एक प्रतिष्ठित भारतीय अमेरिकी ने सीएए (संशोधिक नागरिकता कानून) पर चल रहे विवाद को देखते हुए इसका नाम बदलकर पड़ोसी देश द्वारा उत्पीड़ित शरणार्थी कानून रखने का सुझाव दिया है। गैर लाभकारी संगठन फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज (एफआईआईडीएस) के निदेशक खांडेराव ने कहा कि इससे जो धारणा बनेगी उसे चुनौती देना मुश्किल होगा।
एफआईआईडीएस की यह टिप्पणी ऐसे वक्त में आई है जब सीएए के खिलाफ भारत में प्रदर्शन जारी हैं। कांड ने मंगलवार को वाशिंगटन डीसी के उपनगर वर्जीनिया में संशोधित नागरिकता कानून और अनुच्छेद 370 रद्द किए जाने पर एक चर्चा के दौरान कहा कि सीएए का नाम बदलना इसलिए उचित रहेगा, क्योंकि यह शरणार्थियों को नागरिकता देता है और किसी से भी नागरिकता नहीं छीनता।
इसी तरह अमेरिकी-यहूदी समिति में एशिया-प्रशांत संस्थान के सहायक निदेशक और भारत में जन्मे निसिम रुबेन ने भी भारतीय सरकार के कदम को सही ठहराया। इस कार्यक्रम में राजनीतिक विश्लेषक संत गुप्ता और भारत-अमेरिकी कश्मीर फोरम के पूर्व अध्यक्ष डॉ. विजय सजावल भी मौजूद रहे। इस दौरान गिलगित-बाल्टिस्तान के कार्यकर्ता सांग सेरिंग ने कहा कि भारत का इस क्षेत्र पर वैध अधिकार है।