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'होर्मुज पर ईरान का नियंत्रण नहीं': US सेना ने तेहरान का दावा किया खारिज, कहा- जहाजों की आवाजाही निर्बाध जारी

Sun, 12 Jul 2026 08:08 PM IST
Pavan वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन / तेहरान

सार

अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज को लेकर तनाव बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने इसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग बताते हुए कहा कि यातायात सामान्य है और ईरान का इस पर नियंत्रण नहीं है। वहीं, ईरान की समुद्री संस्था ने अमेरिकी दावों को खारिज करते हुए रास्ता बंद बताया है और कहा है कि अब बिना ईरानी परमिट के यहां से जहाजों की आवाजाही संभव नहीं होगी।
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होर्मुज पूरी तरह से खुला है- सेंटकॉम - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के दावों को खारिज करते हुए साफ किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से खुला है और वहां से जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी है।  सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक आधिकारिक बयान में सेंटकॉम ने कहा,'होर्मुज जलडमरूमध्य उन सभी जहाजों के लिए खुला है जो कानूनी रूप से इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से गुजरना चाहते हैं। ईरान की अकारण आक्रामकता, उत्पीड़न, धमकियों और मनमाने बयानों के बावजूद, अमेरिकी सेना नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए तैनात और पूरी तरह तैयार है। ईरान का इस जलडमरूमध्य पर कोई नियंत्रण नहीं है। यातायात सुचारू रूप से चल रहा है'। 
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अमेरिका-ईरान के बीच हालिया तनाव
क्या है तनाव की वजह?: यह बयान ईरान के उस दावे के बाद आया है जिसमें उसकी 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' ने इस रणनीतिक जलमार्ग को 'अगले आदेश तक बंद' करने का एलान किया था।
अमेरिका का रुख: अमेरिकी सेना ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है और किसी भी देश को इसे रोकने का हक नहीं है। अमेरिकी बल वैश्विक व्यापार और जहाजों की सुरक्षा के लिए वहां मुस्तैद हैं।

अमेरिका के दावे पर ईरान का पलटवार
वहीं, होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच जुबानी जंग और तीखी हो गई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड द्वारा इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग को खुला बताने और यातायात सामान्य होने के दावे को ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान ने दो- टूक कहा है कि यह रणनीतिक रास्ता फिलहाल बंद है और इस पर उसका पूरा नियंत्रण है।

ईरान की आधिकारिक समुद्री संस्था 'पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी' (पीजीएसए) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए अमेरिकी दावों को खारिज किया। पीजीएसए ने सभी को सूचित करते हुए कहा, 'क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य बलों की हालिया अवैध गतिविधियों के कारण, फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरना संभव नहीं है'। ईरान ने स्पष्ट किया है कि जब क्षेत्र में स्थिरता और शांति बहाल होगी, तभी जहाजों के आवेदनों की समीक्षा की जाएगी और तय शेड्यूल के अनुसार जरूरी ट्रांजिट परमिट जारी किए जाएंगे। संस्था ने चेतावनी दी है कि इस जलमार्ग से गुजरने के लिए ट्रांजिट परमिट प्राप्त करने का एकमात्र जरिया उनकी आधिकारिक वेबसाइट (http://PGSA.ir) है।
 

क्यों बढ़ा है दोनों देशों में तनाव?
इससे पहले शनिवार को ईरान की 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' ने इस जलमार्ग को अगले आदेश तक बंद करने का एलान किया था। ईरान का आरोप है कि अमेरिकी सेना इस क्षेत्र में गैर-कानूनी गतिविधियां कर रही है और विदेशी ताकतों का यह हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके जवाब में अमेरिका ने दावा किया था कि ईरान का इस स्ट्रेट पर कोई नियंत्रण नहीं है और अमेरिकी सेना वहां नौवहन की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए तैयार खड़ी है। लेकिन ईरान ने अब साफ कर दिया है कि वह अमेरिकी धमकियों के आगे झुकने वाला नहीं है और बिना उसकी इजाजत के कोई भी जहाज इस रास्ते का इस्तेमाल नहीं कर पाएगा।

ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों को बनाया निशाना
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने रविवार को कहा कि उसने अमेरिका के ईरान के दक्षिणी इलाकों पर हुए हमलों के जवाब में जॉर्डन, कतर और ओमान में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। आईआरजीसी ने अपने आधिकारिक समाचार मंच सेपा न्यूज पर जारी बयान में कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान के दक्षिणी तटीय इलाकों में कई सैन्य ठिकानों और संचार टावरों पर हवाई हमले किए। 

जवाबी कार्रवाई को लेकर ईरान का दावा
आईआरजीसी के मुताबिक, जवाबी कार्रवाई के पहले चरण में उसकी सेना ने जॉर्डन के प्रिंस हसन एयर बेस पर मौजूद अमेरिका के 'महत्वपूर्ण' सैन्य ढांचे और सुविधाओं पर हमला किया। उसका दावा है कि इस हमले में बेस का कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और एमक्यू-9 रीपर ड्रोन का हैंगर नष्ट कर दिया गया। दूसरे चरण में आईआरजीसी ने कहा कि उसने होर्मुज स्ट्रेट में एक 'उल्लंघन करने वाले' जहाज को रोका और कतर में मौजूद अमेरिकी अल उदैद एयर बेस पर हमला किया। उसके अनुसार, इस हमले में बेस का कमांड सेंटर और लड़ाकू विमानों की मरम्मत और रखरखाव से जुड़े केंद्र तबाह हो गए। तीसरे चरण में आईआरजीसी ने दावा किया कि ओमान के बंदरगाह शहर दुकम में अमेरिकी विमानवाहक पोतों के लॉजिस्टिक सपोर्ट सेंटर और ईंधन भरने वाले प्लेटफॉर्म पर 'भारी और अचानक' हमला किया गया, जिससे वे पूरी तरह नष्ट हो गए।
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कुवैत और बहरीन में भी हमले
ईरानी सेना ने यह भी कहा कि उसने रविवार तड़के कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सेना के उन ठिकानों और केंद्रों पर ड्रोन हमले किए, जिन्हें उसने 'आतंकवादी' ठिकाने बताया। उसका कहना है कि यह कार्रवाई अमेरिका की उसी दिन की 'आक्रामक कार्रवाई' के जवाब में की गई। ईरानी सेना के मुताबिक, कुवैत में अमेरिकी सेना के एक पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम, गोला-बारूद के भंडार और एक रडार साइट को उसके कामिकाजे ड्रोन ने निशाना बनाया। वहीं बहरीन में अमेरिकी सेना के संचार तंत्र और एक रडार साइट पर भी हमला किया गया। आईआरजीसी ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने दोबारा ईरान पर हमला किया, तो उसका जवाब इससे भी ज्यादा कड़ा होगा।
 
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