Iran-Israel Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंध अब और बिगड़ते नजर आ रहे हैं।वहीं अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने साफ तौर पर कूटनीति छोड़ने की बात की है। ईरान के इस रुख से अंदेशा है कि आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ सकता है जिसका असर वैश्विक स्तर पर भी दिख सकता है।
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने शनिवार को कहा कि अमेरिका की तरफ से ईरान पर किए गए ताजा हवाई हमलों के बाद अब कूटनीति का रास्ता बंद हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने अब कोई भी सीमा नहीं छोड़ी है, जिसे पार न किया हो। ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने बताया कि वह रविवार को रूस की राजधानी मॉस्को जाएंगे और वहां रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात करेंगे। इस बैठक में वे क्षेत्रीय हालात और अमेरिका के हमलों के बाद की रणनीति पर चर्चा करेंगे।
अमेरिका ने ईरान पर रात में किए हवाई हमले
अमेरिका ने शुक्रवार की रात ईरान के कुछ ठिकानों पर हवाई हमले किए। इन हमलों में ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड से जुड़ी कुछ सुविधाओं को निशाना बनाया गया है। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई उनके सैनिकों पर हुए हालिया हमलों के जवाब में की गई है। लेकिन ईरान इस कार्रवाई को सीधा हमला मान रहा है और इसे 'राष्ट्रीय संप्रभुता पर हमला' बता रहा है। रूस का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, 'हमारे बीच रणनीतिक साझेदारी है और हम हमेशा एक-दूसरे से परामर्श करते हैं तथा अपनी स्थिति में समन्वय करते हैं।'
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अब कोई कूटनीति नहीं बची- ईरान
विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने बयान में कहा, अमेरिकी हमलों के बाद अब कूटनीति की कोई गुंजाइश नहीं बची है। अमेरिका ने सभी सीमाएं पार कर दी हैं। अब हमारे पास जवाब देने के लिए दूसरे विकल्प ही बचे हैं।' उन्होंने अमेरिका पर यह भी आरोप लगाया कि वह क्षेत्र में तनाव फैलाना चाहता है, जिससे पूरा पश्चिम एशिया संकट में घिर जाए।
रूस से मदद या समर्थन की उम्मीद?
ईरान का रूस के साथ सैन्य और रणनीतिक सहयोग पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ा है। यह पहली बार नहीं है जब ईरान संकट की स्थिति में रूस से सलाह-मशविरा करने जा रहा है। माना जा रहा है कि पुतिन और अब्बास अराघची की बैठक में अमेरिका की सैन्य कार्रवाइयों, पश्चिम एशिया की स्थिति, और यूक्रेन युद्ध से जुड़े पहलुओं पर भी चर्चा हो सकती है।