फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Pakistan: सुधारों के बिना आर्थिक हालात और बिगड़ने की चेतावनी, ICMA ने कहा- अर्थव्यवस्था में तुरंत सुधार जरूरी

सार

यह रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) के गवर्नेंस और करप्शन डायग्नोस्टिक को एक ऐसे सुधार रोडमैप में बदल देती है जिसे लागू किया जा सके, जिसमें वित्तीय प्रबंधन, टैक्सेशन, सार्वजनिक निगरानी, न्याय, भ्रष्टाचार-रोधी निकाय और डिजिटल गवर्नेंस शामिल हैं।
 
विज्ञापन
पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था में तुरंत सुधार बेहद आवश्यक : आईसीएमए - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पाकिस्तानी लोगों का भरोसा फिर से बनाने, सरकारी संस्थानों को मजबूत करने और आर्थिक प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए तुरंत व्यावहारिक सरकारी सुधारों की जरूरत है। यह बात इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट एंड मैनेजमेंट अकाउंटेंट्स ऑफ पाकिस्तान (आईसीएमए) की तरफ से जारी एक बड़ी विश्लेषण समीक्षा में कही गई। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने शनिवार को बताया कि इन सुधारों के बिना देश में आर्थिक हालात और बिगड़ेंगे।
विज्ञापन


यह रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) के गवर्नेंस और करप्शन डायग्नोस्टिक को एक ऐसे सुधार रोडमैप में बदल देती है जिसे लागू किया जा सके, जिसमें वित्तीय प्रबंधन, टैक्सेशन, सार्वजनिक निगरानी, न्याय, भ्रष्टाचार-रोधी निकाय और डिजिटल गवर्नेंस शामिल हैं।

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, यह चेतावनी देती है कि लगातार गवर्नेंस की कमजोरियां और खराब भ्रष्टाचार नियंत्रण सीधे तौर पर आर्थिक विकास, संस्थानों की विश्वसनीयता और निवेशकों के भरोसे को कमजोर कर रहे हैं। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, इन नतीजों के आधार पर, आईसीएमए ने 32 जरूरी सुधार क्षेत्रों की पहचान की है।
विज्ञापन


जरूरी सरकारी कामों में गंभीर कमजोरियां भी सामने आईं
एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट में बताए गए आईएमएफ डायग्नोस्टिक के मुताबिक, पाकिस्तान को बजट प्रबंधन, राजकोष प्रशासन, बाजार नियंत्रण, वित्तीय क्षेत्र की निगरानी, धन-शोधन रोधी प्रणाली और कानून राज जैसे जरूरी सरकारी कामों में गंभीर कमजोरियों का सामना करना पड़ रहा है। इस आधार पर आईसीएमए ने जिन 32 जरूरी सुधार क्षेत्रों को पहचाना है उनका मकसद डायग्नोसिस से फोकस हटाकर इन्हें लागू करने पर है।

वित्तीय अनुशासन हुआ कमजोर
रिपोर्ट में कहा गया है कि बिना असरदार संसदीय जांच के साल में बार-बार बजट में बदलाव से वित्तीय अनुशासन कमजोर हुआ है। सरकारी खर्च वित्तीय जोखिम व बजट में बदलाव का आकलन करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों ने स्वतंत्र संसदीय बजट कार्यालय बनाने की सिफारिश की। एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, पारदर्शिता बढ़ाने के लिए बड़े बजट बदलावों पर सुनवाई व बाहरी ऑडिट ट्रैकिंग का भी प्रस्ताव है।

ये भी पढ़ें: Pakistan: 5000 डॉक्टर-11000 इंजीनियर ने छोड़ा पाकिस्तान! PAK के पूर्व सांसद के दावे से मुनीर की हो रही थू-थू
विज्ञापन


रावलपिंडी में स्वास्थ्य क्षेत्र पर संकट गहराया
द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 रावलपिंडी के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए गंभीर चुनौतियों वाला रहा। यहां इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड पर अरबों रुपये खर्च करने के बावजूद बड़े सरकारी अस्पतालों में बिस्तर, स्टाफ और जरूरी मेडिकल सेवाओं की भारी कमी है। ऐसे हालात ने मरीजों के लिए गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं। जिले में 104 डिस्पेंसरी, 71 बेसिक हेल्थ यूनिट, 10 ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र, 27 प्राइवेट इकाइयां और 20 क्लीनिक-ऑन-व्हील्स यूनिट हैं। लेकिन किसी के भी पास जरूरी उपकरण और दवाएं तक नहीं हैं।

अन्य वीडियो
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें