इसी वर्ष मार्च की शुरुआत में जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वेनेजुएला में सैन्य हस्तक्षेप और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को सत्ता से बेदखल करने की अपनी कामयाबी का जश्न मना रहे थे, तब व्हाइट हाउस के रूजवेल्ट रूम में एक बेहद गोपनीय बैठक हुई। इसमें अमेरिकी इंटीरियर सेक्रेटरी डग बर्गम के साथ दुनिया की सबसे बड़ी कमोडिटी ट्रेडिंग कंपनियों में शुमार ट्रेफिगुरा के सीईओ रिचर्ड होल्टम पहुंचे थे। उनके हाथ में एक अजीबो-गरीब तोहफा था, वेनेजुएला से लाई गई सोने की 10 चमचमाती सिल्लियां।
वेनेजुएला का मुख्य खनन हब अल काल्लाओ में होता हो जो दुनिया के सबसे हिंसक और भ्रष्ट इलाकों में गिना जाता है। खनन कंपनियों के दफ्तरों में आज भी दर्जनों सैन्य अधिकारी तैनात हैं। जब मजदूर अपने हक की मांग करते हैं, तो उन्हें आतंकवाद के झूठे मामलों में फंसाने और नौकरी से निकालने की धमकियां दी जाती हैं।
खदानों में काम करने वाली स्थानीय मजदूरों की सहकारी कमेटियों के मुखियाओं ने खुलासा किया कि हर महीने निकाले जाने वाले कुल सोने का 20% हिस्सा सीधे स्थानीय अंडरवर्ल्ड गैंग ट्रेन डी गुआयाना को जाता है। इलाके में इस रंगदारी को बाकायदा अल सिस्तेमा कहा जाता है।
ट्रेफिगुरा ने सरकारी कंपनी मिनरवेन के साथ साल भर का एग्रीमेंट किया, जिसके तहत हर महीने करीब 400 किलोग्राम सोना अमेरिका ले जाया जाने लगा। लेकिन अंतरराष्ट्रीय मानकों और कानूनी दायित्वों के डर से यह पूरी डील अधर में लटक गई है। ट्रेफिगुरा के बाद अमेरिकी प्राइवेट इक्विटी फर्म हीनी कैपिटल और कमोडिटी दिग्गज मर्कुरिया ने खुली खदानों से सालाना 2.2 बिलियन डॉलर (करीब 20,900 करोड़ रुपये) का खनिज निर्यात करने का नया सौदा किया है, जो पर्यावरण को और तबाह करने और माफिया सिंडिकेट को बढ़ावा देने का नया जरिया बन सकता है।
वैसे तो नियमों के तहत यह प्रमाणित होना जरूरी था कि सोना अपराध, मानवाधिकार हनन या पर्यावरण विनाश से मुक्त है। लेकिन रिस्क कंसल्टेंट्स के खदानों पर पहुंचने से पहले ही सोने से भरे चार्टर्ड विमान अमेरिका रवाना कर दिए गए।
n वाशिंगटन स्थित एंटी-करप्शन संगठन फैक्ट कोएलिशन की जूलिया यानसुरा के मुताबिक, 90 फीसदी सोना आपराधिक गतिविधियों से जुड़ा है। नतीजतन, 100 मिलियन डॉलर का सोना आज अमेरिकी वेयरहाउसों में बिना रिफाइन अटका पड़ा है।