ईरान के 11वें संसदीय चुनाव में कट्टरपंथियों को फायदा मिलने की संभावना जताई जा रही है। चुनाव पूर्व हजारों संभावित उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित करने के बीच शुक्रवार को मतदान शुरू होते ही ईरानियों ने सर्वोच्च नेता के कट्टर समर्थकों की मदद के लिए मतदान शुरू हुआ।
देश पर एटमी कार्यक्रम को लेकर अमेरिकी दबाव और घरेलू असंतोष के चलते ये चुनाव काफी अहम माने जा रहे हैं। हालांकि ईरान में संसद की शक्ति काफी सीमित है लेकिन यदि रूढ़िवादी जीतते हैं और सत्तारूढ़ दल के सांसदों का बहुमत होता है तो इसका लाभ 2021 में राष्ट्रपति पद के चुनाव में मिल सकता है।
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यानी अगर कट्टरपंथी समर्थक चुनाव जीतते हैं तो राष्ट्रपति चुनाव में सत्तारूढ़ पार्टी के अच्छे प्रदर्शन के आसार होने की संभावना रहेगी। सुबह के वक्त मतदान की गति काफी धीमी थी लेकिन दोपहर तक मस्जिदों में स्थापित कई मतदान केंद्रों पर लोगों की लंबी लाइनें लगी देखी गईं।
बता दें कि बगदाद हवाई अड्डे पर अमेरिकी ड्रोन हमले में ईरानी कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत के बाद यूक्रेनी विमान मार गिराने का देश में जबरदस्त विरोध है। लोगों में आर्थिक मोर्चे पर सरकार की विफलता को लेकर भी असंतोष है, लेकिन हजारों उम्मीदवारों के अयोग्य घोषित होने के साथ ईरानी सियासत में मध्यपंथ इस बार गायब दिखाई दिया।
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खामनेई की अपील और असंतोष
ईरान के सरकारी चैनल ने सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्ला अली खामनेई को पहला वोट देते दिखाया। वोट डालने के बाद खामनेई ने जनता से मतदान में अधिक से अधिक भारीदारी की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसा करके वह देश के राष्ट्रीय हित सुनिश्चित करेंगे। जबकि लोगों में बेरोजगारी और 90 सांसदों के विरुद्ध आर्थिक भ्रष्टाचार की जांच को लेकर जबरदस्त आक्रोश है।
हावी रहे हार्डलाइनर
देश में चुनाव प्रक्रिया पर नजर रखने वाली संस्था गार्जियन काउंसिल ने 6,850 नरमपंथी और प्रमुख रूढ़िवादियों की उम्मीदवारी खत्म करने के साथ ही हार्डलाइनरों (कट्टरपंथियों) को मैदान में हावी कर दिया। मतदाताओं के सामने सिर्फ अति-कट्टरपंथी और कम-कट्टरपंथी उम्मीदवारों के बीच किसी एक को चुनने का ही विकल्प रखा गया है।
एटमी कार्यक्रम पर अमेरिकी दबाव और घरेलू असंतोष के बीच मतदान
290 सीटों के लिए 5.8 करोड़ ईरानियों ने किया मतदान
10 घंटे तक चले मतदान में कट्टरपंथी मतदाता हावी रहे