ख्यात भारतवंशी लेखक सलमान रुश्दी पर न्यूयॉर्क में हुए हमले में हाथ होने से ईरान ने इनकार किया है। तेहरान ने इस घटना में उसकी किसी भूमिका से साफ इनकार किया है।
रुश्दी (75) पर गत शुक्रवार को न्यूयॉर्क में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान एक युवक ने चाकू से हमला कर दिया था। इसमें वह गंभीर रूप से घायल हुए हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय ने आज पहली बार बयान जारी कर कहा कि इस घटना में उसकी कोई भूमिका नहीं है। रुश्दी का अमेरिका के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है।
रुश्दी की एक आंख जाने का खतरा
अमेरिका के न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम के दौरान चाकूबाजी के शिकार हुए सलमान रुश्दी की हालत गंभीर बनी हुई है। उनके करीबियों ने कहा है कि इस हमले में उन्हें काफी चोटें आई हैं। उनकी एक आंख भी जा सकती है। पुलिस ने रुश्दी पर हमला करने वाली की पहचान न्यू जर्सी के रहने वाला हादी मतार है। उसकी उम्र महज 24 साल है।
ईरान का बड़ा समर्थक है हमलावर, खोमेनी ने जारी किया था फतवा
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि मतार ईरान का बड़ा समर्थक है। उसके फेसबुक अकाउंट में भी ईरान के सुप्रीम लीडर रह चुके अयातुल्ला खोमेनी और मौजूदा सुप्रीम लीडर अयातोल्ला खमेनेई की तस्वीरें हैं। 1989 में खोमेनी ने रुश्दी की किताब 'द सैटेनिक वर्सेज' के प्रकाशन की निंदा करते हुए उनके खिलाफ फतवा जारी किया था।
अमेरिकी मीडिया समूह एनबीसी के मुताबिक, हादी मतार ने ईरान और ईरान के सुप्रीम लीडर की निजी सेना- रेवोल्यूशनरी गार्ड्स के समर्थन में भी कई पोस्ट्स किए हैं। उसने शिया कट्टरपंथ को भी बढ़ावा देने पर जोर दिया है। इसी रिपोर्ट में कहा गया है कि कार्यक्रम में मतार काले कपड़े और काला मास्क लगाकर पहुंचा था। प्रत्यक्षदर्शियों ने चैनल को बताया कि जब हमलावर स्टेज पर चढ़ा तो लोगों को लगा कि वह कोई स्टंट करने जा रहा है। लेकिन 20 सेकंड में ही यह साफ हो गया कि यह असल हमला है। इस घटना के दौरान कार्यक्रम का संचालन कर रहे हेनरी रीज को भी सिर पर चोटें आईं। बताया गया है कि हमलावर ने रीज को भी घायल कर दिया। वे रुश्दी के साथ अलग-अलग देशों से निकालने गए कलाकारों के शरण के विषय को लेकर बात करने वाले थे।
आजादी के समर्थक हैं रुश्दी : ब्लिंकन
अमेरिकी विदेश मंत्री एंटोनी ब्लिंकन ने रविवार को कहा कि सलमान रुश्दी ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धर्म की स्वतंत्रता और प्रेस की स्वतंत्रता के सार्वभौमिक अधिकारों के लिए लगातार आवाज उठाई है। अमेरिकी अधिकारियों ने रुश्दी पर हमले को लक्षित, बिना किसी उकसावे के और एक साजिश के तहत किया गया हमला बताया है। उन्होंने दावा किया कि ईरान के सरकारी संस्थानों ने भारतीय मूल के लेखक के खिलाफ काफी समय तक हिंसा भड़काई और सरकारी मीडिया ने भी हाल ही में उन पर हुए हमले की निंदा नहीं की।