Israel vs Iran: ईरान की भयानक मिसाइलों के आगे आयरन डोम क्यों नाकाम, कौन-सा डिफेंस सिस्टम बना इस्राइल की ढाल?
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sun, 15 Jun 2025 08:22 AM IST
सार
Israel vs Iran Conflict News : इस्राइल का एयर डिफेंस सिस्टम किन-किन हिस्सों को मिलाकर बना है? यह कितना ताकतवर है? जिस आयरन डोम की लगातार चर्चा होती है, वह इस बार मिसाइलों को रोकने में सफल क्यों नहीं हुआ? इसके अलावा इस्राइल की पूरी रक्षा प्रणाली को क्या खतरे हैं और उसके मित्र देश कैसे इसमें मदद कर रहे हैं? आइये जानते हैं...
इस्राइल की तरफ से शुक्रवार सुबह ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर जबरदस्त हमले किए गए। इस्राइली एयरस्ट्राइक से ईरान में सैन्य अफसरों और वैज्ञानिकों समेत करीब 50 लोगों के मारे जाने की बात सामने आई है। इसके जवाब में ईरान ने भी शनिवार आते-आते इस्राइल पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन्स की बारिश कर दी। इस्राइली सेना ने इन हमलों में अपने तीन नागरिकों के मारे जाने की पुष्टि की है।
ईरान के इस हमले के बाद इस्राइल में तेल अवीव और येरुशलम में कई जगह बड़े धमाकों की खबरें आई हैं। बताया जा रहा है कि इस्राइल का आयरन डोम सिस्टम ईरान की कई बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने में नाकाम साबित हुआ। इसी के चलते उसके कुछ क्षेत्रों को नुकसान पहुंचा है। हालांकि, अगर इस्राइल की हवाई हमलों से सुरक्षा करने वाली रक्षा प्रणाली पर गौर किया जाए तो सामने आता है कि आयरन डोम सिर्फ उसके एयर डिफेंस सिस्टम का एक हिस्सा है। इस्राइल की सुरक्षा आयरन डोम के अलावा उसकी 'ऐरो'और 'डेविड्स स्लिंग' नाम की रक्षा प्रणालियां करती हैं।
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इस्राइल की रक्षा प्रणालियां।
- फोटो : अमर उजाला
इस्राइल की तरफ से शुक्रवार सुबह ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर जबरदस्त हमले किए गए। इस्राइली एयरस्ट्राइक से ईरान में सैन्य अफसरों और वैज्ञानिकों समेत करीब 50 लोगों के मारे जाने की बात सामने आई है। इसके जवाब में ईरान ने भी शनिवार आते-आते इस्राइल पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन्स की बारिश कर दी। इस्राइली सेना ने इन हमलों में अपने तीन नागरिकों के मारे जाने की पुष्टि की है।
ईरान के इस हमले के बाद इस्राइल में तेल अवीव और येरुशलम में कई जगह बड़े धमाकों की खबरें आई हैं। बताया जा रहा है कि इस्राइल का आयरन डोम सिस्टम ईरान की कई बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने में नाकाम साबित हुआ। इसी के चलते उसके कुछ क्षेत्रों को नुकसान पहुंचा है। हालांकि, अगर इस्राइल की हवाई हमलों से सुरक्षा करने वाली रक्षा प्रणाली पर गौर किया जाए तो सामने आता है कि आयरन डोम सिर्फ उसके एयर डिफेंस सिस्टम का एक हिस्सा है। इस्राइल की सुरक्षा आयरन डोम के अलावा उसकी 'ऐरो'और 'डेविड्स स्लिंग' नाम की रक्षा प्रणालियां करती हैं।
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर इस्राइल का एयर डिफेंस सिस्टम किन-किन हिस्सों को मिलाकर बना है? यह कितना ताकतवर है? जिस आयरन डोम की लगातार चर्चा होती है, वह इस बार मिसाइलों को रोकने में सफल क्यों नहीं हुआ? इसके अलावा इस्राइल की पूरी रक्षा प्रणाली को क्या खतरे हैं और उसके मित्र देश कैसे इसमें मदद कर रहे हैं? आइये जानते हैं...
किन डिफेंस सिस्टम्स को मिलाकर बनी है इस्राइल की एकीकृत हवाई रक्षा प्रणाली?
इस्राइल हवाई हमलों से अपनी सुरक्षा के लिए सिर्फ आयरन डोम पर ही निर्भर नहीं है। दरअसल, आधुनिक समय में इस्राइल पर अधिकतर हमले फलस्तीन में स्थित गाजा पट्टी से ही हुए हैं। इन्हें हमास के लड़ाके समय-समय पर अंजाम देते आए हैं। ऐसे में इस्राइल का आयरन डोम सिस्टम इन्हें रोककर लगातार पूरी दुनिया में सुर्खियां बटोरता रहा है। हालांकि, यह आयरन डोम इस्राइल की रक्षा प्रणाली का सिर्फ एक हिस्सा है। इसके अलावा इस्राइली सेना (आईडीएफ) कुछ और रक्षा प्रणालियों का इस्तेमाल भी दुश्मन के हमलों को रोकने के लिए करती है। यह सभी सिस्टम मिलकर इस्राइल की सुरक्षा करते हैं।
1. क्या है आयरन डोम सिस्टम?
इस्राइल की रक्षा में सबसे बड़ा पहरा आयरन डोम को ही माना जाता है। जब कोई रॉकेट सीमा में प्रवेश करता है, तो आयरन डोम के रडार उसकी पहचान करते हैं और कंप्यूटर सिस्टम तय करता है कि वह रॉकेट आबादी वाले क्षेत्र में गिरेगा या नहीं। अगर हां, तो इंटरसेप्टर मिसाइल तुरंत दागी जाती है और हवा में ही उसे नष्ट कर देती है। ईरान के हमलों से पहले गाजा से हमास की तरफ से दागे गए हजारों रॉकेट को आयरन डोम ने सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया था।
हालांकि, आयरन डोम छोटी दूरी तक मार करने वाले रॉकेट्स और आर्टिलरी (तोप के हमलों) को खत्म करने के लिए ही बनाया गया। इसका मकसद फलस्तीन से होने वाले हमलों को रोकना ही रखा गया था। इसके चलते लंबी दूरी से आ रही तेज रफ्तार मिसाइलें, ड्रोन या एयरक्राफ्ट कई बार इसके दायरे में आने से बच जाते हैं। इतना ही नहीं कई बार जबरदस्त और बार-बार हमलों की स्थिति में आयरन डोम सिस्टम के रॉकेट खत्म भी हो सकते हैं।
2. क्या है डेविड्स स्लिंग सिस्टम?
डेविड्स स्लिंग इस्राइल का एक जगह पर स्थापित हथियार है, जो कि छोटी और मध्यम दूरी तक मार करने वाले रॉकेट, मिसाइलों, ड्रोन्स और अन्य हथियारों को मार सकता है। इसकी रेंज करीब 300 किलोमीटर तक है। आयरन डोम सिस्टम की तरह ही यह हिट-टू-किल हथियार यानी देखते ही मार गिराने वाला सिस्टम है। इससे निकले रॉकेट किसी भी निशाने से टकराकर उसे ध्वस्त कर देते हैं।
एक तरह से देखा जाए तो यह इस्राइल के घातक आयरन डोम और लंबी दूरी तक मार करने वाले ऐरो मिसाइल सिस्टम के बीच की खाली जगह को भरता है। यह प्रणाली बहुस्तरीय इस्राइली वायु रक्षा प्रणाली का हिस्सा है।
3. क्या है ऐरो डिफेंस सिस्टम?
इस्राइल के एकीकृत डिफेंस सिस्टम से जुड़ी तीसरी अहम रक्षा प्रणाली है 'ऐरो'। मौजूदा समय में इस्राइल इसके दूसरे और तीसरे वर्जन को संचालित करता है। यह सिस्टम पूरी तरह से रक्षा के लिए बनाया गया है और लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों (सुपरसॉनिक-हाइपरसॉनिक) को तबाह करने में कारगर है।
ऐरो-2
ऐरो-2 और ऐरो-3 के बीच मुख्य अंतर दोनों की मारक क्षमता का है। ऐरो-2 वायुमंडल के अंदर रहते हुए छोटी और मध्यम दूरी तक मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को 50 किलोमीटर की ऊंचाई में जाकर ही मार गिराने की क्षमता रखता है। यह 500 किलोमीटर दूर मौजूद मिसाइलों को भी पहचान लेता है और काफी करीब आने पर (100 किलोमीटर तक में) दुश्मन की मिसाइल को तबाह कर देता है। ऐरो-2 की मिसाइलें आवाज की गति से नौ गुना तेज रफ्तार से बढ़ती हैं और यह सिस्टम एक साथ 14 लक्ष्यों को भेद सकता है।
तकनीक के अनुसार, एरो-2 एक ब्लास्ट फ्रैगमेंटेशन वारहेड का उपयोग करता है जो लक्ष्य के पास जाकर विस्फोट करता है। ऐरो-2 को पहली बार इस्राइल ने किसी संघर्ष में 2017 में इस्तेमाल किया था। तब सीरिया की एक जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल को मार गिराया गया था।
ऐरो-3
ऐरो-3 वायुमंडल के बाहर, यानी अंतरिक्ष की सीमा के पास जाकर लंबी दूरी तक मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट करता है। यानी दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइल जब अपनी शीर्षतम ऊंचाई पर होती हैं, तब ही इन्हें तबाह कर दिया जाता है। यानी एरो-3 लंबी दूरी की और इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों (आईसीबीएम) को निष्क्रिय करने में सक्षम है। इसकी रेंज 2400 किलोमीटर तक दुश्मन के निशानों को भेदने की है।
एरो-3 में काइनेटिक किल तकनीक होती है जिसमें कोई वॉरहेड नहीं होता और मिसाइल केवल टक्कर से दुश्मन मिसाइल को नष्ट कर देती है। इसे पहली बार संघर्ष में 2023 में उतारा गया, जब यमन से हूती विद्रोहियों ने दक्षिण इस्राइल में स्थित एइलाट शहर को निशाना बनाने की कोशिश की थी।
4. क्या है आयरन बीम डिफेंस सिस्टम?
आयरन बीम डिफेंस सिस्टम के तहत इस्राइल ने एक ऐसी ताकतवर लेजर विकसित की है, जो कि रॉकेट, ड्रोन और टैंक-रोधी मिसाइलों को खत्म कर सकती है। यह रोशनी की ऊर्जा की अवधारणा पर काम करती है। इसके तहत लाइट की इंटेसिटी इतनी बढ़ा दी जाती है कि यह पदार्थों को काटा जा सके। इसे पहली बार तब तैनात किया गया था, जब हमास ने 7 अक्तूबर 2023 को दक्षिणी इस्राइल पर हमला बोला था और इस्राइली सेना ने गाजा पर पूरी तरह धावा बोल दिया था।
इस्राइल की रक्षा प्रणालियों को ईरान से किस तरह का खतरा?
इस्राइल को सबसे बड़ा खतरा ईरान की जबरदस्त रूप से खतरनाक बैलिस्टिक मिसाइलों से है, जो कि ताकतवर होने के साथ आवाज की गति से कई गुना तेजी के साथ उड़ान भरती हैं और अंतरिक्ष के अंत तक जाकर दुश्मन देश को निशाना बनाती हैं। यह मिसाइलें कुछ मिनटों के अंदर ही ईरान से इस्राइल के बीच की हजारों किलोमीटर की दूरी को पार कर सकती हैं
इस्राइल की चिंता यह भी है कि ऐरो-3 जैसे मिसाइल-रोधी सिस्टम में इंटरसेप्टर्स लगाए जाने की एक सीमा होती है और यह काफी महंगे होते हैं। इतना ही नहीं यह बैलिस्टिक मिसाइल के मुकाबले हमेशा सटीक नहीं होते। ऐसे में इनके दुश्मन के हमलों को नाकाम करने की क्षमता अचूक नहीं होती।
बीते साल जब ईरान ने इस्राइल पर हमला किया और उसकी 30 बैलिस्टिक मिसाइल दक्षिण इस्राइल के सैन्य बेसों के करीब गिरीं थीं, तब अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित मिडलबरी इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के एक विश्लेषण में सामने आया था कि इस्राइल के पास ऐरो-3 के इंटरसेप्टर्स की काफी कमी है। इतना ही नहीं पिछले महीने ही हूतियों की तरफ से दागी गई एक मिसाइल इस्राइली एयर डिफेंस और अमेरिकी रक्षा प्रणालियों को चकमा देते हुए इस्राइल के तेल अवीव में बेन गुरियोन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को निशाना बनाने में सफल रही थी।
इस्राइल के साथ एक समस्या और भी है। यह परेशानी है सतह के करीब और धीरे उड़ने वाले ड्रोन्स, जो कि इस्राइली एयर डिफेंस सिस्टम के रडार से बच निकलते हैं। ऐसे में इस्राइल के लिए इन्हें ट्रैक करना और खत्म करना काफी मुश्किल हो जाता है। बीते वर्षों में इस्राइल ने ऐसे ड्रोन्स को खत्म करने के लिए लड़ाकू विमानों को भी उतारा है।