West Asia Conflict: ईरानी सेना की तरफ से दावा किया गया है कि उसने एक अमेरिकी एफ-18 विमान को मार गिराया है, जिसका वीडियो भी ईरानी मीडिया की तरफ जारी किया गया है। वहीं अमेरिका ने ऐसे किसी दावे को असत्य बताते हुए कहा कि उसके किसी भी विमान को नहीं गिराया गया है।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग को करीब एक महीने हो चुका है, इसी बीच ईरानी सेना आईआरजीसी की तरफ से दावा किया है उसने अमेरिकी लड़ाकू विमान एफ-18 को मार गिराया है। ईरानी मीडिया की तरफ से एक्स पर जारी किए गए वीडियो में साफ देखा जा सकता है। जिसमें एक एफ-18 विमान उड़ रहा है और उस पर मिसाइल से हमला किया जाता है। हालांकि इस वीडियो के सत्यता की पुष्टि नहीं हो सकी के ये वीडियो कब का और दिखाया गया विमान कब और कहां मार गिराया गया है।
ईरान के दावे को अमेरिका ने ठुकराया
वहीं, अमेरिका का कहना है कि ईरान के एफ-18 विमान को गिराने के दावे के जवाब में उसके किसी भी विमान को नहीं गिराया गया है। अमेरिकी सेना की केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने एक्स पर कहा है कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर द्वारा किए गए ये दावे झूठे हैं कि उसने एक नए उन्नत वायु रक्षा प्रणाली से अमेरिकी एफ-18 लड़ाकू विमान को गिराया है। सेंटकॉम ने कहा, 'ईरान द्वारा किसी भी अमेरिकी लड़ाकू विमान को नहीं गिराया गया है।' अमेरिका के इस कड़े दावे के बावजूद, यह सवाल अभी भी बना हुआ है कि क्या ईरान ने कुछ ही दिन पहले एक एफ-35 विमान को गिराया था, जिसे हवा में निशाना बनाना बेहद मुश्किल माना जाता है।
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पश्चिम एशिया में संघर्ष और सैन्य गतिविधि
यह संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ था जब अमेरिका और इस्राइल ने मिलकर ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले किए थे, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की भी मौत हो गई थी। ईरान के नए सर्वोच्च नेता और अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई ने अपने पहले सार्वजनिक संदेश में कहा है कि ईरान अपने मारे गए लोगों का बदला जरूर लेगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखने की नीति जारी रहेगी और पड़ोसी देशों को अमेरिकी सैन्य ठिकानों की मेजबानी बंद करनी चाहिए।
अमेरिका-इस्राइल-ईरान युद्ध का असर
पश्चिम एशिया में चल रहे इस संघर्ष में भारी जानमाल का नुकसान हुआ है। आंकड़ों के अनुसार, ईरान में 1300 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है, लेबनान में 1000+ मौतें और लाखों लोग बेघर हुए हैं। वहीं इस्राइल में 15 लोगों की मौत हुई है और अमेरिका में 13 सैनिकों की मौत हुई है।