सवाल-1: इस्राइल में चुनाव किसके लिए हो रहे हैं?
- इस्राइल में संसदीय चुनाव हैं। यानी लोग अपने मताधिकार का इस्तेमाल नेसेट (इस्राइली संसद) में अपने पसंदीदा दलों को सीट दिलाने के लिए करेंगे।
- 120 सदस्यीय संसद में बहुमत के लिए 61 सीटों की जरूरत होती है। जिस भी पार्टी का बहुमत होगा, वह सरकार बनाएगी और प्रधानमंत्री भी तय करेगी।
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सवाल-2: इस्राइल में चुनाव क्यों हो रहे हैं?
इस्राइल में हर चार साल में चुनाव कराना भी अनिवार्य है। चूंकि इस्राइल की पिछली सरकार ने 1 नवंबर 2022 को शासन संभाला था, इसलिए आम चुनाव अक्तूबर 2026 में ही कराए जाने हैं।
एक दिलचस्प आंकड़ा यह है कि इस्राइल में बीते 38 साल में यह पहली बार है, जब संसद ने अपना कार्यकाल पूरा किया है। हालांकि, इन चार साल में इस्राइल ने तीन युद्ध और एक सैन्य अभियान भी चलाया। जहां इस्राइल ने 2022 के बाद से गाजा के फलस्तीन में हमास से जंग लड़ी तो वहीं लेबनान में हिज्बुल्ला को निशाना बनाया। इसके अलावा इस्राइल ने दो बार ईरान पर भी हमला बोला है। इतना ही नहीं, सीरिया में भी इस्राइल का लंबा सैन्य अभियान चला है।
सवाल-3: कैसे होती है इस्राइल में वोटिंग?
- गौर करने वाली बात यह है कि इस्राइल में मतदाता किसी उम्मीदवार के लिए नहीं, बल्कि चुनाव लड़ रहे राजनीतिक दल के लिए वोट करते हैं।
- ऐसे में जब 120 सीटों के लिए वोटिंग होती है तो जिस पार्टी को जितने प्रतिशत वोट मिलता है, उसे संसद में उतनी ही सीटों की अधिकारी होती है।
- उदाहरण के लिए- अगर किसी पार्टी को 30 फीसदी वोट मिलते हैं तो उसे संसद की 30% सीटें मिल जाती हैं। 3.25% से कम वोट लाने वाले दल को सीट नहीं मिलती।
- यही वजह है कि इस्राइल के इतिहास में आज तक किसी दल ने पूर्ण बहुमत की सरकार नहीं बनाई है, क्योंकि किसी दल को 50 फीसदी से अधिक वोट मिले ही नहीं।
इस्राइल के वोटिंग सिस्टम की इसी पेचीदगी की वजह से यहां गठबंधन की सरकारें प्रचलित हैं। वहीं छोटे दल, जिन्हें 3.25 फीसदी से कम वोट मिलने की संभावना होती है, वह चुनाव से पहले बड़े दलों के साथ विलय कर लेते हैं।
इस्राइल में वोटिंग प्रक्रिया।
- फोटो : अमर उजाला
सवाल-6: इस बार प्रधानमंत्री पद के लिए किसके बीच मुकाबला?
सत्तासीन लिकुड पार्टी के मुखिया बेंजामिन नेतन्याहू एक बार फिर प्रधानमंत्री पद के लिए दावेदारी पेश कर रहे हैं। उन्हें चुनौती दे रहे हैं याशर पार्टी के गादी आइजेनकॉट। लेकिन इस्राइल की चुनावी प्रणाली दो पार्टी की जगह बहुदलीय प्रणाली है, इसलिए अलग-अलग पार्टियों को गठबंधन कर सरकार बनानी होती है। हालांकि, दो सबसे बड़ी पार्टियां अपने लिए छोटी पार्टियों या कम वोट पाने वाली पार्टियों को साथ लाने की मेहनत कर सकती हैं और बहुमत के आंकड़े तक पहुंच सकती हैं।
ऐसी गठबंधन की स्थिति में अक्सर उसी पार्टी का नेता गठबंधन का मुखिया और प्रधानमंत्री बनता है, जो कि सबसे बड़ी होती है। यही वजह है कि बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी लिकुड पार्टी लगातार सत्तासीन गठबंधन की तरफ से प्रधानमंत्री बनने में सफल रहे हैं।
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इस्राइल चुनाव में इस बार पीएम पद के लिए दो चेहरों के बीच मुकाबला।
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