पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता कराने की कोशिश में घरेलू मोर्चे पर घिरता जा रहा है। दरअसल खुफिया रिपोर्ट में पता चला है कि खूंखार आतंकी संगठन अल-कायदा, पाकिस्तान में अशांति भड़काना चाहता है और उसने इसकी कोशिशें भी शुरू कर दी हैं। खुफिया एजेंसियों के अनुसार, इस बात के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं। अल-कायदा को लेकर यह जानकारी ऐसे समय सामने आई है, जब पहले से ही पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। अल कायदा, अफगान तालिबान के समर्थन में ही पाकिस्तान के खिलाफ हुआ है।
पाकिस्तान के खिलाफ अल कायदा ने तेज किया अपना प्रचार अभियान
खुफिया ब्यूरो के अधिकारियों ने बताया कि पिछले एक सप्ताह में अल-कायदा की मीडिया इकाई ने पाकिस्तान के सत्ता प्रतिष्ठान के खिलाफ अपने प्रचार अभियान को तेज कर दिया है। अल कायदा का मानना है कि पाकिस्तान सरकार पश्चिमी देशों के करीब जा रही है, जिससे क्षेत्रीय हित प्रभावित हो रहे हैं। अल-कायदा ने पाकिस्तान सेना और अफगानिस्तान में उसकी भूमिका की आलोचना करते हुए अपने समर्थकों से पाकिस्तान में शासन के खिलाफ लड़ाई छेड़ने का आह्वान किया है।
आईएसआईएस का भी समर्थन कर रहा पाकिस्तान
एक खुफिया ब्यूरो अधिकारी के मुताबिक, यह घटनाक्रम अपेक्षित था। पाकिस्तान न केवल अफगानिस्तान के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है, बल्कि वह अल-कायदा के प्रतिद्वंद्वी संगठन इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत (आईएसकेपी) को भी बढ़ावा दे रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, आईएसकेपी ने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के खिलाफ लड़ाई में लश्कर-ए-तैयबा और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के साथ मोर्चा संभाला है। हालांकि पहले आईएसकेपी पाकिस्तान के खिलाफ बोलता रहा है, लेकिन अब वह उसका सहयोगी बन गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आईएसकेपी का मुख्य लक्ष्य तालिबान के खिलाफ अपनी स्थिति मजबूत करना है। तालिबान के कमजोर होने से आईएसकेपी को अफगानिस्तान में विस्तार का मौका मिल सकता है। हालांकि अब तक अफगान तालिबान ने आईएसकेपी को काफी हद तक नियंत्रित रखा है।
सेना के खिलाफ लोगों की नाराजगी का फायदा उठाने की कोशिश
वर्तमान हालात में अल-कायदा को लगता है कि वह पाकिस्तान में जनभावनाओं का फायदा उठाकर आंतरिक अस्थिरता पैदा कर सकता है। पाकिस्तान में बड़ी संख्या में लोग सरकार और खासकर पाकिस्तानी सेना के खिलाफ हैं, लेकिन सेना की सख्ती के कारण उनकी आवाज दबा दी गई है। अल-कायदा इन्हीं भावनाओं को भुनाने की कोशिश कर रहा है। अधिकारियों ने यह भी आशंका जताई है कि अल-कायदा निकट भविष्य में पाकिस्तान में बड़े हमलों की साजिश रच सकता है। अपने प्रचार माध्यमों के जरिए संगठन ने लोगों को हिंसा के लिए उकसाया है और पाकिस्तान के सत्ता प्रतिष्ठान को निशाना बनाने की बात कही है।
संगठन ने अफगानिस्तान के समर्थन का भी ऐलान किया है और उन लोगों को अपने साथ लाने की कोशिश कर रहा है जो अफगान मुद्दों के प्रति सहानुभूति रखते हैं। अफगान शरणार्थियों को पाकिस्तान से बाहर निकालने के मुद्दे को भी अल-कायदा अपने प्रचार में प्रमुखता से उठा रहा है। खुफिया अधिकारियों का कहना है कि भले ही अल-कायदा इस समय सैन्य रूप से उतना मजबूत नहीं है, लेकिन उसकी विचारधारा अभी भी दुनिया भर में कई लोगों को प्रभावित करती है, जिससे उसकी प्रासंगिकता बनी हुई है।
पाकिस्तान में कई आतंकी संगठनों के सक्रिय होने का खतरा पैदा हुआ
विशेषज्ञों के मुताबिक, अल-कायदा पहले व्यापक प्रचार के जरिए माहौल बनाने की कोशिश करेगा, ताकि पाकिस्तान में असंतोष बढ़े और उसे नए समर्थक मिल सकें। इसके बाद वह बड़े हमलों की योजना बना सकता है। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि पाकिस्तान की नीतियों, खासकर अफगानिस्तान, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में हस्तक्षेप ने क्षेत्र को अस्थिर बना दिया है, जिससे कई आतंकी संगठनों को फिर से सक्रिय होने का मौका मिला है।