ईरान की मिसाइल क्षमता को लेकर सामने आई नई जानकारी ने वैश्विक सुरक्षा समीकरण को हिला दिया है। 4000 किलोमीटर तक मार करने वाली क्षमता ने यह साफ कर दिया है कि अब यह संघर्ष सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहा। इस एक घटनाक्रम ने दुनिया के बड़े हिस्से, खासकर यूरोप को भी संभावित खतरे के दायरे में ला दिया है।
खोर्रमशहर-4 कितनी खतरनाक?
क्यों अहम है डिएगो गार्सिया बेस?
डिएगो गार्सिया अमेरिका और ब्रिटेन का एक अहम सैन्य ठिकाना है, जो हिंद महासागर में स्थित है। यह बेस लंबे समय से अफगानिस्तान, इराक और पश्चिम एशिया में सैन्य अभियानों के लिए इस्तेमाल होता रहा है। यहां से भारी बमवर्षक विमान और सैन्य उपकरण तेजी से तैनात किए जा सकते हैं।
दूर होते हुए भी कैसे बना निशाना?
इस बेस की सबसे बड़ी ताकत इसकी दूरी थी, क्योंकि यह सामान्य युद्ध क्षेत्रों से काफी दूर है। लेकिन ईरान द्वारा इसे निशाना बनाने की कोशिश ने यह साबित कर दिया कि अब कोई भी ठिकाना पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। इससे साफ संकेत मिला है कि ईरान दूर-दराज के रणनीतिक ठिकानों को भी निशाना बना सकता है।
मिसाइल डिफेंस सिस्टम की परीक्षा
इस हमले के दौरान अमेरिकी नौसेना ने एसएम-3 मिसाइल डिफेंस सिस्टम से इंटरसेप्शन की कोशिश की। यह सिस्टम सीधे टकराकर मिसाइल को नष्ट करता है। हालांकि इस घटना ने दिखाया कि आधुनिक और उन्नत मिसाइलों को रोकना अभी भी आसान नहीं है और सुरक्षा तंत्र के सामने बड़ी चुनौती है।