अमेरिका में पांच नवंबर को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले भारतीय समुदाय के एक समूह ने चुनावों में भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए एक अभियान की शुरुआत की है। गैर-लाभकारी संस्था फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज (एफआईआईडीएस) ने बताया ‘इंडो अमेरिकन वोट्स मैटर्स’ नाम से शुरू हुए इस अभियान में भारतवंशियों से एकजुट होने की अपील की जा रही है।
संस्था ने कहा है कि देश के भविष्य को आकार देने में समुदाय जो महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है, इस अभियान में उसे रेखांकित किया गया है। एफआईआईडीएस के मुताबिक, एक विविध और उभरते प्रवासी समुदाय के रूप में भारतीय-अमेरिकियों, जिनकी अमेरिका में आबादी 45 लाख के करीब है, के पास 2024 के चुनाव में उल्लेखनीय प्रभाव दर्शाने का विशिष्ट अवसर है। फ्लोरिडा, जॉर्जिया, एरिजोना, वर्जीनिया, न्यूजर्सी और पेनसिल्वेनिया जैसे महत्वपूर्ण प्रांतों में केंद्रित भारतीय-अमेरिकी वोट महत्वपूर्ण चुनावों के परिणाम को निर्धारित करने में निर्णायक साबित हो सकते हैं। बयान में कहा गया कि भारतवंशियों पर बड़े पैमाने पर किए जाने वाले सर्वेक्षण से अमेरिका के घरेलू और वैश्विक नीतिगत मामलों को लेकर उनके विचारों का पता चलेगा, जो समुदाय के लिए अहम होगा।
हैरिस के लिए भारतवंशियों की जमीनी मुहिम
भारतीय-अमेरिकियों के समूह ने डेमोक्रेटिक पार्टी से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार कमला हैरिस के समर्थन में जमीनी स्तर पर मुहिम शुरू की है। ‘इंडियन अमेरिकन्स फॉर हैरिस’ अभियान का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि राष्ट्रपति चुनाव में हैरिस को अमेरिका का नेतृत्व करने वाले भारतीय विरासत के पहले व्यक्ति के रूप में चुनकर इतिहास बनाया जाए। उत्तरी कैरोलिना के व्यवसायी और 2001 में भारतीय पद्म भूषण पाने वाले स्वदेश चटर्जी ने कहा, यह पहली बार है कि हमारे पास कोई है जिसकी मां भारत से है। इसलिए भारतवंशी समुदाय को पार्टी लाइन से परे उनका समर्थन करना चाहिए।
स्विंग प्रांतों के लिए अवसर
एफआईआईडीएस के नीति एवं रणनीति मामलों के प्रमुख खंडेराव कंद ने कहा, राष्ट्रपति चुनावों के लिए महत्वपूर्ण ‘स्विंग प्रांतों’ में अच्छी खासी आबादी के साथ भारतीय-अमेरिकियों के पास प्रभाव डालने का एक अनूठा अवसर है। अमेरिका में फ्लोरिडा, जॉर्जिया, एरिजोना, वर्जीनिया, न्यूजर्सी और पेनसिल्वेनिया जैसे प्रांत ‘स्विंग प्रांत’ कहलाते हैं, क्योंकि वहां किसी एक पार्टी का दबदबा नहीं होता और नतीजे किसी भी दल के पक्ष में जा सकते हैं।