ताइवान-चीन के साथ चल रहे तलाव को देखते हुए इंटरपोल में शामिल होना चाह रहा है। इस बाबत हाल के दिनों में उसने भारत से मदद की गुहार भी लगाई थी। भारत कल से होने वाली इंटरपोल की 90वीं आमसभा की मेजबानी करेगा। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय पुलिस निकाय के महासचिव जुर्गन स्टॉक 18 अक्टूबर को भारत द्वारा आयोजित 90वीं इंटरपोल महासभा में भाग लेने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में है। ताइवान को इंटरपोल में शामिल किए जाने को लेकर उन्होंने स्थिति साफ की है। उन्होंने कहा है कि इंटरपोल ताइवान को चीन के हिस्से के रूप में मानता है और चीन पहले से ही इंटरपोल का सदस्य है, ऐसे में महासभा में ताइवान को पर्यवेक्षक का दर्जा नहीं दिया जा सकता।
इंटरपोल के महासचिव जुर्गन स्टॉक ने कहा कि इंटरपोल के माध्यम से सूचनाओं का आदान-प्रदान करने के लिए इंटरपोल राष्ट्रीय केंद्र ब्यूरो और चीन-ताइवान पुलिस प्रशासन को सक्षम करने के लिए 1984 के बाद व्यवस्था की गई थी। उन्होंने आगे कहा कि 1984 में इंटरपोल महासभा ने चीन के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना को मान्यता दी। इंटरपोल ताइवान को चीन के हिस्से के रूप में मान्यता देता है और चीन इंटरपोल का सदस्य है। ऐसे में यह इंटरपोल महासभा में ताइवान को पर्यवेक्षक का दर्जा नहीं दे सकता।
गौरतलब है कि वर्तमान में ताइवान इंटरपोल का सदस्य नहीं है, इसलिए वो आमसभा में अपना प्रतिनिधिमंडल नहीं भेज सकता। भारत अक्टूबर में होने वाली इंटरपोल की 90वीं आमसभा की मेजबानी करेगा।इसको देखते हुए ताइवान भारत से मदद मांग रहा है। यह भी आवश्यक है कि 1984 तक, ताइवान इंटरपोल महासभा का हिस्सा था लेकिन चीन ने इस द्वीप को बाहर कर दिया था।
दिल्ली में आयोजित होगी इंटरपोल महासभा
स्टॉक 18 अक्टूबर को भारत द्वारा आयोजित 90वीं इंटरपोल महासभा में भाग लेने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में है जिसमें वित्तीय अपराधों और भ्रष्टाचार के प्रमुख पहलुओं पर चर्चा की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, पहले ही 1997 में महासभा का आयोजन करने के बाद भारत को भारतीय स्वतंत्रता की 75 वीं वर्षगांठ समारोह में कार्यक्रम आयोजित करने के लिए वोट के जरिए आउट-ऑफ-टर्न मौका दिया गया है। गृह मंत्री अमित शाह ने इस संबंध में स्टॉक को एक प्रस्ताव दिया था जिन्होंने 2019 में अपनी भारत यात्रा के दौरान मंत्री से मुलाकात की थी।
उन्होंने कहा कि महासभा इंटरपोल की सर्वोच्च निकाय है, जिसकी सालाना बैठक होती है और प्रत्येक सदस्य देश का प्रतिनिधित्व एक या कई प्रतिनिधियों द्वारा किया जाता है। इसमें आम तौर पर मंत्री, पुलिस प्रमुख, उनके इंटरपोल राष्ट्रीय केंद्रीय ब्यूरो के प्रमुख और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी होते हैं। स्टॉक ने यह भी कहा कि कई देश अपने खुद के नागरिकों का प्रत्यर्पण नहीं करते हैं और चूंकि रेड नोटिस का उद्देश्य किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण का अनुरोध करना होता है, अधिकारी आमतौर पर ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं करते हैं। हालांकि, देश के राष्ट्रीय कानून और अनुरोध करने वाले देश के साथ इसके समझौतों के आधार पर रेड नोटिस के आधार पर व्यक्ति की मौजूदगी की जगह स्थापित होने के बाद सहयोग हो सकता है।