।
अब तक के युद्ध में हुआ है भारी नुकसान
इस लड़ाई में अब तक भारी नुकसान हो चुका है। ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी के अनुसार, हमलों में अब तक ईरान के 555 लोग मारे गए हैं और 130 से ज्यादा शहरों पर हमले हुए हैं। इस्राइल में 11 और लेबनान में 31 लोगों की मौत की खबर है। ईरान और उसके सहयोगी गुटों ने भी इस्राइल और खाड़ी देशों के तेल और गैस ठिकानों को निशाना बनाया है। इससे पूरे क्षेत्र में एक बड़े और अस्थिर युद्ध का खतरा बढ़ गया है।