फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अफगानिस्तान: अंतरराष्ट्रीय मान्यता पाने के लिए बेसब्र तालिबान को एक और झटका

Tue, 11 Jan 2022 06:55 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल

सार

पिछले अगस्त में काबुल पर कब्जा करने के बाद से तालिबान ऐसी अंतरराष्ट्रीय मान्यता पाने की कोशिशों में जुटा रहा है। लेकिन उसे अब तक कई उन देशों ने भी मान्यता नहीं दी है, जिन्होंने औपचारिक रूप से उससे हमदर्दी जताई है। इन देशों में रूस और चीन भी शामिल हैं। पाकिस्तान ने भी अभी तक उसे मान्यता नहीं दी है....
विज्ञापन
मुल्ला बरादर - फोटो : Amar Ujala (File Photo)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

आधिकारिक सरकार के रूप में मान्यता पाने की तालिबान की उम्मीदों को एक और झटका लगा है। ईरान ने भी साफ कर दिया है कि तुरंत उसका काबुल स्थित तालिबान प्रशासन को मान्यता देने का कोई इरादा नहीं है। इस सिलसिले में बातचीत के लिए तालिबान का एक दल ईरान की राजधानी तेहरान गया था। लेकिन वह मान्यता देने के लिए ईरान सरकार को राजी करने में नाकाम रहा।

चीन, रूस और पाक ने भी नहीं दी मान्यता

पिछले अगस्त में काबुल पर कब्जा करने के बाद से तालिबान ऐसी अंतरराष्ट्रीय मान्यता पाने की कोशिशों में जुटा रहा है। लेकिन उसे अब तक कई उन देशों ने भी मान्यता नहीं दी है, जिन्होंने औपचारिक रूप से उससे हमदर्दी जताई है। इन देशों में रूस और चीन भी शामिल हैं। पाकिस्तान ने भी अभी तक उसे मान्यता नहीं दी है, जबकि आम धारणा रही है कि तालिबान की पीठ पर उसका हाथ है।

विज्ञापन


ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि तालिबान के साथ उसकी ताजा बातचीत सकारात्मक रही। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा- ‘लेकिन अभी तक ईरान तालिबान को आधिकारिक रूप से मान्यता देने के मुकाम तक नहीं पहुंचा है।’ बताया जाता है कि तेहरान में हुई वार्ता के दौरान ईरान सरकार ने अफगानिस्तान की मौजूदा स्थिति पर गंभीर चिंता जताई। उसने साफ किया कि उसने अपनी इन चिंताओं को बताने के लिए तालिबान के प्रतिनिधिमंडल को तेहरान आमंत्रित किया था।

ईरान ने की अफगान लोगों की तारीफ

तेहरान गए तालिबान के दल का नेतृत्व उसके विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी ने किया। वहां इस दल की मुलाकात ईरान के विदेश मंत्री हुसैन अमीरअब्दुल्लाहियान से हुई। पिछले अगस्त के बाद तालिबान की इस स्तर पर यह पहली तेहरान यात्रा थी। काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद से ईरान का यही रुख रहा है कि वह तालिबान सरकार के ‘समावेशी’ बन जाने के बाद ही वह उसको मान्यता देगा। समावेशी से ईरान का मतलब अफगानिस्तान में मौजूद सभी समुदायों को नुमाइंदगी मिलने से है।

पर्यवेक्षकों के मुताबिक काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद से ईरान ने उससे संपर्क बनाए रखा है। दूतों के स्तर पर उससे बातचीत चलती रही है। इस दौरान राजनीतिक, आर्थिक, और शरणार्थियों से जुड़ी समस्याओं पर बातचीत हुई है। तालिबान प्रतिनिधिमंडल की ताजा यात्रा के दौरान ईरान ने उसे आश्वासन दिया कि वह मानवीय मदद भेजने के अपने वादे पर कायम है। ईरान ने ‘अफगानिस्तान के लोगों के साहस’ की तारीफ की और कहा कि उन्होंने यह दिखा दिया कि दुनिया की कोई का ताकत उनके देश पर कब्जा करके उन पर राज नहीं कर सकती। उधर मुत्ताकी ने ईरान को भरोसा दिया कि वह अपने किसी पड़ोसी देश के खिलाफ नहीं है। इस बीच दोनों पक्ष बातचीत जारी रखने पर सहमत हुए।

विज्ञापन


विश्लेषकों का कहना है कि तालिबान जल्द से जल्द अंतरराष्ट्रीय मान्यता चाहता है। इसके बिना वह एक आम सरकार के रूप में काम नहीं कर पा रहा है। बताया जाता है कि इसी वजह से इस मामले पाकिस्तान के रुख से वह नाराज है।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें