ईरान को लेकर अमेरिका के भीतर ही विरोधाभास सामने आ गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जहां दावा कर रहे हैं कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह खत्म हो चुका है, वहीं उनके ही प्रशासन के अधिकारी इसे अब भी संभावित खतरा बता रहे हैं। तुलसी गबार्ड ने कहा कि ईरान ने कार्यक्रम दोबारा शुरू नहीं किया। इससे युद्ध के कारण, तत्काल खतरे की परिभाषा और इस्राइल की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच अमेरिका के भीतर ही ईरान को लेकर विरोधाभासी बयान सामने आए हैं। एक ओर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार दावा कर रहे हैं कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है, वहीं उनके ही प्रशासन के कुछ अधिकारी इसे संभावित खतरा बता रहे हैं। इस विरोधाभास ने युद्ध के असली कारणों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी में हुई सुनवाई के दौरान अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गबार्ड ने कई अहम सवालों से बचते हुए बयान दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को दोबारा शुरू करने की कोई कोशिश नहीं की है। यह बयान ट्रंप के उस दावे से अलग है, जिसमें वे ईरान से तुरंत खतरा बता रहे हैं।
क्या खत्म हुआ ईरान का परमाणु कार्यक्रम?
अमेरिका ने पिछले साल ऑपरेशन मिडनाइट हैमर के तहत ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया था। इसके बाद ट्रंप ने कई बार कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह खत्म हो गया है। लेकिन अब सवाल उठ रहा है कि अगर कार्यक्रम खत्म हो गया था, तो फिर ईरान से खतरा क्यों बताया जा रहा है।
क्या सच में था तत्काल खतरा?
अमेरिकी अधिकारियों के बीच इस मुद्दे पर भी और मतभेद दिखे। एक तरफ ट्रंप प्रशासन ईरान को बड़ा खतरा बता रहा है, वहीं कुछ खुफिया अधिकारी यह मानते हैं कि ईरान से कोई तत्काल खतरा नहीं था। तुलसी गबार्ड ने भी यह स्पष्ट नहीं किया कि इमिनेंट थ्रेट की परिभाषा क्या है और इसे कौन तय करता है।
क्या इस्राइल के दबाव में हुआ युद्ध?
रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि यह युद्ध इस्राइल के दबाव में शुरू हुआ। एक वरिष्ठ अधिकारी ने अपने इस्तीफे में कहा कि ईरान से कोई सीधा खतरा नहीं था और यह संघर्ष राजनीतिक कारणों से शुरू हुआ। इससे अमेरिका और इस्राइल के रिश्तों और रणनीति पर भी सवाल उठे हैं। ट्रंप ने हाल ही में कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि ईरान जवाबी हमला करेगा। जबकि रिपोर्ट्स बताती हैं कि अमेरिकी एजेंसियों को पहले से इसकी आशंका थी। यहां तक कि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने की संभावना पर भी लंबे समय से तैयारी की जा रही थी।