इस्राइल पर हमास के हमले के बाद जारी युद्ध में दोनों तरफ से अब तक करीब 1500 लोगों की जानें जा चुकी हैं। वहीं, हमास के हमले की तीव्रता को देखकर यह स्पष्ट हो गया है कि हमास ने बहुत ही सुनियोजित और गुप्त तरीके से इसकी योजना तैयार की। अब जो जानकारियां निकलकर सामने आ रही हैं उससे पता चल रहा है कि हमास ने किस तरह से इस्राइल को धोखे में रखते हुए हमले की तैयारी की। इसके लिए हमास ने अपने नियंत्रण वाले गाजा पट्टी के क्षेत्र में एक नकली इस्राइली बस्ती बसाई। वहां उसने अपने लड़ाकों को सैन्य लैंडिंग और हमला करने की ट्रेनिंग दी और युद्धाभ्यास का वीडियो भी बनाया।
हमास के करीबी सूत्रों ने बताया कि फलस्तीनी आतंकी समूह अपने लड़ाकों को प्रशिक्षित करने के साथ ही गाजा पट्टी की अर्थव्यवस्था को सुधारने पर ध्यान केंद्रित करने का दिखावा करता रहा था। इससे इस्राइल की खुफिया एजेंसियां धोखा खा गईं। यही नहीं, हमास अपने लड़ाकों को सादे कपड़ों में ट्रेनिंग देता रहा और इस्राइली एजेंसियां और सेना उसे आसन और योगाभ्यास समझकर अनदेखी करती रहीं।
हमास ने इस्राइली एजेंसियों के साथ दो साल तक किया छल
शनिवार का हमला, 1973 में अरब सेनाओं की ओर से किए हमले के बाद से इस्राइल पर सबसे बड़ा हमला है। इस हमले को अंजाम देने के लिए हमास ने इस्राइली एजेंसियों के साथ दो साल तक छल किया। उसने अपनी योजनाओं को गुप्त तो रखा ही, वह यह भी दिखाता रहा कि वह लड़ाई नहीं चाहता है। इसके लिए उसे अपने कट्टर विरोधियों की आलोचना तक झेलनी पड़ी। उस पर आरोप लगा कि हमास के बड़े नेता गाजा के लोगों को गरीबी में छोड़कर अरब देशों के होटलों में रह रहे हैं और आराम की जिंदगी जी रहे हैं।
हमास के इस छल से इस्राइल धोखा खा गया। उसने गाजा पट्टी में रहने वाले श्रमिकों को अपने यहां काम करने की अनुमति दे दी, जहां गाजा की तुलना में कई गुना ज्यादा मजदूरी मिलती थी। वह गाजा के श्रमिकों को आर्थिक प्रोत्साहन देता रहा और समझता रहा कि युद्ध से थके हुए हमास को इस तरह वह नियंत्रित कर लेगा। लेकिन इस सब की आड़ में हमास अपने लड़ाकों को प्रशिक्षित और हमले के लिए तैयार करता रहा।
असाधाराण खुफिया रणनीति का इस्तेमाल
सूत्रों ने बताया कि हमास ने इस्राइल को गुमराह करने के लिए पिछले कुछ महीनों में एक असाधाराण खुफिया रणनीति का इस्तेमाल किया। इससे लोगों को यह आभास हुआ कि हमास इस्राइल के साथ लड़ाई और टकराव के लिए तैयार नहीं, जबकि इस दौरान वह बड़े हमले की तैयारी करता रहा। इस्राइल ने भी माना है कि यहूदी त्योहार की छुट्टियों के चलते वह सीमा की सुरक्षा को लेकर लापरवाह हो गया था।