जांबिया के पहले राष्ट्रपति को माइना सोको मेडिकल सेंटर में भर्ती कराया गया था जो सेना का अस्पताल है। उल्लेखनीय है कि कौंडा उस आंदोलन के नेता थे जिस कारण जांबिया में अंग्रेजों का औपनिवेशिक शासन समाप्त हुआ और वह 1964 में जांबिया के पहले लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित राष्ट्रपति बने।
जांबिया के पहले राष्ट्रपति केनेथ कौंडा का 97 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। यह घोषणा देश के राष्ट्रपति एडवर्ड लुंगु ने गुरुवार की शाम को फेसबुक पर की। कौंडा के बेटे कामरागे कौंडा ने भी फेसबुक पर उनके निधन की सूचना दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कौंडा के निधन पर शोक व्यक्त किया है।
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कौंडा के बेटे ने लिखा, 'मुझे यह सूचित करते हुए दुख हो रहा है कि एमजी अब नहीं रहे। हम उनके लिए प्रार्थना करते हैं।' एमजी शब्द का इस्तेमाल बड़ों के सम्मान में किया जाता है। जानकारी के अनुसार उन्हें सोमवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था और उनका न्यूमोनिया का इलाज चल रहा था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ट्वीट कर इस घटना को लेकर संवेदना प्रकट की। उन्होंने लिखा, 'डॉ. केनेथ डेविड कौंडा के निधन की खबर सुनकर बेहद दुखी हूं। वह एक सम्मानित वैश्विक नेता और बेहतरीन राजनेता थे। उनके परिवार और जांबिया की जनता के प्रति मैं अपनी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं।'