दक्षिणी इस्रायल के नेगेव रेगिस्तान में बीयर शेवा शहर में तीन साल के अध्ययन के बाद एक ऐसा चौंकाने वाला खुलासा हुआ है जिससे दुनिया का इतिहास फिर से लिखना पड़ सकता है। 2017 के बाद से, शहर के नेव नोय क्षेत्र में तीन सालों चल चले पुरातात्विक उत्खनन में एक ऐसी चीज मिली है जो एक भट्ठी जैसी प्रतीत होती है और इसमें तांबे के अयस्क को गलाया जाता होगा। तेल अवीव विश्वविद्यालय और इस्रायल एंटिक्विटी अथॉरिटी के शोधकर्ताओं के अनुसार, इस स्थान पर दुनिया की पहली भट्ठी का इस्तेमाल किया गया होगा।
इस्रायल एंटीक्विटीज अथॉरिटी की ओर से खुदाई के निदेशक तलिया अबुलफिया ने कहा, "इस खुदाई से लगभग 6,500 साल पहले चालकोलिथिक काल (ताम्रपाषाणिक या कॉपर एज) से घरेलू उत्पादन के सबूत मिले हैं।
उन्होंने कहा, "खुदाई में मिली आश्चर्य चीजों में तांबे को गलाने की एक छोटी कार्यशाला शामिल है और भट्ठी के टुकड़े भी मिले हैं। इसके अलावा टिन से बना एक छोटा अधिष्ठापन जिसमें तांबे के अयस्क को पिघलाया गया था। साथ ही बहुत अधिक तांबा लावा (कॉपर स्लैग) भी मिला है।"
चाल्कोलिथिक या ताम्रपाषाणिक या कॉपर युग को दक्षिण-पूर्व यूरोप के कुछ हिस्सों में चौथी और तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व के बीच की अवधि माना जाता है।
हालांकि यह पुरातात्विक काल तांबे के उपकरणों के निर्माण के संकेत देता है, फिर भी इसे नवपाषाण या पाषाण युग (नियोलिथिक या स्टोन एज) का हिस्सा माना जाता है।
इस काल के दौरान बनाए गए अधिकांश उपकरण पत्थर के बने होते थे और जैसा इसके नाम से खुद पता चलता है। चालकोलिथिक शब्द तांबे और पत्थर के लिए इस्तेमाल होता है और यह ग्रीक शब्दों से आता है।
नीव नोय क्षेत्र में पाए गए अयस्क के आईसोटॉप्स के विश्लेषण से पता चलता है कि इस अयस्क को वाडी फेनन, जो आज का आधुनिक जॉर्डन है, से लाया गया था, जो कि इस क्षेत्र से 60 मील (100 किलोमीटर) से अधिक दूर है।
आश्चर्य की बात यह है कि, इस काल में, तांबे के अयस्क को उस स्थान से दूर ले जाकर संसाधित किया गया था जहां से इसका खनन किया गया था।
आमतौर पर, दक्षता को बढ़ाने के लिए भट्टियों का निर्माण खानों में किया गया होगा। लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं है।
लेकिन शोधकर्ताओं का मानना है कि अयस्क को कार्यशाला से इतनी दूर ले जाकर तैयार करना दरअसल अपनी प्रौद्योगिकी को छिपाना हो सकता है।
तेल अवीव विश्वविद्यालय में प्रोफेसर बेन-योसेफ ने कहा, "यह समझना महत्वपूर्ण है कि तांबे का शोधन उस काल में एक उच्च तकनीक थी।
उन्होंने कहा, "संपूर्ण प्राचीन विश्व में इससे अधिक उन्नत कोई तकनीक नहीं थी। अयस्क को आग में डालना, इससे पहले इसका जिक्र आपको कहीं नहीं मिलेगा। आपको विशेष भट्टियों तो बनाने के लिए कुछ ज्ञान की आवश्यकता होती है जो ऑक्सीजन के निम्न स्तर को बनाए रखते हुए बहुत अधिक तापमान तक पहुँच सकते हैं।"
इस बात की भी संभावना है कि एक विशिष्ट समूह के बहुत कम लोग धातु को पिघलाने के तरीके के रहस्यों को जानते थे। उन्होंने कहा कि इस इलाके ने दुनिया में मेटल क्रांति लाने में बड़ी भूमिका निभाई होगी।