इंडोनेशिया ने पाम ऑयल के निर्यात पर रोक लगाने के फैसले में आंशिक सुधार किया है। इससे महंगाई और चढ़ने की आशंका से दुनिया को कुछ राहत मिली है। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो ने पहले कहा था कि पाम ऑयल के निर्यात पर रोक गुरुवार से अनिश्चित काल के लिए लागू हो जाएगी। लेकिन बाद में जब कृषि मंत्रालय ने इसका विवरण जारी किया, तो उससे जाहिर हुआ कि ये रोक आंशिक है।
पाम ऑयल का इस्तेमाल कई खाद्यों और कॉस्मेटिक्स सहित अन्य उपभोक्ता पदार्थों के उत्पादन में होता है। दुनिया के पाम ऑयल के कुल उत्पादन में इंडोनेशिया का हिस्सा 60 फीसदी है। इंडोनेशिया के बाद पाम ऑयल का एक बड़ा उत्पाद यूक्रेन है। वहां चल रहे युद्ध के कारण वहां से इस उत्पाद की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसकी वजह से दुनिया भर में महंगाई बढ़ी है।
इंडोनेशिया में खाना पकाने के तेल के उत्पादन में पाम ऑयल का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। रमजान महीने में यहां खाद्य तेलों की खपत बढ़ जाती है। राष्ट्रपति विडोडो ने कहा है कि देश के अंदर खाद्य तेल पर्याप्त मात्रा में किफायती दर पर उपलब्ध रहें, इसे उनकी सरकार सुनिश्चित करेगी। वैसे बाजार विशेषज्ञ इस बात से सहमत नहीं हैं कि निर्यात रोकने से इंडोनेशिया में खाद्य तेल सस्ते हो जाएंगे।
युधिष्ठिर ने चेतावनी दी है कि इंडोनेशिया के इस फैसले से जो देश सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे, वे जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं। भारत, पाकिस्तान और चीन इंडोनेशिया के लिए लहसुन का निर्यात रोक सकते हैं। उधर मलेशिया के पौध रोपण एवं कॉमोटिडी मंत्री जुरैदा कमरुद्दीन ने कहा है कि मलेशिया विश्व बाजार को पाम आयल की आपूर्ति करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के बाद सीमाएं खुलने के कारण अब मलेशिया में पाम ऑयल का उत्पादन बढ़ने की मजबूत संभावना है।
सॉल्वेंट एक्स्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक बीवी मेहता ने कहा है कि इंडोनेशिया के निर्यात रोकने के अचानक फैसले का भारत और अन्य बड़े उपभोक्ता देशों पर बहुत खराब असर पड़ेगा। उन्होंने वेबसाइट निक्कईएशिया को बताया- ‘भारत, पाकिस्तान और चीन तीनों पाम ऑयल आयात के लिए इंडोनेशिया पर काफी निर्भर हैं।’ उन्होंने कहा कि यूक्रेन में युद्ध के कारण पहले से ही सूरजमुखी तेल का संकट था। अब मुश्किल और बढ़ जाएगी। भारत में हर साल दो करोड़ 20 लाख टन खाना पकाने के तेल की खपत होती है। इनमें पाम ऑयल का हिस्सा 80 लाख टन है।
संयुक्त राष्ट्र की संस्था- फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन (एफएओ) के हालिया आंकड़ों के मुताबिक बीते मार्च में वनस्पति तेलों के दाम 23.2 फीसदी बढ़े। इन तेलों की इतनी महंगाई इसके पहले कभी नहीं देखी गई थी।