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US Inflation: अमेरिका में वैसी महंगाई, जैसी ‘पहले कभी नहीं देखी गई’ राष्ट्रपति जो बाइडन की चिंता बढ़ी

Sun, 12 Jun 2022 03:03 PM IST
संजीव कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

महंगाई के नए आंकड़े सामने आने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा- ‘अमेरिका के लोग चिंतित हैं और मैं इस बात को समझता हूं। उनके चिंतित होने का ठोस कारण है।
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अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन - फोटो : PTI
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विस्तार
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अमेरिका में महंगाई बेकाबू होती दिख रही है। तमाम अनुमानों को झुठलाते हुए मुद्रास्फीति दर मई में 8.6 फीसदी तक पहुंच गई। 1981 के बाद दुनिया की सबसे धनी अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति दर पहली बार इस हद तक पहुंची है। अर्थशास्त्रियों के मुताबिक शुक्रवार को घोषित आंकड़ों में मकान किराये में हुई बढ़ोतरी दर को शामिल नहीं किया गया है, जो अभी 17 प्रतिशत है। अगर उसे भी शामिल किया जाए, तो अमेरिका में महंगाई की असल दर दो अंकों में नजर आएगी।
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अमेरिका के लोग चिंतित हैं और मैं इस बात को समझता हूं: बाइडन
महंगाई के नए आंकड़े सामने आने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा- ‘अमेरिका के लोग चिंतित हैं और मैं इस बात को समझता हूं। उनके चिंतित होने का ठोस कारण है। (रूसी राष्ट्रपति व्लादीमीर) पुतिन टैक्स का जैसा असर खाद्य पदार्थों और गैस पर हुआ है, वैसा हमने इसके पहले कभी नहीं देखा।’ विश्लेषकों के मुताबिक बाइडन ने महंगाई का सारा दोष रूसी राष्ट्रपति पर डालने की कोशिश की। लेकिन ये बात अमेरिका में बहुत से लोगों के गले नहीं उतर रही है, क्योंकि इसी दौर में बड़ी कंपनियों का मुनाफा लगातार बढ़ रहा है।

इस समय महंगाई दुनिया के लगभग सभी हिस्सों में है। महंगाई बढ़ने की शुरुआत कोविड-19 महामारी के दौरान सप्लाई चेन टूटने के बाद ही हो गई थी। यूक्रेन युद्ध और उसके जवाब में रूस पर प्रतिबंद लगाने के पश्चिमी देशों के फैसले से स्थिति और बिगड़ी है। पूर्वी यूरोप के देशों में इस समय महंगाई दर दो अंकों में है। जर्मनी और ब्रिटेन में भी यह चार दशक के सबसे ऊंचे स्तर पर है। गरीब देशों में तो महंगाई के कारण खाद्य संकट पैदा होने के संकेत हैँ।
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महंगाई के कारण अलग-अलग देशों के सेंट्रल बैंक ब्याज दरें बढ़ा रहे हैं, जिससे आर्थिक मंदी की आशंका पैदा हो रही है। ये आशंका अमेरिका में भी गहरा गई है। ताजा आंकड़ों के बाद विशेषज्ञों ने संभावना जताई कि फेडरल रिजर्व (अमेरिकी सेंट्रल बैंक) ब्याज दरों में और ज्यादा वृद्धि करेगा। इन्वेस्टमेंट बैंक एवरस्कोर आईएसआई के विशेषज्ञों पीटर विलियम्स और कृष्णा गुहा ने एक टिप्पणी में लिखा- ‘बड़ी तस्वीर यह उभरती है कि मुद्रास्फीति दर बहुत ऊंची है। इसलिए फेडरल रिजर्व की नीति इसे घटाने पर केंद्रित रहेगी।’

 ब्याज दर बढ़ने से कर्ज ले चुके लोगों की किस्तें बढ़ेंगी
अंदेशा यह है कि ब्याज दर बढ़ने से एक तरफ कर्ज ले चुके लोगों की किस्तें बढ़ेंगी जिससे उनके पास उपभोग के लिए कम धन बचेगा, तो दूसरी तरफ निवेश घटेगा। इससे अर्थव्यवस्था मंदी का शिकार हो जाएगी। वेबसाइट एक्सियोस.कॉम ने एक विश्लेषण में कहा है- ‘हर चीज महंगी होने से अमेरिका के लोग ऐसा महसूस कर रहे हें कि उन्हें हर तरफ से निचोड़ा जा रहा है। वे अपने को मंदी के लिए तैयार कर रहे हैं, जिसकी आशंका अब और गहरा गई है।’

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि संपन्न लोगों के लिए महंगाई एक मनोवैज्ञानिक समस्या है, जबकि गरीब अमेरिकियों की रसोई पर इसकी मार पड़ रही है। अखबार लॉस एंजिल्स टाइम्स वरिष्ठ अर्थशास्त्री लियो फेलर ने कहा कि गरीबों पर महंगाई, खास कर गैस की महंगाई की मार तुलनात्मक रूप से ज्यादा पड़ रही है। सबसे ज्यादा प्रभावित छोटे शहरों के लोग हो रहे हैं, जहां आमदनी के अवसर कम हैं।
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