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ईरान ने कहा- नहीं करेंगे आत्मसमर्पण, फिर चाहे दुश्मन बम ही क्यों ना गिरा दे

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: Shilpa Thakur Updated Fri, 24 May 2019 03:57 PM IST
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हसन रूहानी - फोटो : File Photo

ईरान के राष्ट्रपति हसन रुहानी ने कहा है कि ईरान अमेरिका के दबाव के सामने कभी आत्मसमर्पण नहीं करेगा और ना ही अपने लक्ष्यों से पीछे हटेगा फिर चाहे उसपर बम ही क्यों ना गिरा दिया जाए। ये बात रुहानी ने गुरुवार को कही है। 

इससे पहले ईरान के सेना प्रमुख ने कहा है कि ईरान और वाशिंगटन के बीच चल रहा विवाद 'इच्छाओं का संघर्ष' है। ईरान की ओर से यह भी कहा गया कि अमेरिका खाड़ी क्षेत्र में उससे उलझने का प्रयास ना करे। अमेरिकी सैनिकों ने मध्य-पूर्व में मौजूदगी बढ़ाई है। यहां जंगी बेड़े तैनात किए गए हैं। इनमें पैट्रियट मिसाइलें, बी-52 बमवर्षक और एफ-15 लड़ाकू विमान शामिल हैं।



दोनों देशों के बीच इस वक्त काफी तनाव का माहौल है। हालात ऐसे हैं कि खाड़ी क्षेत्र में हो रहे हमलों के लिए भी अमेरिका ईरान को ही जिम्मेदार बता रहा है। हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने ऐसे संकेत दिए हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत संभव है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2015 में ईरान परमाणु समझौते से बाहर होने के बाद ईरान पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए थे। साथ ही अमेरिका ने अन्य देशों को ईरान से तेल आयात करने को मना किया है। अमेरिका ने कहा है कि जो भी देश ईरान से तेल आयात करेगा उसे भी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा।

रुहानी ने हाल ही में अमेरिका द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों की चुनौती का सामना करने के लिए ईरानी नागरिकों से एकजुट होने की अपील भी की।

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हसन रूहानी - फोटो : File Photo
ईरान के राष्ट्रपति हसन रुहानी ने कहा है कि ईरान अमेरिका के दबाव के सामने कभी आत्मसमर्पण नहीं करेगा और ना ही अपने लक्ष्यों से पीछे हटेगा फिर चाहे उसपर बम ही क्यों ना गिरा दिया जाए। ये बात रुहानी ने गुरुवार को कही है। 

इससे पहले ईरान के सेना प्रमुख ने कहा है कि ईरान और वाशिंगटन के बीच चल रहा विवाद 'इच्छाओं का संघर्ष' है। ईरान की ओर से यह भी कहा गया कि अमेरिका खाड़ी क्षेत्र में उससे उलझने का प्रयास ना करे। अमेरिकी सैनिकों ने मध्य-पूर्व में मौजूदगी बढ़ाई है। यहां जंगी बेड़े तैनात किए गए हैं। इनमें पैट्रियट मिसाइलें, बी-52 बमवर्षक और एफ-15 लड़ाकू विमान शामिल हैं।

दोनों देशों के बीच इस वक्त काफी तनाव का माहौल है। हालात ऐसे हैं कि खाड़ी क्षेत्र में हो रहे हमलों के लिए भी अमेरिका ईरान को ही जिम्मेदार बता रहा है। हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने ऐसे संकेत दिए हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत संभव है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2015 में ईरान परमाणु समझौते से बाहर होने के बाद ईरान पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए थे। साथ ही अमेरिका ने अन्य देशों को ईरान से तेल आयात करने को मना किया है। अमेरिका ने कहा है कि जो भी देश ईरान से तेल आयात करेगा उसे भी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा।

रुहानी ने हाल ही में अमेरिका द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों की चुनौती का सामना करने के लिए ईरानी नागरिकों से एकजुट होने की अपील भी की।

हसन रूहानी - फोटो : File Photo
1980-88 के ईरान-इराक युद्ध की सालगिराह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "हमें प्रतिरोध की जरूरत है ताकि हमारे दुश्मनों को पता चले कि अगर वे हमारी जमीन पर बमबारी करते हैं, हमारे बच्चे शहीद होते हैं या फिर घायल होते हैं, लेकिन हम अपने देश की स्वतंत्रता और अपने गौरव के लिए अपने लक्ष्यों को नहीं छोड़ेंगे।"

वहीं कुछ दिन पहले ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी थी। उन्होंने एक ट्वीट करते हुए कहा था कि अगर ईरान लड़ाई चाहता है तो उसका आधिकारिक अंत हो जाएगा। ट्रंप ने रविवार रात इराक स्थित अमेरिकी दूतावास के पास रॉकेट हमले के बाद यह चेतावनी दी थी। जिसके बाद से ईरान के साथ अमेरिका का तनाव और भी बढ़ गया।

अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने भी कहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान सरकार को स्पष्ट संदेश दे दिया है। अब किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए। आगे के हालात की जिम्मेदारी ईरान की होगी। 

ट्रंप का कहना है कि वह ईरान के साथ कोई लड़ाई नहीं चाहते लेकिन अगर ईरान की ओर से कोई हमला किया गया तो उसका जवाब मजबूती के साथ दिया जाएगा। उन्होंने ये भी कहा कि अगर ईरान चाहता है तो वो बातचीत के लिए तैयार हैं।
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