पश्चिम एशिया में जारी युद्ध अब और जटिल होता जा रहा है। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के इस संघर्ष में शामिल होने से वैश्विक व्यापार, तेल सप्लाई और समुद्री सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है। ईरान समर्थित हूती समूह ने दावा किया है कि उन्होंने इस्राइल पर मिसाइल हमले किए हैं।
इस घटनाक्रम के साथ ही युद्ध को एक महीना पूरा हो चुका है और अब यह संघर्ष क्षेत्रीय से वैश्विक असर दिखाने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हूती विद्रोही फिर से रेड सी और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में जहाजों को निशाना बनाते हैं, तो दुनिया के करीब 12% व्यापार पर असर पड़ सकता है।
तेल और गैस सप्लाई पर असर
इस युद्ध के कारण पहले ही तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई प्रभावित हो चुकी है। उर्वरकों की कमी और हवाई यात्रा में बाधाएं भी सामने आई हैं। ईरान के होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण ने बाजारों में अस्थिरता बढ़ा दी है, जिससे कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।
अमेरिका और इस्राइल की सैन्य कार्रवाई जारी
अमेरिका और इस्राइल लगातार ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक 11,000 से अधिक हमले किए जा चुके हैं। वहीं, ईरान भी मिसाइल और ड्रोन के जरिए जवाबी कार्रवाई कर रहा है, जिससे खाड़ी देशों में भी सुरक्षा अलर्ट जारी है।
विश्वविद्यालयों को भी निशाना बनाने की धमकी
तनाव के बीच ईरान ने पहली बार क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी और इस्राइली विश्वविद्यालयों को भी निशाना बनाने की चेतावनी दी है। इससे स्थिति और गंभीर हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हूती विद्रोही फिर से जहाजों पर हमले बढ़ाते हैं, तो इससे न केवल तेल कीमतें बढ़ेंगी, बल्कि वैश्विक समुद्री सुरक्षा भी अस्थिर हो जाएगी।
बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य, जो स्वेज नहर के लिए अहम रास्ता है, इस समय सबसे संवेदनशील क्षेत्र बना हुआ है। इस संघर्ष में अब तक 3,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। गाजा, लेबनान और ईरान के कई हिस्सों में हमले जारी हैं।
अन्य वीडियो:-