मानसूनी बारिश के चलते घनी आबादी वाले इंडोनेशियाई द्वीप पर ज्वालामुखी में बड़े धमाके के बाद सोमवार को मौसम सुधरते ही बचावकर्मियों ने कुछ लोगों के जीवित बचे होने की उम्मीद में राहत और बचाव कार्य फिर से शुरू किया। कई गांवों के आसमान में ज्वालामुखी से लावे के साथ निकली राख के गुबार के कारण सूरज की रोशनी नहीं पहुंच पा रही है, लेकिन किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।
विज्ञापन
बता दें, पूर्वी जावा प्रांत के लुमजांग जिले में स्थित मांउट सेमेरू ने रविवार को आकाश की ओर 1,500 मीटर (लगभग 5,000 फुट) से अधिक ऊंचाई तक धुएं के बादल उठे थे। सम्बरवुलुह और सुपितुरंग के सबसे अधिक प्रभावित गांवों में सोमवार को सैकड़ों बचावकर्मियों को तैनात किया गया, जहां घर और मस्जिदें ज्वालामुखी की टनों राख के नीचे दबी हुई हैं। लावे और धमाके के दौरान जहरीली गैसें चारों तरफ फैल गई। ज्वालामुखी की गैस ने पूरे गांव में दम घोंटू स्थिति पैदा कर दी है और एक पुल को क्षतिग्रस्त कर दिया है। इस पुल को पिछले साल ज्वालामुखी विस्फोट में नष्ट होने के बाद फिर से बनाया गया था।