संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) को भेजी रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने आईएस-के समूह की बढ़ती पहुंच और वैश्विक आतंकी हमलों को प्रेरित करने की इसकी क्षमता पर चिंता जताई है। रिपोर्ट में हाल की कई आतंकी साजिशों को आईएस-के दुष्प्रचार से कट्टरपंथी बने लोगों या गाजा-इस्राइल संघर्ष से प्रभावित लोगों के साथ जोड़ा गया है।
संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि आईएसआईएस-खुरासान (आईएस-के) अमेरिका, यूरोप और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सबसे गंभीर खतरा बनकर उभर रहा है। इसका एक बड़ा कारण अफगानिस्तान के एक बार फिर विदेशी आतंकवादियों का ठिकाना बनने का बढ़ता जोखिम है। सुरक्षा परिषद को सौंपी गई ताजा रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने कहा कि आईएस-के चरमपंथियों की भर्ती और उन्हें कट्टरपंथी बनाने के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का सक्रिय रूप से इस्तेमाल कर रहा है।
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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) को भेजी रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने आईएस-के समूह की बढ़ती पहुंच और वैश्विक आतंकी हमलों को प्रेरित करने की इसकी क्षमता पर चिंता जताई है। रिपोर्ट में हाल की कई आतंकी साजिशों को आईएस-के दुष्प्रचार से कट्टरपंथी बने लोगों या गाजा-इस्राइल संघर्ष से प्रभावित लोगों के साथ जोड़ा गया है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अफगानिस्तान और मध्य एशिया में लौटने वाले विदेशी लड़ाकों की मौजूदगी क्षेत्र को और अस्थिर कर सकती है। इससे आईएस-खुरासान गुट का प्रभाव और अधिक बढ़ सकता है। इसका खामियाजा दक्षिण एशिया को भुगतना पड़ेगा।
वैश्विक चिंता
संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने कहा, आईएस-के का बढ़ता नेटवर्क और दुष्प्रचार इस गुट की बढ़ती पहुंच और अफगान सीमाओं के पार गतिविधियां नई अंतरराष्ट्रीय चिंताएं पैदा कर रही हैं। अधिकारियों ने बताया कि तालिबान से शत्रुता के बावजूद आईएस अपना प्रभाव छोड़ने में कमी नहीं छोड़ रहा है।
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ईरान ने कई को दी फांसी
ईरानी मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, इस्राइल-ईरान युद्धविराम के बाद के महीने में ईरानी जेलों में 85 कैदियों को फांसी दी गई है। हेंगाव मानवाधिकार संगठन के मुताबिक इनमें से 6 अफगान नागरिक थे। अन्य में 15 लूर, 12 तुर्क, 12 कुर्द और 6 बलोच थे। छह को इस्राइल के लिए जासूसी के आरोप में भी फांसी दी गई। जबकि 2025 से पहले के छह माह में 40 अफगान नागरिकों को फांसी दी गई। इससे पता चलता है कि अफगानिस्तान में हद तक अपराधी विदेशों में मौजूद हैं।
आईएस की सुरक्षित पनाहगाह
अमेरिका ने चेताया, तालिबान के सत्ता में आने के बाद से, अफगानिस्तान आईएस के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह बनता जा रहा है। असुरक्षा गहराने के साथ मानवाधिकार समूहों ने भी ईरान में अफगान प्रवासियों की बढ़ती संख्या पर गंभीर चिंता जताई है।