ईरान के ओपेक (पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन) के गवर्नर हुसैन काजेम्पौर अर्देबिली ब्रेन हेमरेज होने के बाद रविवार को कोमा में चले गए। ईरान के तेल मंत्रालय की वेबसाइट के हवाले से यह जानकारी दी गई है।
काजेम्पौर को तेहरान के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्हें पहली बार साल 1985 में ओपेक में ईरान के गवर्नर के रूप में नियुक्त किया गया था। उन्होंने जापान में इस्लामिक रिपब्लिक के राजदूत के रूप में भी कार्य किया था। उन्हें जानने वाले उनके समकक्ष उन्हें मध्यस्थता में अतिनिपुण वार्ताकार मानते हैं, यही वजह है कि ईरान को अपनी जगह पर मजबूती से खड़े रहने में काफी हद तक सफल रहा है। अर्देबिली इतने लोकप्रिय हैं कि साल 2018 में एक सभा के दौरान जब वह पहुंचे तो स्वयं तेल मंत्री बिजन नामदार जांगनेह तक खड़े हो गए थे।
अर्देबिली को जंगानेह का एक महत्वपूर्ण सलाहकार माना जाता है। उन्होंने 2015 के परमाणु समझौते के बाद ईरान के तेल उद्योग के पुनर्वास और ओपेक में उसकी स्थिति को मजबूत करने में काफी अहम भूमिका निभाई। उन्होंने प्रतिबंधों से मिली राहत की अल्पकालिक अवधि में भी देश के कच्चे तेल के उत्पादन में बड़े सुधार किए। अर्देबिली ने में अपने सऊदी समकक्षों के साथ भी अच्छे संबंध बनाए रखे, तब भी जब दोनों क्षेत्रीय शक्तियों के बीच संबंध सहज नहीं थे।
पहचान जाहिर नहीं करते की शर्त पर तेल मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि वह मीडिया को जानकारी देने के लिए अधिकृत नहीं हैं, परंतु अर्देबिली के अस्पताल में भर्ती होने की वजह कोरोना वायरस से जुड़ी हुई नहीं है। तेल मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि काजेम्पौर के दिल संबंधी समस्या है और इसी वजह से उन्होंने बीती 5 मार्च को बुलाई गई ओपेक की विशेष बैठक में भी शिरकत नहीं की थी। क्योंकि उस दौरान यात्रा करने पर कोरोना वायरस के कारण स्वास्थ्य के लिए जोखिम बढ़ गया था।