इस्राइल में एक साल के भीतर सोमवार को तीसरी बार हुए चुनाव में भी कोई पार्टी बहुमत हासिल नहीं कर पाई है। हालांकि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन ने 58 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी होने का ताज हासिल किया है लेकिन यह बहुमत के 61 का आंकड़ा नहीं छू पाया। अब नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने दोबारा मतगणना की मांग की है।
बता दें कि नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने कुल 36 सीटें जीती हैं जबकि उनके साथ शास पार्टी ने 9, यूनाइटेड तोराह जुडैस्म ने 7 और यामिना ने 6 सीटें जीती हैं। इस तरह यह गठबंधन सरकार बनाने से तीन सीट दूर रह गया है। जबकि प्रतिद्वंद्वी बेनी गैंट्ज की ब्लू एंड व्हाइट पार्टी ने 33 सीटें जीती हैं। उनके गठबंधन में शामिल लेबर-गेशर-मीरेत्ज ने 7 और यिस्राइल बेतेनु ने 7 सीटें जीती हैं।
इस तरह लिकुड पार्टी ने ब्लू एंड व्हाइट को 12,19,275 के मुकाबले 13,50,863 मतों से पराजित किया। इन चुनावों में नेतन्याहू निर्णायक जीत की अपेक्षा कर रहे थे। साथ ही शुरुआती एग्जिट पोल में उनकी लिकुड पार्टी व छोटी धार्मिक और राष्ट्रवादी पार्टियों का गठबंधन 60 सीटें हासिल करता दिख रहा था। लेकिन अंतिम नतीजों में वे बहुमत से दूर हो गए हैं। इसलिए उनकी पार्टी पुनर्मतगणना कराते हुए किसी तरह यह अंतर कम कराना चाहती है।
कमजोर होंगे नेतन्याहू, मुकदमे में घिर सकते हैं
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सामने सबसे बड़ी मुसीबत उन पर भ्रष्टाचार को लेकर चलने वाला मुकदमा है। जबकि मौजूदा चुनाव में बहुमत से तीन सीटें पीछे रहने के कारण उनकी स्थिति का कमजोर होगी। बहुमत से दूरी के कारण इस्राइल में पिछले एक साल से जारी राजनीतिक गतिरोध और लंबा खिंचेगा और जोड़तोड़ की स्थिति में भी उन्हें मुकदमे से बचने का सीधा तरीका नहीं मिल पाएगा।
तीन सीटों का समर्थन मुश्किल
नेतन्याहू का गठबंधन इस जुगत में लग गया है कि विपक्षी बेनी गैंट्ज के गठबंधन में से किस पार्टी को अपने पक्ष में करें। हालांकि यिस्राइल बेतेनु पार्टी ने सात सीटें जीती हैं और उनके दो सांसद नेतन्याहू गठबंधन के संपर्क में रहे हैं। लेकिन उनका सीधा समर्थन मिलना मुश्किल है। और यदि यह समर्थन मिल भी जाए तो एक सीट को लेकर पेंच फंस सकता है।