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अंतरराष्ट्रीय मामला: मादुरो को हटाते ही वेनेजुएला ट्रंप के लिए सोने की खान, 20% कट से स्थानीय गैंग्स की भी मौज

Tue, 29 Sep 2026 08:43 AM IST
ज्योति भास्कर अनातोली कुरमानाएव, टायलर पेजर,  रेबेका आर. रुइज (द न्यूयॉर्क टाइम्स)
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और सैन्य हिरासत में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो - फोटो : ANI
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इसी वर्ष मार्च की शुरुआत में जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वेनेजुएला में सैन्य हस्तक्षेप और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को सत्ता से बेदखल करने की अपनी कामयाबी का जश्न मना रहे थे, तब व्हाइट हाउस के रूजवेल्ट रूम में एक बेहद गोपनीय बैठक हुई। इसमें अमेरिकी इंटीरियर सेक्रेटरी डग बर्गम के साथ दुनिया की सबसे बड़ी कमोडिटी ट्रेडिंग कंपनियों में शुमार ट्रेफिगुरा के सीईओ रिचर्ड होल्टम पहुंचे थे। उनके हाथ में एक अजीबो-गरीब तोहफा था, वेनेजुएला से लाई गई सोने की 10 चमचमाती सिल्लियां।

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ट्रंप ने कभी यह कहकर इस सोने को प्रतिबंधित कर दिया था कि यह पर्यावरण को जहरीला बनाता है, लोगों का खून चूसता है और अपराधियों व भ्रष्ट सैन्य अफसरों की जेब भरता है। लेकिन अब मादुरो के हटते ही यह अमेरिका की नई विदेश नीति का सबसे बड़ा खजाना बन गया। उसी दिन ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला की सरकारी खनन कंपनी मिनरवेन (जिसे अमेरिका खुद कभी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा घोषित कर चुका था) से सोना आयात करने की विशेष छूट दे दी। लेकिन ट्रंप के इस गोल्ड रश के पीछे खौफनाक दलदल है। अमेरिकी कंपनियों द्वारा निकाला जा रहा यह सोना उन खदानों से आ रहा है जो वेनेजुएला के कुख्यात हिंसक गिरोह ट्रेन डी गुआयाना के रहमोकरम पर चलती हैं। इसके पूरे खेल में स्थानीय गैंग्स की मौज हो गई है जिन्हें 20% तक कट मनी (रंगदारी) मिल रही है।

हक की बात करने वाले मजदूरों को धमकी

वेनेजुएला का मुख्य खनन हब अल काल्लाओ में होता हो जो दुनिया के सबसे हिंसक और भ्रष्ट इलाकों में गिना जाता है। खनन कंपनियों के दफ्तरों में आज भी दर्जनों सैन्य अधिकारी तैनात हैं। जब मजदूर अपने हक की मांग करते हैं, तो उन्हें आतंकवाद के झूठे मामलों में फंसाने और नौकरी से निकालने की धमकियां दी जाती हैं।

अल सिस्तेमा के बिना अमेरिका नहीं पहुंचती खेप

खदानों में काम करने वाली स्थानीय मजदूरों की सहकारी कमेटियों के मुखियाओं ने खुलासा किया कि हर महीने निकाले जाने वाले कुल सोने का 20% हिस्सा सीधे स्थानीय अंडरवर्ल्ड गैंग ट्रेन डी गुआयाना को जाता है। इलाके में इस रंगदारी को बाकायदा अल सिस्तेमा कहा जाता है।

  • अवैध ब्रिगेड से जुटाया गया सोना सरकारी कंपनी मिनरवेन के पास पहुंचता है, जिसे ट्रेफिगुरा को बेचे जाने वाले सोने के साथ ही एक ही भट्टी में पिघला दिया जाता है। यानी अमेरिकी विमानों से वाशिंगटन पहुंच रहे सोने में सीधे तौर पर हिंसक गैंगस्टर की संलिप्तता होती है।

अमेरिकी कंपनियां खदानें हथियाने में जुटीं

ट्रेफिगुरा ने सरकारी कंपनी मिनरवेन के साथ साल भर का एग्रीमेंट किया, जिसके तहत हर महीने करीब 400 किलोग्राम सोना अमेरिका ले जाया जाने लगा। लेकिन अंतरराष्ट्रीय मानकों और कानूनी दायित्वों के डर से यह पूरी डील अधर में लटक गई है। ट्रेफिगुरा के बाद अमेरिकी प्राइवेट इक्विटी फर्म हीनी कैपिटल और कमोडिटी दिग्गज मर्कुरिया ने खुली खदानों से सालाना 2.2 बिलियन डॉलर (करीब 20,900 करोड़ रुपये) का खनिज निर्यात करने का नया सौदा किया है, जो पर्यावरण को और तबाह करने और माफिया सिंडिकेट को बढ़ावा देने का नया जरिया बन सकता है।

नियम ताक पर रखकर भेज दी गई खेप

वैसे तो नियमों के तहत यह प्रमाणित होना जरूरी था कि सोना अपराध, मानवाधिकार हनन या पर्यावरण विनाश से मुक्त है। लेकिन रिस्क कंसल्टेंट्स के खदानों पर पहुंचने से पहले ही सोने से भरे चार्टर्ड विमान अमेरिका रवाना कर दिए गए।
n वाशिंगटन स्थित एंटी-करप्शन संगठन फैक्ट कोएलिशन की जूलिया यानसुरा के मुताबिक, 90 फीसदी सोना आपराधिक गतिविधियों से जुड़ा है। नतीजतन, 100 मिलियन डॉलर का सोना आज अमेरिकी वेयरहाउसों में बिना रिफाइन अटका पड़ा है।

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कैसे वेनेजुएला की अकूत संपदा कब्जा रहे ट्रंप

  • मादुरो की गिरफ्तारी के तुरंत बाद कच्चे तेल के निर्यात पर नियंत्रण किया गया। प्रतिबंधों को दरकिनार कर पसंदीदा अमेरिकी कंपनियों को गोपनीय परमिट दिए गए। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के भाव रिकॉर्ड ऊंचाई पर थे, तब सोने की खदानें खोली गईं।
  • अल चोको खदान में प्रोसेसिंग प्लांट बना रही ईरानी कंपनी एस्पादाना को खदेड़ा गया। ईरानी मशीनें सीज कर अमेरिकी प्राइवेट इक्विटी फंड हीनी कैपिटल को खदान सौंपी गई।
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