प्रदर्शन के दौरान महसा अमिनी की फोटो लिए लोग
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ईरानी अदालतों ने संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ सहयोग करने के आरोप में दो महिला पत्रकारों की जेल की सजा कम कर दी है। महिलाओं के वकीलों ने रविवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि यह जानकारी दी।
37 वर्षीय इलाहे मोहम्मदी और 31 वर्षीय निलोफर हामेदी सितंबर 2022 में महसा अमिनी की हिरासत में हुई मौत का कवरेज किया था। जिसके कारण देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था। इसके बाद दोनों तेहरान की एविन जेल में एक साल तक जेल में रहने के बाद जमानत पर बाहर हैं।
जनवरी में दोनों महिलाओं के रिहा होने पर ईरान की न्यायपालिका ने अनिवार्य हिजाब के बिना तस्वीरें खिंचवाने के कारण उनके खिलाफ नई कार्यवाही शुरू की थी। स्थानीय मीडिया के मुताबिक फिलहाल तेहरान में दो अलग-अलग अपील अदालतों ने संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ सहयोग के आरोप से महिलाओं को बरी करने का फैसला सुनाया है।
छह और सात साल की मिली थी सजा
इसके पहले न्यायपालिका ने मोहम्मदी को छह साल जेल की जबकि हमीदी को सात साल की सजा सुनाई थी। दोनों को राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ मिलीभगत और साजिश रचने के लिए पांच साल की सजा जबकि इस्लामी गणतंत्र के खिलाफ प्रचार के लिए एक साल की सजा दी गई थी।
वकीलों ने कहा कि बाकी मामलों में अदालत ने सजा को बरकरार रखा है। वकीलों ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई द्वारा पिछले साल घोषित माफी के तहत पत्रकारों को अब रिहा कर दिया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में रही थी इस युवा महिला की मौत
गौरतलब है कि महसा अमिनी की मौत केवल 22 साल की आयु में हुई थी। पुलिस हिरासत में मौत के कारण ईरान के सुरक्षाबलों को दुनियाभर के मानवाधिकार संगठनों ने कठघरे में खड़ा किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार महसा अमिनी की मौत हिजाब विवाद के दौरान हुई थी। ईरान में व्यापक विरोध प्रदर्शन के बीच महसा अमिनी की मौत ने संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया था।