भारतीय नौसेना का गश्ती जहाज आईएनएस बत्ती मालव आधिकारिक दौरे पर श्रीलंका के त्रिंकोमाली बंदरगाह पहुंचा है। श्रीलंका की नौसेना ने इसके बारे जानकारी दी है। श्रीलंकाई नौसेना ने बताया कि बत्ती मालव के दो दिवसीय दौरे का उद्देश्य दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच सहयोग और सद्भावना को बढ़ावा देना है।
बत्ती मालव के दो दिवसीय दौरे के बारे में श्रीलंकाई नौसेना ने एक बयान भी जारी किया है। इस बयान में द्वीप राष्ट्र की नौसेना ने बताया कि मंगलवार को भारतीय पोत का वहां औपचारिक स्वागत किया गया। इस जहाज के साथ 101 सदस्यीय चालक दल भी श्रीलंका पहुंचा है।
बयान के मुताबिक, इस दौरान जहाज के कमांडिंग ऑफिसर लेफ्टिनेंट कमांडर मान सिंह एम माने ने श्रीलंका के पूर्वी नौसेना कमान मुख्यालय में पूर्वी नौसेना क्षेत्र के कमांडर और स्वयंसेवी नौसेना बल के कमांडेंट रियर एडमिरल दम्मिका कुमारा से मुलाकात की। इस दौरान दोनों के बीच, दोनों देशों की नौ सेनाओं के बीच सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।
श्रीलंकाई नौसेना के कार्यक्रमों में शामिल होंगे चालक दल के सदस्य
बयान में यह भी कहा गया है कि आधिकारिक दौरे के दौरान आईएनएस बत्ती मालव के चालक दल के सदस्य दोनों नौसेनाओं के बीच सहयोग और सद्भावना को बढ़ावा देने के लिए श्रीलंकाई नौसेना द्वारा आयोजित कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेगा। साथ ही वे त्रिंकोमाली बंदरगाह में दर्शनीय स्थलों की यात्रा भी करेंगे। गौरतलब है कि त्रिंकोमाली पहले लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम (LTTE) का गढ़ था।
वीबीएसएस ट्रेनिंग में लिया हिस्सा
इस दौरान आईएनएस 'बत्ती मालव' के चालक दल ने मंगलवार को त्रिंकोमाली में स्पेशल बोट स्क्वाड्रन मुख्यालय में विजिट बोर्ड सर्च एंड सीज (वीबीएसएस) प्रशिक्षण अभ्यास किया। जानकारी के मुताबिक, भारतीय गश्ती जहाज बुधवार को श्रीलंका से प्रस्थान करेगा। साथ ही इसके श्रीलंकाई नौसेना के जहाज के साथ एक पैसेज एक्सरसाइज(PASSEX) में शामिल होने की उम्मीद है।
बांगरम-श्रेणी का है गश्ती जहाज
गौरतलब है कि आईएनएस बत्ती मालव भारतीय नौसेना के बांगरम-श्रेणी के गश्ती जहाजों का तीसरा जहाज है। इसे तेजी से आगे बढ़ने वाले सतह जहाजों के खिलाफ प्रतिबंध लगाने और तटीय क्षेत्रों और विशेष आर्थिक क्षेत्र में खोज और बचाव कार्यों के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसका वजन 260 टन है जबकि इसकी लंबाई 46 मीटर है। निकोबार के बत्तीमालव द्वीप के नाम पर इसका नाम रखा गया था। इस जहाज को गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स ने डिजाइन और बनाया था।
नौसेना की पहली स्वदेशी ‘फास्ट इंटरसेप्टर’ नौका का समुद्री परीक्षण
भारतीय नौसेना अपनी पहली स्वदेशी ऑटोनॉमस फास्ट इंटरसेप्टर बोट (ए-एफआईबी) का पहला समुद्री परीक्षण गोवा से मुंबई के बीच 18 से 22 मई के बीच करेगी। नौका को गुरुवार को वास्को से झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा। यह समुद्री क्षमताओं के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग करने के उद्देश्य से ऑटोनॉमस फास्ट इंटरसेप्टर बोट (ए-एफआईबी) सघन समुद्री यातायात में स्वायत्त संचालन करने में सक्षम है। ए-एफआईबी को प्रौद्योगिकी ऊष्मायन फोरम (टीआईएफ) के तहत भारतीय नौसेना के हथियार और इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम इंजीनियरिंग प्रतिष्ठान (डब्ल्यूईएसईई) और मैसर्स बीईएल (बीजी) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है।