ईरान ने परमाणु हथियारों के अप्रसार की संधि यानी एनपीटी से बाहर निकलने को लेकर अभी कोई फैसला नहीं किया है। ईरान के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि इस मुद्दे पर कोई भी फैसला अमेरिका के व्यवहार पर निर्भर करेगा।
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रेजाई ने शनिवार को एक साक्षात्कार में कहा कि उनका देश अपने दिवंगत सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की ओर से जारी उस धार्मिक आदेश का अभी भी पालन करता है, जिसमें परमाणु हथियार विकसित करने पर रोक लगाई गई है।
पश्चिम एशिया में तनाव खत्म करने के लिए ईरान ने रखी क्या शर्तें?
मोहसिन रेजाई ने कहा, "हालांकि, हम नहीं जानते कि भविष्य में क्या होगा।" रेजाई ने इस बात पर जोर दिया कि युद्ध खत्म करने के लिए ईरान की शर्तें स्वीकार करना वॉशिंगटन के हित में है। इन शर्तों में सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई रोकना, ईरान की जब्त संपत्तियों को जारी करना और ईरान के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी हटाना शामिल है।
शिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, रेजाई ने कहा कि कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों के साथ बातचीत जारी है। ईरान ने उन्हें अमेरिका के साथ बातचीत शुरू करने के लिए अपनी शर्तों की जानकारी दे दी है।
ईरान पर क्या कार्रवाई करने की तैयारी में अमेरिका?
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र में अपनी कूटनीतिक गतिविधियों के केंद्र में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रखेंगे। न्यूयॉर्क में खाड़ी देशों के नेताओं के साथ उनकी बातचीत प्रस्तावित है। अमेरिकी अधिकारियों ने तेहरान के साथ कारोबार करने वाली संस्थाओं के खिलाफ आगे कार्रवाई के संकेत भी दिए हैं।
ट्रंप मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगे। इसके बाद वह न्यूयॉर्क में खाड़ी सहयोग परिषद के नेताओं से मुलाकात करेंगे। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान चर्चा का प्रमुख विषय रहेगा। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया कि ट्रंप या अमेरिका का कोई अन्य प्रतिनिधि ईरानी अधिकारियों से मुलाकात करेगा या नहीं।
ईरान ने होर्मुज पर कैसे मजबूत की अपनी पकड़?
28 फरवरी को इस्राइल और अमेरिका ने ईरान के कई शहरों पर संयुक्त हमले शुरू किए थे। इसके जवाब में ईरान ने इस्राइल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों तथा संपत्तियों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इसके साथ ही उसने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली।
18 जून को अमेरिका और ईरान ने क्षेत्र में सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करने को लेकर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए दोनों देशों के बीच 60 दिनों के भीतर बातचीत होनी थी। यह समयसीमा 17 अगस्त को खत्म हो गई।
हालांकि, दोनों देशों के बीच हालिया घटनाक्रम और बढ़ते तनाव के बाद इन वार्ताओं का भविष्य अब भी स्पष्ट नहीं है।