अघी के मुताबिक, यह प्रयोग एक हद तक भारत में सफल भी हुआ। हालांकि, दूसरा चरण निर्यात बाजारों पर केंद्रित नहीं था। इस दौरान घरेलू बाजार में दक्षता लाने पर जोर दिया गया। भारत में स्टार्टअप के लिए माहौल के संबंध में उन्होंने कहा, 'तीसरे चरण में हम देख रहे हैं कि अब ऐसी उत्पाद कंपनियां सामने आ रही हैं, जिन्हें दुनियाभर के लिए विकसित किया गया है। इन उत्पादों की श्रेणियों में आवाज की पहचान से लेकर साइबर सुरक्षा और हेल्थकेयर क्षेत्र तक शामिल हैं।
दिखने लगे हैं सफलता के लक्षण
अघी ने कहा कि मुझे लगता है कि वे अब सफलता के लक्षण दिखाने लगे हैं। आप इसे हैदराबाद के 'टी-हब' जैसे इनक्युबेटर्स में देख सकते हैं। इसका एक उदाहरण चेन्नई की कंपनी जोहो है, जिसका हम बिक्री और मार्केटिंग के लिए इस्तेमाल करते हैं। यह कंपनी हर साल अमेरिका में हजारों ग्राहकों को जोड़ रही है। इसलिए मुझे लगता है कि एक ही क्षेत्र में कुछ कंपनियां काम कर रही हैं और बाजार में हिस्सेदारी भी हासिल कर रही हैं।
प्रॉपर्टी कंसल्टेंट कंपनी सीबीआरई ने तकनीक नवोन्मेष के जरिए घरेलू रियल एस्टेट में बदलाव लाने की दिशा में काम कर रहे स्टार्टअप की पहचान कर उनकी मदद के लिए आईटी उद्योग निकाय नासकॉम से करार किया है। सीबीआरई साउथ एशिया प्राइवेट लिमिटेड ने कहा कि वह नासकॉम की मदद से प्रॉपटेक प्रतियोगिता आयोजित करेगी। इसका लक्ष्य रियल एस्टेट के लिए तकनीकी समाधान तैयार कर रहे और नवोन्मेष पर जोर दे रहे स्टार्टअप की पहचान करना है।
नासकॉम के प्रमुख (सदस्यता) श्रीकांत श्रीनिवासन ने कहा कि रियल एस्टेट क्षेत्र को स्टार्टअप पारिस्थितिकी में पनपने में मदद करने के लिए सीबीआरई के साथ करार किया गया है। सीबीआरई इंडिया के चेयरमैन एवं सीईओ अंशुमान मैगजीन ने कहा कि भारत जैसी विकासशील अर्थव्यवस्था में तकनीकी रूप से तैयार होना और परिवर्तन की दिशा में काम करने वाले व्यवसायों को प्रोत्साहित करना अनिवार्य है, जो इसे वास्तव में वैश्विक उद्योग में तब्दील करेगा।