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Indonesia: इंडोनेशिया में भीड़ ने संसद भवन को किया आग के हवाले, तीन की मौत; पुलिस मुख्यालय को भी बनाया निशाना

Sat, 30 Aug 2025 04:08 PM IST
हिमांशु चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, जकार्ता

सार

इंडोनेशिया में सांसदों को भारी भरकम आवास भत्ता दिए जाने के विरोध में भड़के प्रदर्शन हिंसक हो गए। मकस्सार में गुस्साई भीड़ ने संसद भवन को आग लगा दी, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई। कई शहरों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं। 21 वर्षीय युवक की पुलिस वाहन से कुचले जाने की घटना के बाद गुस्सा और भड़क गया। 
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इंडोनेशिया में प्रदर्शन (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
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इंडोनेशिया में लगातार बढ़ते विरोध प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया है। साउथ सुलावेसी प्रांत की राजधानी मकास्सार में गुस्साई भीड़ ने शुक्रवार देर रात स्थानीय संसद भवन में आग लगा दी। इस घटना में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को जलने और इमारत से कूदने के कारण चोटें आईं। घटनास्थल से शनिवार सुबह शव बरामद किए गए।
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स्थानीय रिपोर्ट में बताया गया कि पूरी इमारत आग की लपटों से घिर गई और रातभर क्षेत्र नारंगी रोशनी में डूबा रहा। इसके अलावा वेस्ट जावा के बांडुंग शहर में भी प्रदर्शनकारियों ने क्षेत्रीय संसद भवन को आग के हवाले कर दिया। सुराबाया शहर में गुस्साई भीड़ ने पुलिस मुख्यालय पर धावा बोला, वाहनों को आग के हवाले किया और बैरिकेड तोड़ दिए। पुलिस ने भीड़ को काबू करने के लिए आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने पटाखों और लकड़ी की छड़ों से जवाब दिया।

प्रदर्शन की वजह और हालात
जकार्ता में शनिवार को स्थिति कुछ हद तक सामान्य रही। सुरक्षा बलों ने जली हुई गाड़ियां, पुलिस चौकियां और बस स्टॉप हटाने का काम किया। दरअसल, प्रदर्शन की शुरुआत सोमवार को हुई थी जब यह खुलासा हुआ कि संसद के सभी 580 सांसदों को वेतन के अलावा हर महीने 50 मिलियन रुपिया (करीब 3,075 डॉलर) आवास भत्ता दिया जा रहा है। यह राशि जकार्ता की न्यूनतम मजदूरी से लगभग दस गुना अधिक है। आलोचकों का कहना है कि महंगाई, बेरोजगारी और टैक्स बोझ झेल रहे आम नागरिकों के बीच इतना भारी भत्ता देना बेहद असंवेदनशील कदम है।
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युवा की मौत से भड़का प्रदर्शन

प्रदर्शन और ज्यादा हिंसक तब हो गया जब 21 वर्षीय अफ्फान कुर्नियावान की मौत की खबर सामने आई। वह फूड डिलीवरी करते समय जकार्ता में प्रदर्शन के बीच फंस गया था। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिखा कि नेशनल पुलिस की मोबाइल ब्रिगेड की एक बख्तरबंद गाड़ी भीड़ में घुस गई और अफ्फान को कुचल दिया। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया और सुरक्षा बलों के खिलाफ गुस्सा और बढ़ा। केवल जकार्ता में ही गुरुवार तक 951 लोगों को गिरफ्तार किया गया। मानवाधिकार आयोग (कोमनस हैम) ने कहा कि प्रदर्शनकारियों की चोटिल संख्या पुलिस के बताए आंकड़ों से कहीं ज्यादा है।
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इस बीच एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इंडोनेशियाई सरकार की आलोचना की और कहा कि लोगों को प्रदर्शन करने पर हिंसा झेलनी पड़ रही है, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है। संगठन ने मांग की कि प्रदर्शन के अधिकार का उपयोग करने वाले किसी भी व्यक्ति को तुरंत रिहा किया जाए। अधिकारियों ने पुष्टि की कि अफ्फान की मौत से जुड़े सात पुलिसकर्मियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। 

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