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Iran-Israel War: 'बीबी, संभल जाओ वरना...', क्या ट्रंप की चेतावनी के बाद ईरान पर इस्राइल ने टाला हमला?

Tue, 09 Jun 2026 09:03 AM IST
Pavan वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

ईरान के मिसाइल हमले के बाद इस्राइल बड़े जवाबी हमले की तैयारी में था, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्तक्षेप के बाद इस योजना को रोक दिया गया। ट्रंप ने नेतन्याहू को सावधान रहने की सलाह दी और कहा कि अमेरिका-ईरान परमाणु समझौते की बातचीत अंतिम चरण में है।
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बेंजमिन नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रंप (बाएं से दाएं) - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजमिन नेतन्याहू को ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य हमले से बचने की सलाह दी है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार ट्रंप ने नेतन्याहू से फोन पर कहा, 'बीबी, तुम्हें सावधान रहना चाहिए, नहीं तो जल्द ही तुम अकेले पड़ जाओगे'। यह बातचीत ऐसे समय हुई जब इस्राइल ईरान के कई संवेदनशील ठिकानों पर बड़े पैमाने पर जवाबी हमले की तैयारी कर रहा था। बताया गया कि ट्रंप की दखल के बाद नेतन्याहू ने बड़े हमले की योजना को फिलहाल रोकने पर सहमति जताई, बशर्ते ईरान आगे कोई नया हमला न करे। 
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जंग के 100वें फिर ईरान-इस्राइल में बढ़ा तनाव
दो महीने पहले हुए युद्धविराम के बाद पहली बार ईरान और इस्राइल के बीच फिर से तनाव बढ़ा था। रविवार को ईरान ने इस्राइल पर मिसाइलें दागीं, जिसके जवाब में इस्राइल ने पश्चिमी और मध्य ईरान में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। हालांकि सोमवार तक दोनों देशों ने संकेत दिए कि वे फिलहाल सैन्य कार्रवाई रोक रहे हैं।

नेतन्याहू से ट्रंप ने क्या की अपील?
ट्रंप ने कहा कि उन्होंने नेतन्याहू को कोई सीधा आदेश नहीं दिया, बल्कि समझदारी से काम लेने की अपील की। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच एक महत्वपूर्ण समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश चल रही है और ऐसे समय में बड़े सैन्य हमले से बातचीत प्रभावित हो सकती है। वहीं, जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या उन्होंने इस्राइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू से ईरान पर हमले रोकने के लिए कहा, तो अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, 'नहीं। मैंने कहा कि जो सही है वह करें, लेकिन मैं चाहता हूं कि आप जितनी जल्दी हो सके, इसे रोक दें। मामला लेबनान से जुड़ा है और इसे रुकना ही चाहिए'।
 

कई देशों ने भी अमेरिका से की थी हस्तक्षेप की अपील
रिपोर्टों के अनुसार क्षेत्र के कई देशों ने भी अमेरिका से हस्तक्षेप करने की अपील की थी। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान की ओर से संकेत मिले थे कि यदि इस्राइल हमले रोक देता है तो वह भी आगे मिसाइलें नहीं दागेगा।
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इस्राइली राजदूत बोले- करीबी दोस्तों में मतभेद हो जाते हैं
अमेरिका में इस्राइल के राजदूत येचिएल लाइटर ने इन खबरों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया बताया। उन्होंने कहा कि ट्रंप और नेतन्याहू के बीच करीब 40 साल पुरानी दोस्ती है और करीबी लोगों के बीच कभी-कभी मतभेद या तीखी बातचीत होना सामान्य बात है। राजदूत ने कहा कि ट्रंप के अनुरोध पर इस्राइल ने सैन्य कार्रवाई की तीव्रता कम करने का फैसला किया, लेकिन अमेरिका यह भी समझता है कि इस्राइल अपने ऊपर होने वाले बैलिस्टिक मिसाइल हमलों का जवाब देने का अधिकार रखता है। उन्होंने दोनों देशों के बीच सहयोग और समझ को बेहद मजबूत बताया।



इस बीच, ट्रंप ने पहले इस्राइल और ईरान दोनों से गोलीबारी और हमले रोकने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि शांति के लिए अंतिम बातचीत आगे बढ़ेगी, बशर्ते कोई मूर्खतापूर्ण कदम रास्ते में न आए। वहीं, नेतन्याहू ने साफ कहा कि इस्राइल को आत्मरक्षा का पूरा अधिकार है और वह जरूरत पड़ने पर इसका इस्तेमाल करता रहेगा। दूसरी ओर, ईरान ने भी सख्त रुख अपनाते हुए संकेत दिए हैं कि यदि हालात बिगड़ते हैं तो वह लंबे संघर्ष के लिए तैयार है। ईरानी नेताओं का कहना है कि अमेरिका और इस्राइल पर भरोसे की कमी क्षेत्र में तनाव को आगे भी बढ़ा सकती है।

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हम अमेरिका पर भरोसा नहीं है- कालीबाफ
इस बीच ईरान के संसद अध्यक्ष और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर कालीबाफ ने कहा कि उन्हें अमेरिका पर भरोसा नहीं है और ट्रंप के हालिया बयान पहले हुए समझौतों से मेल नहीं खाते। फिलहाल क्षेत्र में तनाव कम होता दिखाई दे रहा है, लेकिन ईरान और इस्राइल के बीच स्थिति अब भी नाजुक बनी हुई है।
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