रोहिंग्या समुदाय के लिए इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (आईसीजे) ने एक राहत भरा फैसला सुनाया है। आईसीजे ने म्यांमार को निर्देश दिया है कि वह किसी भी हालत में रोहिंग्या मुसलमानों के सुरक्षा की गारंटी दे।
कोर्ट ने म्यांमार सरकार से कहा है कि वह रोहिंग्या समुदाय को सैनिको के अमानवीय जुल्म से बचाने और जबरन अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर किए जाने जैसी घटनाओं को तुरंत रोके। रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ बर्बर जुल्म की कार्रवाइयों को नरसंहार तक कहा जाता रहा है और अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट ने इसे बेहद गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने म्यांमार से रोजाना इस बारे में रिपोर्ट भी मांगी है।
रोहिंग्या समुदाय को लेकर आईसीजे के इस ऐतिहासिक कदम के बाद यह कहा जा रहा है कि कोर्ट के पास अपने फैसले को लागू करवाने का कोई तरीका नहीं है। मगर ऐसे में संयुक्त राष्ट्र का कोई सदस्य सुरक्षा परिषद से कोर्ट के फैसले को लागू करवाने के लिए निगरानी रखने को कह सकता है।
अफ्रीकी देश गांबिया ने 57 देशों के इस्लामिक सहयोग संगठन की तरफ से आईसीजे में रोहिंग्या समुदाय पर म्यामांर में हो रहे जुल्म को लेकर अपील की थी। गांबिया के कानूनी विशेषज्ञों ने आईसीजे में यह मामला नवंबर में रखा था और कोर्ट से दखल देने की अपील की थी।
आईसीजे में पिछले महीने तीन दिनों तक इस मामले में सुनवाई चली थी। गांबिया ने कोर्ट से म्यांमार को तत्काल यह आदेश देने की मांग की थी कि वह रोहिंग्या लोगों की हत्या करना, महिलाओं के साथ बलात्कार और अमानवीय उत्पीड़न की कार्रवाई करना और उनके खिलाफ नफरत फैलाकर उन्हें घर छोड़ने के लिए मजबूर करना बंद करे।
सोमालिया के जज अब्दुल कवि अहमद यूसुफ की अगुवाई में हुई इस मामले की सुनवाई करते हुए आईसीजे ने म्यांमार से अगले चार महीनों में रिपोर्ट सौंपने को कहा है कि इस बारे में क्या कदम उठाए गए। साथ ही हर छह महीने पर म्यांमार अपनी रिपोर्ट तब तक सौंपता रहेगा जब तक यह मामला पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता।
इसे रोहिंग्या समुदाय और गांबिया के लिए एक बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है। जिस तरह तमाम देशों में रोहिंग्या समुदाय और खासकर रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर धारणाएं फैलाई जा रही हैं, और उन पर अमानवीय जुल्म हो रहे हैं। उसे देखते हुए आईसीजे के इस फैसले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला माना जा रहा है।