मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर गहराता दिख रहा है। ईरान ने साफ कर दिया है कि उसकी रक्षा और मिसाइल क्षमताएं किसी भी बातचीत का हिस्सा नहीं होंगी। इसी बीच अमेरिका ने इस्राइल के रेड सी पोर्ट शहर इलात में अपना मिसाइल विध्वंसक युद्धपोत तैनात कर दिया है। हालात ऐसे हैं कि एक ओर बातचीत की बात हो रही है, तो दूसरी ओर सैन्य ताकत का प्रदर्शन भी तेज हो गया है।
क्या है पूरा मामला
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ईरान बराबरी और आपसी सम्मान के आधार पर बातचीत के लिए तैयार है। लेकिन उन्होंने दो टूक कहा कि ईरान की मिसाइल और रक्षा क्षमताएं कभी भी बातचीत की मेज पर नहीं आएंगी। यह बयान ऐसे समय आया है, जब मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर परमाणु समझौते को लेकर दबाव बना रहे हैं।
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अमेरिका की सैन्य तैयारी
अमेरिका ने हाल के हफ्तों में मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाई है। इलात बंदरगाह पर अमेरिकी मिसाइल विध्वंसक की तैनाती को पहले से तय बताया गया है। इस्राइल की सेना ने कहा है कि इससे आम लोगों के लिए किसी तरह की नई गाइडलाइन जारी नहीं की गई है। हालांकि, इस तैनाती को ईरान पर दबाव बढ़ाने के तौर पर देखा जा रहा है।
बातचीत या टकराव
ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वे सैन्य कार्रवाई से बचना चाहते हैं और बातचीत का रास्ता खुला है। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिका अपनी ताकत का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेगा। ईरान ने जवाब में कहा है कि वह बातचीत और युद्ध, दोनों के लिए तैयार है। ईरान ने क्षेत्रीय देशों के साथ मिलकर शांति और स्थिरता की बात भी दोहराई है।
तुर्किये की मध्यस्थता
तुर्किये इस पूरे तनाव को कम करने की कोशिश कर रहा है। राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन ने ईरान के राष्ट्रपति से फोन पर बात कर मध्यस्थ की भूमिका निभाने की पेशकश की है। तुर्किये का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत शुरू होना जरूरी है, ताकि क्षेत्र में हालात और न बिगड़ें।
ईरान के विदेश मंत्री का बयान
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शुक्रवार को घोषणा की कि उनका देश तनाव दूर करने के वास्ते बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन अमेरिका के साथ बातचीत की फिलहाल कोई ठोस योजना नहीं है। मंत्री अब्बास अराघची ने इस्तांबुल में यह बात कही, जहां वह तुर्किये के नेताओं के साथ बातचीत के लिए पहुचे हैं। ईरान के खिलाफ अमेरिका द्वारा संभावित सैन्य हमले की धमकियों के बाद तुर्किये व्यापक क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए प्रयासरत है।
अमेरिका ने सैन्य हमले के लिए दो स्पष्ट लक्ष्मण रेखाएं निर्धारित की हैं। एक, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या और दूसरी, हिरासत में लिये गए लोगों को बड़े पैमाने पर फांसी दिए जाने की आशंका। अराघची ने तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों से कहा कि ईरान की ‘‘अमेरिकियों से मिलने’’ की कोई योजना नहीं है।
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