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मृत या गतिशील अर्थव्यवस्था: ट्रंप के बयान के बाद भारत को लेकर नई बहस; अमेरिकी विशेषज्ञ खुद खोल रहे दावे की पोल

Sat, 02 Aug 2025 05:54 AM IST
शिव शुक्ला अमर उजाला नेटवर्क, वाशिंगटन/नई दिल्ली

सार

नोबेल विजेता अर्थशास्त्री पॉल क्रुगमैन ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था ने एक दशक में रफ्तार पकड़ी है। डेमोग्राफिक डिविडेंड, टेक स्टार्टअप्स और वैश्विक निवेश इसकी रीढ़ हैं। डिजिटल अर्थव्यवस्था में भारत नए आयाम खड़े कर रहा है।
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भारत-अमेरिका। - फोटो : AI
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विस्तार
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत को डेड इकोनॉमी (मृत अर्थव्यवस्था) बताने पर अंतरराष्ट्रीय आर्थिक विशेषज्ञ और मीडिया ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। खासकर तब जब भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित हो रहा है। ट्रंप के इस राजनीतिक बयान के पीछे अमेरिका की घरेलू चुनावी राजनीति भी देखी जा रही है, लेकिन इसने वैश्विक अर्थशास्त्रियों और मीडिया का ध्यान भारत की आर्थिक असलियत की ओर खींचा है।

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अमेरिका के प्रमुख आर्थिक थिंक टैंक अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ फेलो डेरेक स्किसोर्स ने कहा, भारत में संरचनात्मक समस्याएं जरूर हैं, लेकिन उसे मृत अर्थव्यवस्था कहना न केवल तथ्यात्मक रूप से गलत है, बल्कि यह भारत के साथ अमेरिका की रणनीतिक साझेदारी को भी कमजोर करता है। भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था और सेवा क्षेत्र की उभरती भूमिका दुनिया के लिए प्रेरक मॉडल बन रही है। वहीं, पीटरसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स के वरिष्ठ अर्थशास्त्री निकोलस वर्नेन ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है और वह वैश्विक आपूर्ति शृंखला में अहम भूमिका निभा रहा है। ट्रंप का बयान चुनावी राजनीति से प्रेरित है, न कि आर्थिक विश्लेषण से।

अमेरिका विशाल जीडीपी लेकिन रिकॉर्ड कर्ज भी
अमेरिका अब भी दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। इसकी जीडीपी 28.8 ट्रिलियन डॉलर और प्रति व्यक्ति आय 85,000 डॉलर से अधिक है। लेकिन, इसका कुल सरकारी कर्ज 34.5 ट्रिलियन डॉलर पार कर गया है, जो उसकी जीडीपी का लगभग 120% है। अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा कर्जदार देश है। अमेरिका की आर्थिक ताकत मुख्य रूप से डॉलर की वैश्विक स्थिति, तकनीकी प्रभुत्व और सेवा क्षेत्र पर टिकी है, लेकिन घरेलू असमानता, राजनीतिक ध्रुवीकरण और भारी बजट घाटा उसकी स्थिरता पर सवाल उठाते हैं।
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चीन उत्पादन में अग्रणी, लेकिन कर्ज और जनसंख्या समस्या गंभीर
चीन की जीडीपी 18.7 ट्रिलियन डॉलर है, लेकिन उसका कुल कर्ज उसकी जीडीपी के 300% से अधिक हो चुका है। बढ़ता कर्ज चीन की भी बड़ी समस्या बनता जा रहा है। युवा बेरोजगारी, घटती जनसंख्या और रियल एस्टेट संकट गंभीर आर्थिक संकेत दे रहे हैं। हालांकि चीन अब भी दुनिया का विनिर्माण केंद्र बना हुआ है, परंतु उसकी विकास दर अब धीरे-धीरे भारत से पीछे छूट रही है।

भारत विकास दर में शीर्ष पर, पर बुनियादी चुनौतियां कायम
भारत की मौजूदा जीडीपी 4.2 ट्रिलियन डॉलर है। जनसंख्या 142 करोड़ को पार करने के बावजूद विकास दर 6.8% है, जो दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज है। कुल सरकारी कर्ज लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर है, जो उसकी जीडीपी का 80% है। भारत की प्रति व्यक्ति आय 2,900 डॉलर के आसपास है, जो अभी भी कई विकसित देशों से कम है, लेकिन युवा जनसंख्या, डिजिटल बुनियादी ढांचे और वैश्विक व्यापार में बढ़ती भूमिका उसकी वास्तविक ताकत बनती जा रही है।

अर्थशास्त्री बोले-नए आयाम बना रहा भारत
नोबेल विजेता अर्थशास्त्री पॉल क्रुगमैन ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था ने एक दशक में रफ्तार पकड़ी है। डेमोग्राफिक डिविडेंड, टेक स्टार्टअप्स और वैश्विक निवेश इसकी रीढ़ हैं। डिजिटल अर्थव्यवस्था में भारत नए आयाम खड़े कर रहा है। भारत सरकार के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने कहा कि ट्रंप की टिप्पणी आर्थिक तथ्यों से पूरी तरह कटी हुई और भ्रामक है। भारत के सामने श्रम बाजार की जटिलताएं व आय असमानता जैसी चुनौतियां हैं, लेकिन उसे मृत अर्थव्यवस्था कहना उसकी तेज विकास दर, मजबूत डिजिटलीकरण और वैश्विक निवेशकों की बढ़ती रुचि को पूरी तरह नजरअंदाज करता है। भारत की अर्थव्यवस्था डायनामिक ट्रांजिशन फेज में है, जहां वह पुराने संस्थागत ढांचे को पीछे छोड़कर वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए नई बुनियाद बना रही है।

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