ईरान और इस्राइल के बीच चल रहे सैन्य संघर्ष ने हालात बेहद तनावपूर्ण बना दिए हैं। अब तक 224 ईरानियों और 24 इस्राइलियों की मौत हो चुकी है। इस्राइल का दावा है कि ईरान कुछ महीनों में परमाणु हथियार बना सकता है, जबकि अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, ईरान को ऐसा हथियार बनाने में अभी कम से कम तीन साल और लग सकते हैं। देखा जाए तो इस मतभेद के बीच तीसरे विश्व युद्ध की आशंका गहराती जा रही है।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम के विरोध में इस्राइल ने पिछले सप्ताह ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू कर दिया। जवाब में ईरान ने भी पलटवार किया, जिसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव इतना बढ़ गया कि इस्राइल और ईरान दोनों तरफ से ताबड़तोड़ हमले शुरू हो गए। देखते ही देखते स्थिती इतनी खराब हो गई है कि दुनियाभर में तीसरे विश्व युद्ध का डर सताने लगा है। ऐसे में मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि अमेरिका ने इस्राइल के उस दावों से असहमति जातई, जिसमें इस्राइल ने कहा था कि ईरान परमाणु हथियार बनाने के बेदह नजदीक है।
विज्ञापन
बता दें कि अमेरिका ने इस्राइल के जिस दावे से असहमति जताई, उसमें इस्राइल की तरफ से कहा गया था कि ईरान कुछ ही महीनों में परमाणु हथियार बना सकता है और अब वह "नो रिटर्न पॉइंट" तक पहुंच चुका है। इसी को आधार बनाकर इस्राइल ने हमले किए। इन हमलों में अब तक ईरान में 224 और इस्राइल में 24 लोगों की मौत हो चुकी है।
इस्राइल दावों से अमेरिका की असहमति
हालांकि अब इस मामले में सीएनएन की तरफ से प्राप्त एक अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट इस्राइल के दावे से सहमत नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान सक्रिय रूप से परमाणु हथियार नहीं बना रहा है और उसे ऐसा हथियार बनाने में कम से कम तीन साल और लग सकते हैं। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि ईरान काफी करीब है लेकिन अब तक अंतिम कदम नहीं उठाया है।
ईरान के परमाणु संवर्धन केंद्रों पर इस्राइल का हमला
इस्राइली हमलों में ईरान के नतांज स्थित प्रमुख यूरेनियम संवर्धन केंद्र और इस्फहान के एक रिसर्च सेंटर को गंभीर नुकसान पहुंचा है। लेकिन सबसे सुरक्षित फोर्डो साइट, जो जमीन के नीचे बनी है, को कोई नुकसान नहीं हुआ। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बिना अमेरिकी सहयोग और बंकर बस्टर बमों के, इस्राइल फोर्डो को नुकसान नहीं पहुंचा सकता।
इस संघर्ष में भविष्य में शामिल होगा अमेरिका
दूसरी ओर देखा जाए तो अमेरिका के लिए यह स्थिति एक दुविधा बन गई है। मामले मेंराष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका इस संघर्ष में शामिल नहीं है, लेकिन भविष्य में शामिल हो सकता है। उन्होंने एक न्यूज चैनल से बातचीत के दौरान कहा कि हम अभी शामिल नहीं हैं, लेकिन संभव है कि आगे शामिल हों। हालांकि अमेरिकी सेना पहले ही अपने जवानों की सुरक्षा और इस्राइल की मदद के लिए मध्य पूर्व में सैन्य उपस्थिति बढ़ा रही है।