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इस्राइल में टले चुनाव: नेतन्याहू सरकार ने पास किया रिकॉर्ड बजट, क्या रक्षा क्षेत्र में सबसे बड़ा आवंटन? जानिए

Mon, 30 Mar 2026 03:31 PM IST
Himanshu Singh Chandel वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, तेल अवीव

सार

इस्राइल की संसद ने बजट पास कर दिया है, जिससे प्रधानमंत्री नेतन्याहू सरकार को राहत मिली और समय से पहले चुनाव टल गए। बजट 62-55 वोट से पास हुआ। विपक्ष ने इसे गलत प्राथमिकताओं वाला बताया और अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स समुदाय को ज्यादा फंड देने का आरोप लगाया। रक्षा बजट बढ़ाया गया है।
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बेंजामिन नेतन्याहू, इस्राइली प्रधानमंत्री - फोटो : एक्स@netanyahu
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विस्तार
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इस्राइल की संसद ने सालाना बजट पास कर दिया है। इससे प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार को बड़ी राहत मिली है। दरअसल, बजट पास होने के साथ ही समय से पहले चुनाव का खतरा टल गया है। अब सरकार अपने कार्यकाल को जारी रख सकती है। हालांकि इस फैसले के बाद विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। इसे गलत प्राथमिकताओं वाला बजट बताया है।
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इस्राइल में एक अप्रैल तक बजट पास करना जरूरी था, नहीं तो देश में समय से पहले चुनाव हो सकते थे। संसद ने देर रात चली लंबी बैठक के बाद 62 के मुकाबले 55 वोट से बजट पास कर दिया। यह इस्राइल का अब तक का सबसे बड़ा बजट है। इसके साथ ही नेतन्याहू सरकार के लिए सत्ता में बने रहने का रास्ता साफ हो गया है।

बजट पास होने से चुनाव क्यों टल गए?
बजट पास होने के बाद अब सरकार अपने कार्यकाल को पूरा करने की स्थिति में है। इस्राइल में चुनाव अक्तूबर तक होने हैं, लेकिन अगर बजट पास नहीं होता तो पहले ही चुनाव कराने पड़ते। हालांकि प्रधानमंत्री के पास अभी भी अधिकार है कि वे चाहें तो समय से पहले चुनाव करा सकते हैं।
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विपक्ष ने बजट को लेकर क्या आरोप लगाए?
विपक्ष ने इस बजट को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। विपक्षी नेता यायर लापिड ने इसे देश के इतिहास की सबसे बड़ी लूट वाला वजट बताया। वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह जनता के साथ अन्याय है। खासतौर पर अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स समुदाय के लिए बढ़ाए गए फंड को लेकर विरोध तेज है।

बजट में किस पर ज्यादा खर्च किया गया?
इस बार के बजट में रक्षा मंत्रालय के लिए करीब 20 प्रतिशत ज्यादा राशि रखी गई है। ईरान के साथ चल रहे युद्ध के कारण रक्षा बजट बढ़ाकर लगभग 45 अरब डॉलर कर दिया गया है। इसके चलते सरकार को अन्य मंत्रालयों के खर्च में कटौती करनी पड़ी है।

क्या सुरक्षा हालात का असर संसद पर भी दिखा?
बजट पर चर्चा के दौरान कई बार ईरान से मिसाइल हमले की चेतावनी सायरन बजे। सुरक्षा कारणों से संसद की बैठक मुख्य सदन की बजाय ऐसे हॉल में हुई, जो बम शेल्टर के करीब है। यह स्थिति दिखाती है कि देश में युद्ध जैसे हालात का सीधा असर शासन पर भी पड़ रहा है।

क्या जनता और राजनीति पर इसका असर पड़ेगा?
हाल के सर्वे बताते हैं कि जनता युद्ध का समर्थन कर रही है, लेकिन नेतन्याहू और उनकी सरकार को इसका पूरा फायदा नहीं मिल रहा है। चुनाव को आगे टालने से सरकार को समय जरूर मिला है, लेकिन अक्टूबर में होने वाले चुनाव में यह बड़ा मुद्दा बन सकता है।
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इस्राइल पर ईरान की ओर से लगातार मिसाइल हमले हो रहे हैं और लेबनान में भी संघर्ष तेज हो रहा है। सरकार ने नागरिकों के लिए युद्धकालीन दिशा-निर्देश भी बढ़ा दिए हैं। ऐसे में आने वाले समय में हालात और तनावपूर्ण हो सकते हैं, जिसका असर राजनीति और चुनाव दोनों पर पड़ेगा।


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