शिया मुस्लिम बहुल देश ईरान में 18 जून को चुनाव होने जा रहे हैं और आगामी अगस्त माह से जीतने वाला प्रत्याशी अगले राष्ट्रपति पद का कार्यभार संभालेगा। मौजूदा राष्ट्रपति हसन रूहानी 2017 में दूसरी बार चुने जा चुके हैं इसलिए तीसरा चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। ऐसे में एटमी संधि को लेकर अमेरिका व यूरोपीय देशों में हुई वार्ता के बाद तेजी से बदले हालात में इस बार के राष्ट्रपति चुनाव अहम होंगे।
देश में इस बार सात प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं जिनमें से पांच कट्टरपंथी विचारधारा हैं और दो उदारवादी हैं। मुख्य मुकाबला कट्टरपंथियों के बीच ही है। इनमें से ईरान के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और कट्टरपंथी नेता इब्राहिम रईसी की जीत पक्की मानी जा रही है। वे 2017 में कट्टरपंथी हसन रूहानी से चुनाव हार चुके हैं। लेकिन इस बार मैदान में उतरे पांच कट्टरपंथियों में रईसी सर्वाधिक कट्टरपंथी हैं।
देश में सेना (रिवॉल्यूशनरी गार्ड) समर्थित फारस न्यूज एजेंसी का ओपिनियम पोल बताता है कि इस बार 53 फीसदी मतदान होगा और रईसी को 72 फीसदी मत मिलेंगे।
अन्य उम्मीदवारों में कट्टरपंथी नेता और ईरानी सेना के पूर्व कमांडर इन चीफ मोहसिन रेजाई, सुरक्षा परिषद के सदस्य सईद जलीली, ईरानी सैंट्रल बैंक के पूर्व प्रमुख अब्दुलनस्र हिम्मती और संसद में डिप्टी स्पीकर आमिर हुसैन गाजीजादे हाशमी शामिल हैं।
चुनाव से मतदाताओं का मोहभंग
इस बार ईरान में चुनाव के बहिष्कार की आवाजें भी खूब उठ रही हैं। कमजोर अर्थव्यवस्था, भ्रष्टाचार, कुप्रबंधन और देश पर लगी कई पाबंदियों की वजह से कई मतदाताओं का चुनाव से मोहभंग हुआ है।
ईरान में हर चार साल में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में यदि पहले दौर के मतदान में किसी उम्मीदवार को 50 फीसदी से अधिक वोट नहीं मिले तो दूसरे दौर में सर्वाधिक मत पाने वाले दो प्रत्याशियों को बीच मतदान होता है। देश के इस्लामी गणराज्य का सर्वेसर्वा वहां का धर्मगुरु होता है जिसे रहबर या सर्वोच्च नेता कहा जाता है।
इसलिए पक्की है रईसी की जीत
ईरान में कट्टरपंथी नेता इब्राहिम रईसी मौलवियों के उस छोटे से समूह का हिस्सा हैं, जिसने 1988 में तत्कालीन सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह रुहोल्लाह खोमैनी के आदेश पर ईरान-इराक युद्ध के बाद बंदी बनाए गए हजारों राजनीतिक कैदियों को मारने के आदेश पर दस्तखत कर दिए थे।
तब वे तेहरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशन कोर्ट में एक प्रॉसिक्यूटर के पद पर थे। इसके बाद अमेरिका ने रईसी पर प्रतिबंध लगा दिए। इसका लाभ देश के कट्टरपंथी मतदाताओं के बीच इस बार उठाने में सबसे आगे हैं।
दुश्मनों का दबाव घटाएगा अधिक मतदान : खामनेई
ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह खामेनेई ने ईरानी लोगों से आग्रह किया कि वे शुक्रवार को राष्ट्रपति पद के लिए होने वाले मतदान में जरूर हिस्सा लें। उन्होंने कहा, अधिक मतदान व इस्लामी रिपब्लिक पर बाहरी दबाव के बीच सीधा संबंध है। यदि मतदान में लोगों की भागीदारी कम होती है तो दुश्मनों का दबाव बढ़ेगा। विदेशी दबाव और प्रतिबंधों को कम करने के लिए मतदान में लोगों की भागीदारी बढ़ना बेहद जरूरी है।